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दिवाली पर शेयर बाजार में बहार: जानिए क्यों गिरते ग्लोबल मार्केट के बीच उछल रहा है भारतीय बाजार?

त्योहारों के इस मौसम में एक तरफ जहां वैश्विक शेयर बाजार और अमेरिकी बाजार मंदी और गिरावट से जूझ रहे हैं, वहीं भारतीय शेयर बाजार (Sensex & Nifty) तेजी के नए रिकॉर्ड बना रहा है।


त्योहारों का सीजन आ चुका है और दिवाली की खुशियों के बीच भारतीय शेयर बाजार भी निवेशकों पर जमकर मेहरबानी बरसा रहा है। एक तरफ जहां वैश्विक बाजार (Global Markets) और खास तौर पर अमेरिकी शेयर बाजार में मंदी का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ भारत का दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) हर दिन ऊंचाइयों के नए आयाम छू रहा है। अमेरिकी बाजार में विक्स (VIX) सूचकांक में उछाल और टेक कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के कारण गिरावट देखी जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भारतीय बाजार की इस एकतरफा तेजी के पीछे कौन से मुख्य कारक (Factors) हैं और क्या यह तेजी दिवाली के बाद भी जारी रहेगी?

द फेडरल के इस खास शो जनपथ में एंकर प्रदीप सहगल ने बात की शरद कोहली, अर्थशास्त्री, राजीव रंजन झा, संपादक निवेश मंथन और मनोहर मनोज, अर्थशास्त्री अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार का भविष्य किस दिशा में जा रहा है।

1. भारतीय शेयर बाजार में तेजी के मुख्य कारण

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार का वैश्विक दबाव से अलग होकर प्रदर्शन करना कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई मजबूत आर्थिक कारण हैं:

- विदेशी निवेशकों (FIIs/FPIs) की वापसी: पिछले कुछ समय से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर चीन, कोरिया और अमेरिका जैसे बाजारों में लगा रहे थे। लेकिन अमेरिका में एआई (AI) बबल फटने की आशंका और चीनी बाजार में आई मंदी के कारण अब विदेशी निवेशक दोबारा भारत का रुख कर रहे हैं।

- मजबूत कॉर्पोरेट नतीजे (Corporate Earnings): रिलायंस (Reliance), एयरटेल (Airtel) जैसी देश की प्रमुख दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

- एलटीसीजी (LTCG) टैक्स में राहत की उम्मीद: वित्त मंत्री द्वारा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स पर पुनर्विचार करने के संकेतों से भी विदेशी और घरेलू निवेशकों में एक बेहद सकारात्मक संदेश गया है।

- मजबूत इकोनॉमिक इंडिकेटर्स (Macroeconomic Parameters): भारत की जीडीपी (GDP) विकास दर 7.8% के आसपास बनी हुई है। इसके साथ ही जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन और मजबूत पीएमआई (PMI) आंकड़ों ने यह साबित किया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे बहुत मजबूत हैं।

2. कच्चे तेल की कीमतें और भारतीय बाजार का संबंध

भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है कच्चे तेल (Crude Oil) का भाव। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $118 प्रति बैरल से घटकर $93 प्रति बैरल के स्तर पर आ गई हैं। कच्चे तेल में आई इस $25 की बड़ी गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार को सीधे तौर पर मजबूती दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहेंगी, तब तक भारत में महंगाई पर काबू रहेगा और कंपनियों का मार्जिन मजबूत बना रहेगा।

3. क्या दिवाली के बाद भी जारी रहेगी तेजी?

अक्सर यह देखा गया है कि दिवाली के आसपास बाजार में एक उत्साह का माहौल होता है। लेकिन क्या दिवाली के बाद बाजार में कोई बड़ा करेक्शन (Correction) आएगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राजनीति, ट्रंप के बयान और पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) बाजार के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं। हालांकि, भारत का डोमेस्टिक मार्केट (घरेलू निवेशक) अब इतना मजबूत हो चुका है कि किसी भी बाहरी झटके को सहने में सक्षम है। इसलिए, यदि कोई बहुत बड़ा वैश्विक संकट नहीं आता है, तो भारतीय बाजार का लॉन्ग-टर्म अपट्रेंड (Long-term Uptrend) बरकरार रहने की पूरी संभावना है।

4. सोने की कीमतों का रुख (Gold Price Analysis)

आमतौर पर देखा जाता है कि जब भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो सोने (Gold) के दाम तेजी से बढ़ते हैं। लेकिन इस बार कुछ अलग देखने को मिला है। सोने की कीमतें जो हाल ही में अपने रिकॉर्ड उच्चतम स्तरों के करीब पहुंच गई थीं, उनमें अब नरमी देखी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के दाम अब अपनी ऐतिहासिक ऊंचाइयों से नीचे आ रहे हैं और इनमें लॉ ऑफ एवरेज (Law of Average) लागू हो रहा है। यदि डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती बनी रहती है, तो आने वाले समय में सोने की कीमतों में कुछ और गिरावट या ठहराव देखा जा सकता है।

5. एआई (AI) का खतरा और भारतीय आईटी सेक्टर (IT Sector)

अमेरिकी संसद में बदलावों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की नई क्रांति को लेकर भारतीय आईटी सेक्टर (TCS, Infosys, Wipro आदि) के भविष्य पर भी सवाल उठ रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञों ने इस पर स्पष्ट किया कि एआई से नौकरियां खत्म होने की घबराहट केवल एक भ्रांति है। इतिहास गवाह है कि जब 1980 के दशक में कंप्यूटर (Computers) आए थे, तब भी बेरोजगारी का डर फैलाया गया था, लेकिन कंप्यूटर खुद भारत में रोजगार का सबसे बड़ा जरिया बन गया। ठीक उसी तरह:

- भारतीय आईटी कंपनियां एआई की 'सर्जक' (Creators) भले न हों, लेकिन इसे 'लागू करने वाली' (Implementers) जरूर बनेंगी।

- आईटी कंपनियों को अपने बिजनेस और बिलिंग मॉडल में बदलाव करना होगा।

- जो कंपनियां खुद को एआई के अनुकूल तेजी से ढालेंगी, वे इस दौर में विजेता (Winners) बनकर उभरेंगी।

6. नए और खुदरा (Retail) निवेशकों के लिए सलाह

दिवाली और मुहूर्त ट्रेडिंग के मौके पर शेयर बाजार में कदम रखने वाले नए खुदरा निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है:

1. मार्केट टाइम करने से बचें: कभी भी यह सोचकर निवेश न करें कि आज बाजार गिरा है तो ही खरीदेंगे या आज बहुत तेज है तो रुक जाएंगे।

2. नियमित निवेश (Discipline): हर महीने अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा (SIP के जरिए) बाजार में लगाएं। यह एक लंबी अवधि की प्रक्रिया है।

3. एसेट एलोकेशन (Asset Allocation): अपना पूरा पैसा एक जगह न लगाएं। अपने पोर्टफोलियो को इक्विटी (Shares/Mutual Funds), डेट (FDs/Bonds) और गोल्ड (Gold ETFs) में बांटकर रखें।

4. लंबी अवधि का नजरिया रखें: बाजार में short-term उतार-चढ़ाव आते रहेंगे, लेकिन 5 से 10 साल के नजरिए से किया गया अनुशासित निवेश हमेशा बेहतर रिटर्न देता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय काफी मजबूत स्थिति में है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का ग्रोथ इंजन चालू है। ऐसे में निवेशकों को घबराने की जगह सही रणनीति और अध्ययन के साथ बाजार में बने रहने की जरूरत है।

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