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यूपी कांग्रेस में लात-जूते और ड्रामा: क्या 2027 से पहले खत्म होगी अंदरूनी जंग?

लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में नए नेतृत्व के स्वागत और पदभार समारोह के दौरान भारी हंगामा हो गया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के समर्थकों और महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस के बाद गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने तक की नौबत आ गई।


उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस अपनी किसी नई नीति, जनांदोलन या जमीनी अभियान की वजह से नहीं, बल्कि अपनी पुरानी बीमारी यानी अंदरूनी गुटबाजी और सिरफुटव्वल की वजह से सुर्खियों में है। जिस पार्टी को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए खुद को कैडर स्तर पर मजबूत करना चाहिए था, वह अपने ही प्रदेश मुख्यालय के भीतर आपस में भिड़ती नजर आ रही है। लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय में जो कुछ भी हुआ, उसने न केवल कार्यकर्ताओं का सर शर्म से झुका दिया है, बल्कि पार्टी के अनुशासन और एकजुटा के तमाम दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं।

लखनऊ कांग्रेस मुख्यालय बना जंग का मैदान

घटना लखनऊ के मॉल एवेन्यू स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश मुख्यालय की है। मौका था पार्टी के नए संगठनात्मक घटनाक्रम के तहत नए प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' से जुड़े पदभार ग्रहण समारोह का। दफ्तर में कार्यकर्ताओं और समर्थकों का हुजूम जुटा हुआ था। गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न का माहौल होना चाहिए था, लेकिन चंद ही मिनटों में यह खुशी का मौका एक भयानक संग्राम में तब्दील हो गया। नेताओं की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं के बीच शुरू हुई नारेबाजी देखते ही देखते तीखी बहसा-बहसी, गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और फिर जूते-चप्पल चलने तक पहुंच गई।

अजय राय और ममता चौधरी समर्थकों में तीखी भिड़ंत

प्रत्यक्षदर्शियों और दफ्तर में मौजूद लोगों के मुताबिक, यह पूरा विवाद तब भड़का जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के खिलाफ कुछ कार्यकर्ताओं ने अचानक नारेबाजी और अनर्गल टिप्पणियां शुरू कर दीं। नारेबाजी से माहौल इतना गरमा गया कि अजय राय के समर्थक आपे से बाहर हो गए और विरोधी गुट के कार्यकर्ताओं से सीधे भिड़ गए। इस पूरे हंगामे की चपेट में महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी और उनके समर्थक भी आ गए। देखते ही देखते प्रदेश कार्यालय का प्रांगण किसी राजनीतिक दफ्तर के बजाय अखाड़ा नजर आने लगा, जहां मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी गईं।

नाराज होकर दफ्तर के बाहर बैठे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष

दफ्तर के भीतर मचे इस घमासान और उपद्रव से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय बेहद आहत और नाराज नजर आए। अपने ही प्रदेश कार्यालय के भीतर अपने खिलाफ हो रही नारेबाजी और बदसलूकी से दुखी होकर वे कार्यक्रम छोड़कर बाहर चले गए और दफ्तर के बाहर ही बैठ गए। वहां मौजूद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराने और अजय राय को मनाने की काफी कोशिश की, लेकिन समर्थकों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा था। वहीं दूसरी तरफ, महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके और उनके समर्थकों के साथ सरेआम दुर्व्यवहार किया गया है और पार्टी के भीतर लोकतंत्र को कुचला जा रहा है।

गुटबाजी का पुराना इतिहास और नए नेतृत्व के सामने चुनौती

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के लिए इस तरह की गुटबाजी और सार्वजनिक कलह कोई नई बात नहीं है। राज्य में पिछले तीन दशकों से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस लगातार अपना राजनीतिक जनाधार खोती चली गई है, लेकिन उसकी अंदरूनी गुटबाजी खत्म होने का नाम नहीं ले रही। जब भी पार्टी में नया नेतृत्व आता है या नए अध्यक्ष की तैनाती होती है, तब-तब पुराने और नए गुट अपनी-अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के चक्कर में पार्टी की साख दांव पर लगा देते हैं। आराधना मिश्रा 'मोना' जैसे वरिष्ठ चेहरे के स्वागत समारोह के दौरान हुई इस गुटबाजी ने यह साबित कर दिया है कि संगठन के भीतर गुटबंदी की जड़ें कितनी गहरी हैं।2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक झटका

साल 2027 में उत्तर प्रदेश में बेहद महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने हैं। हाल के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के चलते कांग्रेस को मिली थोड़ी-बहुत बढ़त से कार्यकर्ताओं में यह उम्मीद जगी थी कि पार्टी राज्य में फिर से अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है। लेकिन अगर राजधानी लखनऊ के केंद्रीय कार्यालय में ही नेता और कार्यकर्ता सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर लात-घूंसे और जूते-चप्पल चलाएंगे, तो फिर जनता के बीच क्या संदेश जाएगा? यह सवाल आज हर आम नागरिक और कांग्रेस का सच्चा कार्यकर्ता पूछ रहा है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग और आलाकमान की परीक्षा

लखनऊ में हुए इस शर्मनाक घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस आलाकमान इस मामले में कोई कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाएगा? क्या खुलेआम गुंडागर्दी और अनुशासनहीनता करने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं पर गाज गिरेगी या फिर हर बार की तरह मामले को कालीन के नीचे दबा दिया जाएगा? अगर इस तरह की अंतर्कलह पर तुरंत लगाम नहीं कसी गई, तो 2027 के चुनाव में जनता के बीच जाना कांग्रेस के लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा। अब देखना यह होगा कि नई जिम्मेदारी संभाल रहीं आराधना मिश्रा 'मोना' और दिल्ली में बैठा केंद्रीय नेतृत्व इस बिखरे हुए संगठन को कैसे एक प्लेटफॉर्म पर ला पाता है।

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