EVM नहीं बैलेट पेपर से हों चुनाव: चुनाव आयोग के सामने INDIA ब्लॉक ने रखीं 6 बड़ी शर्तें
क्या विपक्ष का 'लोकतंत्र बचाओ अभियान' चुनाव आयोग को अपने रवैये और फैसलों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर पाएगा या फिर सरकार और आयोग की तरफ से इस राजनीतिक घेराबंदी का क्या जवाब आता है।
देश की राजनीति में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और स्पेशल समरी रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर घमासान चरम पर पहुँच गया है। विपक्षी दलों के 'INDIA' गठबंधन ने एकजुट होकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। 'द फेडरल' के लोकप्रिय कार्यक्रम 'जनपथ' में एंकर मनीष कुमार ने 'द फेडरल' के पॉलिटिकल एडिटर पुनीत निकोलस यादव के साथ इस पूरे सियासी घटनाक्रम और विपक्ष की भावी रणनीति का गहन विश्लेषण किया।
विपक्ष की महाबैठक और 'लोकतंत्र बचाओ अभियान' का ऐलान
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एंकर मनीष कुमार ने बताया कि हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन की उच्चस्तरीय बैठक के बाद माहौल पूरी तरह से गर्मा गया है। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रेस्कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि देश में लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को बचाने के लिए पूरा विपक्ष पूरी तरह गोलबंद और एकजुट है।
पॉलिटिकल एडिटर पुनीत निकोलस यादव के अनुसार, "विपक्ष केवल मौखिक विरोध तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि उसने चरणबद्ध तरीके से सड़क पर उतरने का पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट में जिस तरह से नाम हटाए जा रहे हैं, उससे लोकतंत्र की बुनियाद खतरे में पड़ गई है।"
विपक्ष ने 2 से 8 अक्टूबर के बीच देशभर में 'लोकतंत्र बचाओ अभियान' चलाने का फैसला किया है। इस सप्ताह भर चलने वाले आंदोलन के तहत देश के हर जिले में विपक्षी कार्यकर्ता एकजुट होकर जिलाधिकारी (DM) कार्यालयों का घेराव करेंगे और विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की पुरजोर मांग करेंगे।
सड़क से राष्ट्रपति भवन तक आंदोलन का ब्लूप्रिंट
जनपथ में चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि विपक्ष इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर एक जन-आंदोलन बनाने की योजना पर काम कर रहा है। रणनीति के तहत:
6 अक्टूबर को सांसदों का मार्च: विपक्षी दलों के सभी सांसद 6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग (Election Commission) के मुख्यालय तक विशाल मार्च निकालेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
अक्टूबर और नवंबर में 5 बड़ी रैलियाँ: देश के आम नागरिकों तक 'वोट चोरी' और मतदाता सूची में गड़बड़ियों के मुद्दे को पहुँचाने के लिए अक्टूबर और नवंबर के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में 5 विशाल महारैलियाँ आयोजित की जाएँगी। इन रैलियों के स्थान और तिथियों की घोषणा जल्द ही की जाएगी।
राष्ट्रपति से गुहार: INDIA गठबंधन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में देश की राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगेगा। विपक्ष राष्ट्रपति के समक्ष सबूतों के साथ यह पक्ष रखेगा कि किस तरह कथित 'वोट चोरी' और वोटर लिस्ट में धांधली के कारण लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
INDIA गठबंधन की चुनाव आयोग से 6 मुख्य माँगें
'जनपथ' में पुनीत निकोलस यादव ने इस बात पर जोर दिया कि विपक्षी दलों ने सिर्फ विरोध दर्ज नहीं कराया है, बल्कि चुनाव आयोग के सामने 6 बुनियादी माँगें रखकर व्यवस्था में सुधार की वकालत भी की है:
बैलेट पेपर की वापसी: आगामी सभी चुनावों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर से कराया जाए ताकि जनता का भरोसा बहाल हो सके।
पुरानी वोटर लिस्ट का इस्तेमाल: वर्तमान चुनावों में विवादास्पद 'SIR' (स्पेशल समरी रिवीजन) से पहले की मतदाता सूची को ही प्रामाणिक मानकर लागू किया जाए।
युवा मतदाताओं के लिए सुगम प्रक्रिया: पहली बार वोट देने जा रहे 18 वर्ष के युवाओं के लिए नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
बिना कारण नाम न हटाया जाए: किसी भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से काटा जाए, तो उससे पहले उसे लिखित सूचना (नोटिस), कारण का स्पष्टीकरण और अपील करने का पर्याप्त अवसर दिया जाए।
स्पष्ट और पारदर्शी मतदाता सूची: वोटर लिस्ट में प्रत्येक विधानसभा और बूथ स्तर की जानकारी पूरी तरह से स्पष्ट, अद्यतन और सार्वजनिक हो।
आयोग की जवाबदेही तय हो: चुनाव आयोग अपनी पूरी निष्पक्षता और जवाबदेही साबित करे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेकर फैसले ले।
राजनीतिक मायने और भविष्य का रास्ता
शो के समापन पर एंकर मनीष कुमार और पुनीत निकोलस यादव ने निष्कर्ष निकाला कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का यह सख्त रुख केवल एक प्रशासनिक शिकायत नहीं है, बल्कि यह आने वाले आगामी विधानसभा और आम चुनावों के संदर्भ में एक बड़ा नैरेटिव सेट करने का प्रयास है।
अब देखना यह होगा कि क्या विपक्ष का 'लोकतंत्र बचाओ अभियान' चुनाव आयोग को अपने रवैये और फैसलों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर पाएगा या फिर सरकार और आयोग की तरफ से इस राजनीतिक घेराबंदी का क्या जवाब आता है।
