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चंपत राय की डायरी में नृपेंद्र मिश्रा 'खलनायक'?

'निष्पक्ष' में नीलू व्यास व शायरा नईम की चर्चा: चंपत राय की डायरी के चौंकाने वाले खुलासे, नृपेंद्र मिश्रा पर सवाल और राम मंदिर चढ़ावा चोरी में अंदरूनी खींचतान।


Nishpaksh: अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में कथित चढ़ावा (दान) चोरी और वित्तीय गड़बड़ी का मामला खत्म होने के बजाय और अधिक उलझता जा रहा है। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खुले पत्र के बाद अब उनकी कथित 'डायरी' के कुछ बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाले पन्ने सामने आए हैं। सूत्रों के हवाले से सामने आई इस डायरी में मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।


डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के खास राजनीतिक विश्लेषण शो 'निष्पक्ष' में एंकर नीलू व्यास ने वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक शायरा नईम के साथ इस डायरी के खुलासों, बीजेपी-आरएसएस की अंदरूनी खींचतान और यूपी की राजनीति पर इसके असर पर विस्तृत चर्चा की।

चंपत राय की 'डायरी' के 5 सबसे चौंकाने वाले खुलासे
सूत्रों के हवाले से सामने आई डायरी के अनुसार, चंपत राय ने पूरे घटनाक्रम की एक-एक तारीख का हिसाब रखा है और नृपेंद्र मिश्रा पर सीधा हमला बोला है:

पुलिस में FIR न कराने की वजह: डायरी के मुताबिक, चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद तुरंत एफआईआर इसलिए नहीं कराई गई क्योंकि चंपत राय को आशंका थी कि कानूनी जांच लंबी खिंचेगी और पूछताछ व कार्रवाई के सभी अधिकार पुलिस के पास चले जाएंगे।

नृपेंद्र मिश्रा बने 'खलनायक': चंपत राय ने लिखा कि नृपेंद्र मिश्रा ने मीडिया इंटरव्यूज़ में चढ़ावा चोरी को 'डकैती' करार दिया, जिससे लोगों के बीच बहुत गलत संदेश गया। डायरी में दावा किया गया है कि एक संत ने उनसे बातचीत में नृपेंद्र मिश्रा को "सबसे बड़ा खलनायक" तक कह दिया था।

14 इंटरव्यूज़ पर सवाल: डायरी में सवाल उठाया गया है कि 4 दिनों में 14 इंटरव्यूज़ देने के लिए नृपेंद्र मिश्रा को किसने कहा था? चंपत राय का आरोप है कि पिछले 6 सालों में मंदिर निर्माण समिति की बैठकों में हिसाब-किताब पर कभी चर्चा नहीं करने वाले अधिकारी को अब इस पर बोलने का अधिकार किसने दिया?

'अखिलेश यादव तक बात किसने पहुंचाई?': चंपत राय के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंदिर और ट्रस्ट के भीतर की ये संवेदनशील जानकारी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव तक किसने और किस माध्यम से पहुंचाई? असली 'भेदिया' कौन है, इसका पता लगाया जाना चाहिए।

बैठकों और मुलाकातों का ब्योरा: डायरी के अनुसार, 7 जून को मामला सामने आने के अगले दिन नृपेंद्र मिश्रा और NBCC के पूर्व चेयरमैन अनूप कुमार अयोध्या पहुंचे थे। 11 जून को भैया जी जोशी के बुलावे पर बीमार होने के बावजूद चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव लखनऊ गए थे।

वरिष्ठ पत्रकार शायरा नईम का विश्लेषण: 'आंतरिक साजिश और विक्टिम कार्ड'
शो 'निष्पक्ष' में चर्चा के दौरान वरिष्ठ पत्रकार शायरा नईम ने इस पूरे घटनाक्रम के राजनीतिक और संस्थागत पहलुओं को रेखांकित किया:

चोर-सिपाही का इनर-कॉन्स्पिरसी खेल: शायरा नईम के अनुसार, यह केवल वित्तीय गड़बड़ी का मामला नहीं रह गया है, बल्कि ट्रस्ट और सत्ता के गलियारों में एक-दूसरे को नीचा दिखाने की 'आंतरिक साजिश' (Inner Conspiracy) है। एक तरफ पीएम मोदी के करीबी ब्यूरोक्रेट नृपेंद्र मिश्रा हैं, तो दूसरी तरफ संघ (RSS) का प्रतिनिधित्व करने वाले चंपत राय हैं।

विक्टिम कार्ड और कानून से ऊपर होने का दंभ: चंपत राय यह कबूल कर रहे हैं कि उन्होंने पुलिस में एफआईआर इसलिए नहीं कराई क्योंकि वे मामला अपने हाथ में रखना चाहते थे। यह साफ दिखाता है कि वे खुद को कानून से ऊपर (Above the Law) मान रहे थे और मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे थे।

अखिलेश यादव का कनेक्शन: नृपेंद्र मिश्रा पर भेदिया होने का अप्रत्यक्ष इशारा दरअसल उनके उस दौर से जोड़ा जा रहा है जब वे मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहते यूपी सीएम सचिवालय में शीर्ष अफसर थे। हालांकि, सपा के पास इस घपले की जानकारी अपने खुद के जमीनी सूत्रों से पहुंची है।

बीजेपी-आरएसएस को बड़ा नुकसान: 3 सितंबर को राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक होने वाली है, जिसमें नया सीईओ नियुक्त किया जा सकता है। लेकिन इस डायरी के बाहर आने से जनता के बीच मैसेज बहुत डैमेजिंग गया है और इससे सीधे तौर पर बीजेपी-आरएसएस की साख को भारी नुकसान पहुंचा है।

शो 'निष्पक्ष' के विश्लेषण का सार यह रहा कि चाहे चंपत राय की ओर से सफाई दी जाए या नृपेंद्र मिश्रा पर निशाना साधा जाए, लेकिन इन ब्योरों और अंदरूनी कलह से सार्वजनिक रूप से सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ (RSS) की नैतिक साख को ही पहुंचा है।


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