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इलाहाबाद HC बवाल: 'जनपथ' में उठी वकीलों के अधिकारों की रक्षा की मांग

द फेडरल देश के 'जनपथ' कार्यक्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट में मारपीट और चेन्नई हाईकोर्ट के विवाद पर वरिष्ठ अधिवक्ता मंजूषा कपिल ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।


Janpath: द फेडरल देश के बहुत ही खास कार्यक्रम 'जनपथ' में हाल ही में न्यायपालिका से जुड़ी दो बहुत बड़ी घटनाओं पर गहरी चर्चा हुई। पहली बड़ी घटना इलाहाबाद हाईकोर्ट की है। वहां एक जज के चेंबर के अंदर ही पुलिस और वकीलों के बीच भयंकर मारपीट की घटना सामने आई है। दूसरी घटना दक्षिण भारत के चेन्नई हाईकोर्ट की है। वहां पुलिस को जजों के खिलाफ लगातार प्रदर्शन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इन दोनों ही घटनाओं ने न्यायपालिका में पुलिस की असली भूमिका और वकीलों के सम्मान पर एक बहुत बड़ी और नई बहस छेड़ दी है।


एंकर मनीष कुमार के अहम सवाल
इस खास कार्यक्रम के जाने माने एंकर मनीष कुमार ने वरिष्ठ अधिवक्ता मंजूषा कपिल से बात की। उन्होंने उनसे इन दोनों घटनाओं के बारे में विस्तार से पूछा। मंजूषा कपिल ने इन दोनों घटनाओं को बिल्कुल अलग अलग नजरिए से देखने की अहम बात कही है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट विवाद पर बेबाक राय
इलाहाबाद हाईकोर्ट की घटना पर बोलते हुए मंजूषा कपिल ने अपनी राय बहुत ही स्पष्ट रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी को कोर्ट में समन किया जा सकता है। यह कोर्ट का अधिकार है। अगर कोई पुलिस अधिकारी मनमानी कर रहा है तो उसे कोर्ट में तलब किया जाना बिल्कुल जायज है। लेकिन उन्होंने एक बात पर अपनी बहुत कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी को कोर्ट रूम में वकीलों की कुर्सी पर बैठने के लिए कहना पूरी तरह गलत है।

वकीलों का सम्मान कम होने की चिंता
उन्होंने आगे बताया कि कोर्ट रूम में वकीलों के बैठने के लिए बिल्कुल अलग जगह होती है। वहीं पुलिस अधिकारियों के खड़े होने या बैठने के लिए अलग जगह निर्धारित होती है। अगर पुलिस अधिकारियों को वकीलों की जगह दी जाएगी तो इससे सीधे तौर पर वकीलों का सम्मान काफी कम होगा।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
मंजूषा कपिल ने पुलिस की मौजूदा कार्यप्रणाली पर भी बहुत गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पुलिस अक्सर अपनी शक्ति की मनमानी करती है। वह निर्दोष लोगों को बहुत बुरी तरह फंसाती है। उन्होंने चर्चा के दौरान कई पुराने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे पुलिस निर्दोष लोगों पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाती है। वह लोगों को लंबे समय तक परेशान करती है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को अपने अधिकारों का भारी दुरुपयोग करने से हर हाल में बचना चाहिए। उन्हें हमेशा न्यायपालिका का पूरा सम्मान करना चाहिए।

चेन्नई हाईकोर्ट घटना पर कपिल की राय
चेन्नई हाईकोर्ट की घटना पर मंजूषा कपिल ने अपना रुख बहुत सख्त रखा। उन्होंने कहा कि जजों के खिलाफ ऐसा प्रदर्शन करना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि जजों का पद बहुत ही ज्यादा सम्मानजनक होता है। उनका हर हाल में पूरा सम्मान किया ही जाना चाहिए। अगर किसी भी व्यक्ति को जज के किसी फैसले से कोई आपत्ति है तो वह कानूनी तरीके अपना सकता है। वह देश के कानून के दायरे में रहकर बहुत आराम से अपनी बात रख सकता है।

न्यायपालिका में बड़े सुधार की मांग
मंजूषा कपिल ने अंत में न्यायपालिका में बड़े सुधार की भारी आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को पुलिस के किसी भी तरह के दबाव से पूरी तरह मुक्त होना चाहिए। उसे हमेशा निष्पक्ष और न्यायपूर्ण फैसले देने चाहिए। इसके अलावा उन्होंने देश भर के वकीलों के अधिकारों की पूरी रक्षा करने की भी बड़ी मांग की है।


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