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'वोट चोरी' पर राहुल गांधी का बड़ा खुलासा, क्या खत्म हुआ चुनाव आयोग का खेल?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ जांच की मांग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे और 'सरकारी गवाह' (Approver) बनने को कहा।


देश की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बेहद गंभीर और कड़े आरोप लगाए। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में 'वोट चोरी' का खेल चल रहा है और इस पूरी साजिश की जांच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ होनी चाहिए। "ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और सरकारी गवाह बनें"। इस मुद्दे को लेकर 'द फेडरल' के विशेष कार्यक्रम निष्पक्ष में एंकर नीलू व्यास ने जाने-माने इलेक्शन डेटा साइंटिस्ट और एकेडेमिशियन डॉ. प्यारेलाल गर्ग, सामाजिक कार्यकर्ता तारा राव और क्रांग्रेस कार्यकर्ता अंशुमन तिवारी से खास बातचीत की।

इस चर्चा के दौरान जाने-माने इलेक्शन डेटा साइंटिस्ट और एकेडेमिशियन डॉ. प्यारेलाल गर्ग ने कहा कि इस बार राहुल गांधी की बॉडी लैंग्वेज और कांग्रेस का रुख बिल्कुल अलग और दृढ़ संकल्पित दिख रहा है। डॉ. गर्ग के अनुसार, "कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि जिस आजादी की लड़ाई को लड़कर लोकतंत्र हासिल किया गया था, उस लोकतंत्र में जनता के वोट का अधिकार छीनने नहीं दिया जाएगा। वोट ही हमारे प्रजातंत्र की बुनियाद है; अगर वोट ही खत्म हो जाएगा तो संसद का कोई वजूद नहीं बचेगा और देश किसी तानाशाह या हिटलर की राह पर चल पड़ेगा।" राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के इन कड़े रुख के बाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के सामने साख का भारी संकट खड़ा हो गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के भीतर से ही उठे असंतोष का जिक्र करते हुए उन दो चुनाव आयुक्तों की सराहना की, जिन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर लिखित आपत्तियां जताई थीं। राहुल ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली अब संदिग्ध हो चुकी है। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की और उन्हें सलाह दी कि "बेहतर होगा कि वे इस्तीफा देकर सरकारी गवाह (Approver) बन जाएं"। वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी की कड़ी

राहुल गांधी ने अपनी बात को एक रणनीतिक क्रम के जरिए समझाया। उन्होंने कहा: वोट चोरी: जब जनता के असली जनादेश और वोटों की चोरी कर ली जाती है, तो फर्जी जनादेश से सांसद संसद में पहुंचते हैं। कानून चोरी: गैर-कानूनी तरीके से चुने गए सांसद जब कानून बनाते हैं, तो वे कानून भी गैर-कानूनी और असंवैधानिक हो जाते हैं। संस्था चोरी: इस पूरी प्रक्रिया से देश के संवैधानिक संस्थानों का अस्तित्व खत्म हो जाता है और वे केवल कठपुतली बनकर रह जाते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पुराने बयानों वाली क्लिप्स भी चलाई गईं, जिनमें वे '400 पार' और '50 सालों तक बीजेपी के राज' का दावा कर रहे थे। राहुल ने सवाल उठाया कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में ऐसा नहीं होता कि एंटी-इंकंबेंसी (सरकार विरोधी लहर) पूरी तरह गायब हो जाए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़ी से बड़ी लोकप्रिय सरकारें भी जन-असंतोष के सामने चुनाव हार जाती हैं, लेकिन मौजूदा सत्तापक्ष के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी का न दिखना ही बड़े घालमेल की ओर इशारा करता है। कांग्रेस का अल्टीमेटम और जैमर्स की खबरें

कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि वे अपने पद से त्यागपत्र नहीं देते हैं, तो कांग्रेस देश की सभी प्रांतीय राजधानियों में सड़क पर उतरकर उग्र और व्यापक विरोध प्रदर्शन करेगी। इस बीच, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इंदिरा भवन के बाहर मोबाइल जैमर्स लगाए जाने की खबरें भी आईं, जिससे लाइव टेलीकास्ट में बाधा डालने की आशंका जताई गई। विशेषज्ञों की राय: "कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी"


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