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UP चुनाव से पहले महिला कार्ड, योगी की बस सेवा बनाम अखिलेश के 40 हजार

'जनपथ' में एंकर मनीष संग चर्चा: योगी आदित्यनाथ की अहिल्याबाई योजना और अखिलेश यादव की श्री सम्मान समृद्धि योजना पर नितिन श्रीवास्तव व नवीन निगम की बहस।


Janpath: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में लगभग 6 महीने का समय बाकी रहने (और आचार संहिता लागू होने से पहले) के साथ ही राज्य में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। महिला वोट बैंक यानी 'आधी आबादी' को अपने पाले में लाने के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) के बीच लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा करने की होड़ मच गई है।


डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के खास राजनीतिक कार्यक्रम 'जनपथ' में एंकर मनीष कुमार ने वरिष्ठ पत्रकार नितिन श्रीवास्तव और वरिष्ठ पत्रकार नवीन निगम के साथ चुनावी घोषणाओं, महिला वोट बैंक की निष्ठा और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों की अनदेखी पर विस्तृत चर्चा की।


अखिलेश बनाम योगी: महिलाओं के लिए बड़े ऐलान
कार्यक्रम के दौरान एक ही दिन में दोनों प्रमुख दलों द्वारा की गई घोषणाओं को रेखांकित किया गया:

समाजवादी पार्टी (अखिलेश यादव व डिंपल यादव):

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने घोषणा की कि राज्य में उनकी सरकार बनने पर 'श्री सम्मान समृद्धि योजना' के तहत महिलाओं के खातों में 40,000 रुपये प्रतिवर्ष (डायरेक्ट कैश ट्रांसफर) भेजे जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने बेटियों को मुफ्त लैपटॉप देने की योजना को फिर से लागू करने का वादा किया।

भाजपा (योगी आदित्यनाथ सरकार):

योगी सरकार ने कैबिनेट के जरिए 'लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना' को मंजूरी दी है, जिसके तहत 60 वर्ष से अधिक उम्र की बुजुर्ग महिलाएं यूपी रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगी और उनके साथ एक सहयोगी को भी यह सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, अक्टूबर-नवंबर तक 50,000 मेधावी बेटियों को मुफ्त स्कूटी बांटने की तैयारी है।

विशेषज्ञ चर्चा के मुख्य राजनीतिक निष्कर्ष
1. महिला मतदाता की 'लॉयल्टी' और भाजपा का दांव (नवीन निगम का विश्लेषण)
महिलाएं बनीं स्वतंत्र और वफादार मतदाता: वरिष्ठ पत्रकार नवीन निगम के अनुसार, पहले महिलाएं परिवार के पुरुषों के निर्देश पर मतदान करती थीं, लेकिन राशन, पक्के मकान, उज्जवला योजना, शौचालय और उत्तर प्रदेश में सुधरी कानून-व्यवस्था (सुरक्षित सड़क माहौल) के कारण महिलाएं अब पुरुषों से अलग हटकर अपनी स्वतंत्र राय से वोट दे रही हैं।

लॉयल वोट बैंक को बूस्ट करना: भाजपा को लगता है कि कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की बदौलत महिला मतदाता उसकी सबसे मजबूत ताकत हैं। इसलिए चुनाव से ठीक पहले इन योजनाओं के जरिए उन्हें और मजबूत किया जा रहा है।

डायरेक्ट बेनेफिट और जनधन खाते: सरकारें चुनाव से ठीक पहले (आचार संहिता से पूर्व) सीधे बैंक खातों में कैश ट्रांसफर का मॉडल अपना रही हैं। मध्य प्रदेश (लाडली बहना), महाराष्ट्र (लाड़की बहिन) और बिहार के बाद यूपी में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है।

2. मुफ्त की राजनीति (Freebies) बनाम बुनियादी मुद्दे (नितिन श्रीवास्तव का विश्लेषण)
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की अनदेखी: वरिष्ठ पत्रकार नितिन श्रीवास्तव ने सवाल उठाया कि चुनाव में कोई भी दल यह बात नहीं कर रहा कि वे कितने नए स्कूल, मेडिकल कॉलेज खोलेंगे या कितना इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेंगे। उत्तर प्रदेश में 36,000 से अधिक प्राथमिक स्कूल बंद हो चुके हैं और बेरोजगारी का ग्राफ बढ़ा है।

जेन-जी और जेन-अल्फा का आक्रोश: एक तरफ सरकारें मुफ्त की चीजें देकर ध्यान भटकाना चाहती हैं, वहीं दूसरी तरफ Gen-Z (युवा) और Gen-Alpha (स्कूली बच्चे) बुनियादी सुविधाओं—जैसे स्कूलों में पंखे, साफ पानी, शिक्षक, और पारदर्शी भर्ती—के लिए सड़कों पर उतरकर मंत्रियों व अधिकारियों का घेराव कर रहे हैं।

दीर्घकालिक चुनौती: 8G और 10G के वैश्विक दौर में यदि हम बुनियादी शिक्षा और स्वास्थ्य के बजाय सिर्फ चुनावी नकद भत्ते बांटकर राजनीति करेंगे, तो यह प्रदेश के दीर्घकालिक विकास के लिए गंभीर चुनौती बनेगा।


परिचर्चा का सार यह रहा कि उत्तर प्रदेश का 2027 का चुनाव पूरी तरह से लोकलुभावन वादों और कैश-ट्रांसफर मॉडल की ओर बढ़ता दिख रहा है। सत्ता में बने रहने या सत्ता पाने के लिए राजनीतिक दल महिलाओं को केंद्र में रख रहे हैं, लेकिन जागरूक होती जनता और सड़कों पर उतरती नई पीढ़ी के कारण भविष्य की राजनीति इतनी आसान नहीं रहने वाली है।


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