श्रीनि से संवाद: PM का 'माफ़ी' वीडियो, Zero FIR और GenZ का गुस्सा
द फ़ेडरल देश के शो 'श्रीनि से संवाद' में एस श्रीनिवासन और मनीष कुमार के साथ देखिए PM मोदी के इंस्टाग्राम वीडियो, जंतर-मंतर आंदोलन, Zero FIR और GenZ के आक्रोश पर चर्चा।
Srini se samwad: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र आंदोलन, पेपर लीक विवाद और देश की शिक्षा प्रणाली के संकट को लेकर युवाओं का आक्रोश अब एक नए कानूनी और राजनीतिक मोड़ पर पहुँच गया है। प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग छात्रा द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने के बाद नोएडा में Zero FIR दर्ज हुई, दिल्ली पुलिस की पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना पुलिस ने जांच शुरू की और फिर अचानक शुक्रवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश जारी कर दिया।
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के विशेष कार्यक्रम 'श्रीनि से संवाद' में एंकर मनीष कुमार ने 'द फ़ेडरल' के एडिटर-इन-चीफ़ एस. श्रीनिवासन (S. Srinivasan) से इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि क्या प्रधानमंत्री का यह कदम सचमुच युवाओं को समझने का प्रयास है या फिर आंदोलन को दबाने की एक नई रणनीति।
1. "मैं माफ़ करता हूँ": PM के इंस्टाग्राम वीडियो का सच और कानूनी विरोधाभास
शुक्रवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर कहा कि वे अभद्र टिप्पणी करने वाली युवती और युवाओं को "माफ़ करते हैं" और युवाओं को सही दिशा में ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार उन्हें और उनकी माँ को गाली दी गई, वह हैरान करने वाला है।
माफ़ी बनाम कानूनी शिकंजा: एंकर मनीष कुमार ने सवाल उठाया कि एक तरफ प्रधानमंत्री सोशल मीडिया पर माफ़ करने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी तरफ उसी कम उम्र की लड़की पर नोएडा में Zero FIR दर्ज कर पुलिसिया कार्रवाई की जा रही है।
सभ्य भाषा पर आम सहमति: एस. श्रीनिवासन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन या आंदोलन में किसी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग पूरी तरह गलत है और इसका समर्थन नहीं किया जा सकता। लेकिन मुद्दा यह है कि किस संदर्भ में और किस असंतोष के कारण यह गुस्सा बाहर निकला है।
2. राइट-विंग इकोसिस्टम, ट्रोलिंग और 'डरी-सहमी' छात्रा का वीडियो
शो में इस बात पर गहरा विश्लेषण किया गया कि प्रधानमंत्री के बयान के बाद जमीनी स्तर और सोशल मीडिया पर स्थिति क्या रूप ले रही है।
विकृत संदेश और ट्रोलिंग: एस. श्रीनिवासन ने कहा कि पीएम मोदी ने भले ही क्षमा का संदेश देने की कोशिश की हो, लेकिन सोशल मीडिया (X/ट्विटर, व्हाट्सएप) पर उनके समर्थकों और राइट-विंग इकोसिस्टम ने इसे एक 'सिग्नल' की तरह लिया है। इसके बाद युवाओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उग्र ट्रोलिंग शुरू हो गई।
नाबालिग छात्रा का माफ़ीनामा: सोशल मीडिया पर डरी-सहमी स्थिति में छात्रा का माफ़ी मांगते हुए वीडियो वायरल किया जा रहा है। श्रीनिवासन के अनुसार, एक नाबालिग की पहचान उजागर करना और उसे इस तरह निशाना बनाना कानूनी और नैतिक रूप से गलत है। इसका उलटा असर होगा और छात्रों के बीच आक्रोश और बढ़ेगा।
3. 'विक्टिम कार्ड' बनाम राजनीतिक परिपेक्ष्य
राजनीति में बयानों के इस्तेमाल पर चर्चा करते हुए एंकर मनीष कुमार ने याद दिलाया कि बिहार चुनाव के दौरान 'वोटर अधिकार यात्रा' का मुद्दा हो या 2023 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव, प्रधानमंत्री अक्सर अपने खिलाफ दी गई गालियों को चुनाव में मुद्दा बनाते रहे हैं।
राजनेता बनाम आम छात्र: श्रीनिवासन ने कहा कि जब नेताओं के बीच बयानबाजी होती है तो राजनीति चलती रहती है, लेकिन जब यह मामला किसी आम विद्यार्थी या बच्चे से जुड़ता है तो पूरा परिपेक्ष्य बदल जाता है। लड़की ने गलती मानी और पछतावा (Regret) जताया, जिसके बाद मामला शांत होना चाहिए था, लेकिन ध्रुवीकरण (Polarization) के माहौल के कारण इसका बतंगड़ बनाया जा रहा है।
4. GenZ को समझने में सत्ता क्यों फेल हो रही है?
एस. श्रीनिवासन ने रेखांकित किया कि सरकार और वरिष्ठ नेतृत्व GenZ (जेनरेशन जेड) की मानसिकता को पुराने ढर्रे से आंकने की भूल कर रहे हैं:
डर का माहौल खत्म: पुरानी पीढ़ियों (Millennials या Baby Boomers) के विपरीत GenZ में डर का माहौल नहीं है। वे अपनी बात सीधे और बिना झिझक के रखते हैं।
संस्थागत और राजनीतिक जवाबदेही (Political Accountability): NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) द्वारा कराई जाने वाली परीक्षाओं में गड़बड़ी पर सरकार 30-40 अफसरों का तबादला कर देती है। लेकिन GenZ इतने से संतुष्ट नहीं है; वे शीर्ष पर बैठे राजनेताओं की राजनीतिक जवाबदेही मांगते हैं।
उपदेश नहीं, सीधा संवाद: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के बयान (जिसमें उन्होंने युवाओं को स्वतंत्रता के अर्थ और सीमाओं की बात कही) पर श्रीनिवासन ने कहा कि GenZ को ऊपर से ज्ञान या उपदेश (Pulpit Preaching) देना बेअसर है। आज के बच्चे गूगल और AI के दौर में पले-बढ़े हैं, उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों से लेकर वर्तमान मुद्दों की पूरी जानकारी है। वे भाषण नहीं, बल्कि आमने-सामने बैठकर सीधा संवाद चाहते हैं।
5. सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं: 'जॉबलेस ग्रोथ' और आर्थिक हताशा
जंतर-मंतर पर भड़का गुस्सा सिर्फ एक परीक्षा या लाठीचार्ज तक सीमित नहीं है:
सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility): ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के युवाओं के लिए अपनी स्थिति सुधारने का सबसे बड़ा जरिया सरकारी नौकरियां हैं।
खाली पद और बेरोजगारी: देश में आर्थिक विकास दर (Growth Rate) के दावे किए जाते हैं, लेकिन यह 'जॉबलेस ग्रोथ' (बिना रोजगार के विकास) है। सरकारी नौकरियां खाली पड़ी हैं, भर्ती प्रक्रिया लटकी रहती है। इसी आर्थिक डिस्ट्रेस और दबाव के कारण युवाओं का गुस्सा बाहर आ रहा है।

