6 अक्टूबर को दिल्ली में बड़ा सियासी ड्रामा: मकर द्वार से निकलेगा सांसदों का मार्च
वोट चोरी के गंभीर आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से जुड़ी हालिया जानकारियों के विरोध में विपक्षी दलों के सांसद मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे। विपक्षी सांसद एकजुट होकर चुनावी निष्पक्षता और मतदाता सूची में हुई कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठाएंगे। इस प्रदर्शन को दिल्ली की राजनीति में एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
राजधानी दिल्ली में चुनावी निष्पक्षता और मतदाता सूची को लेकर जारी राजनीतिक घमासान अब संसद के गलियारों से निकलकर सड़कों तक पहुंच गया है। 'वोट चोरी' के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से जुड़ी हालिया विवादित जानकारियों के विरोध में विपक्षी सांसदों ने एक बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को इंडिया गठबंधन और प्रमुख विपक्षी दलों के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग के मुख्यालय तक एक संयुक्त विरोध मार्च निकालेंगे। इस मार्च में क्या-क्या हो सकता है इसी को लेकर चर्चा हुई द फेडरल के खास शो जनपथ में जिसमें एंकर प्रदीप सहगल ने बातचीत की द फेडरेल के मनीष कुमार और अभिषेक रावत के साथ-
संसद के मकर द्वार से शुरू होगा विरोध मार्च
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मार्च की शुरुआत मंगलवार सुबह 10:30 बजे संसद भवन परिसर स्थित ऐतिहासिक 'मकर द्वार' से होगी। यहां सभी विपक्षी सांसद एकत्र होंगे और एकजुटता का संदेश देते हुए चुनाव आयोग के दफ्तर 'निर्वाचन सदन' की ओर कदम बढ़ाएंगे। सांसदों का यह जत्था संसद परिसर से निकलकर अशोका रोड होते हुए निर्वाचन सदन पहुंचेगा।
इस प्रदर्शन मार्च के दौरान सांसदों द्वारा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के दौरान सामने आई अनियमितताओं के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की उम्मीद है। विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि देश भर में करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से मनमाने तरीके से हटाए गए हैं, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र और मताधिकार पर हमला है।
'वोट चोरी' और मुख्य चुनाव आयुक्त का मुद्दा केंद्र में
यह विरोध मार्च मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों पर केंद्रित रहेगा—पहला, देश में बड़े पैमाने पर हुई कथित 'वोट चोरी' और दूसरा, मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सामने आई हालिया विवादित जानकारियां। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता साबित नहीं करता और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
यह मार्च इस लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से छात्रों, वकीलों और पूर्व नौकरशाहों का प्रदर्शन जारी है। अब सांसदों के सीधे तौर पर सड़क पर उतरने से इस पूरे मुद्दे को बड़ा राजनीतिक संबल मिलेगा और केंद्र सरकार व चुनाव आयोग पर दबाव कई गुना बढ़ जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर
विपक्षी सांसदों के इस मार्च को देखते हुए नई दिल्ली और लुटियंस जोन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। संसद भवन से लेकर निर्वाचन सदन तक के रास्ते पर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की जा रही है।
अब पूरी राजनीतिक बिरादरी की नजर इस बात पर टिकी है कि 6 अक्टूबर के इस विरोध मार्च के दौरान विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के सामने क्या प्रमुख मांगें रखते हैं और आयोग का प्रतिनिधिमंडल सांसदों से मुलाकात कर क्या प्रतिक्रिया देता है।
