ज़मीनी हकीकत: जंतर-मंतर से ECI मुख्यालय तक हड़कंप: योगेंद्र यादव बोले- देश मांग रहा है CEC का इस्तीफा!
मतदाता सूची से मनमाने ढंग से 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने (SIR प्रक्रिया) को लेकर विवाद अब अभूतपूर्व रूप ले चुका है। पूर्व उप-राज्यपाल नजीब जंग ने CEC पर संविधान से खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया। पूर्व अधिकारियों ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में तुरंत बदलाव और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
देश में मतदाता सूची से मनमाने ढंग से नागरिकों के नाम हटाने (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया) को लेकर चल रहा विवाद अब अत्यधिक गंभीर मोड़ ले चुका है। भारत के चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली के खिलाफ अब देश के पूर्व शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी और राजनयिक भी खुलकर सड़कों पर उतर आए हैं। शनिवार को राजधानी दिल्ली में उस समय बड़ा सियासी व प्रशासनिक ड्रामा देखने को मिला, जब देश की सेवा कर चुके वरिष्ठतम पूर्व अधिकारियों का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ा। 'द फेडरल' के संवाददाता अभिषेक रावत ने ग्राउंड जीरो से इस विरोध प्रदर्शन को कवर किया और वहां की ज़मीनी हकीकत के बारे में बताया-
इस प्रतिनिधिमंडल में दिल्ली के पूर्व उप-राज्यपाल नजीब जंग, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी.के. पिल्लई, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) यशोवर्धन आज़ाद और कई पूर्व आईएफएस (IFS) व आईएएस (IAS) अधिकारी शामिल थे। यह सभी अधिकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक "नागरिक महाभियोग नोटिस" (Citizens' Impeachment Notice) सौंपने के लिए निर्वाचन सदन (ECI मुख्यालय) की ओर मार्च कर रहे थे। हालांकि, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रास्ते में ही रोक दिया, जिससे लुटियंस दिल्ली में तनावपूर्ण माहौल बन गया।
'संविधान से खिलवाड़ देख शर्म आती है': नजीब जंग
दिल्ली के पूर्व उप-राज्यपाल नजीब जंग ने गहरा दुख और गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें यह देखकर बेहद "शर्म" आ रही है कि ज्ञानेश कुमार जैसे जूनियर अधिकारी इतने बड़े संवैधानिक पद पर बैठकर देश के संविधान के साथ खुलेआम छेड़छाड़ कर रहे हैं।
नजीब जंग ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की मौजूदा SIR प्रक्रिया के नाम पर देश के लगभग 13 करोड़ वैध मतदाताओं को मनमाने ढंग से उनके सबसे बुनियादी और संवैधानिक अधिकार—वोट देने के अधिकार—से वंचित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों से उनका मताधिकार छीनना देश की नींव पर चोट करने जैसा है।
'बिना किसी न्यायिक निगरानी के नागरिकता पर सवाल क्यों?': जी.के. पिल्लई
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी.के. पिल्लई ने भी चुनाव आयोग की नियत और प्रक्रियात्मक खामियों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग किस अधिकार और प्रक्रिया के तहत देश के आम और निर्दोष नागरिकों को बिना किसी ठोस कानूनी आधार या न्यायिक निगरानी के अपनी नागरिकता साबित करने के लिए मजबूर कर रहा है?
पिल्लई ने कहा कि वोटर लिस्ट में इस तरह के बुनियादी और व्यापक बदलाव बिना किसी पारदर्शी नियम या न्यायिक प्रक्रिया के किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि नौकरशाही के इतिहास में ऐसा कभी नहीं देखा गया कि चुनाव आयोग जैसा निष्पक्ष संस्थान खुद सवालों के कटघरे में खड़ा हो जाए।
'गोल्ड स्टैंडर्ड' कहे जाने वाले ECI की वैश्विक छवि हुई दागदार
विरोध मार्च में शामिल रिटायर्ड राजनयिकों (पूर्व IFS अधिकारियों) ने अफसोस जताते हुए कहा कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की साख कभी पूरी दुनिया में लोकतंत्र के 'गोल्ड स्टैंडर्ड' (स्वर्ण मानक) के रूप में मानी जाती थी। दुनिया के कई देश भारत की चुनावी प्रक्रिया और आयोग की निष्पक्षता से प्रेरणा लेते थे। लेकिन मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में आयोग की गिरती विश्वसनीयता और मनमाने फैसलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक छवि को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है और देश का सिर नीचा किया है।
'चुनाव आयोग पर 6-सूत्रीय गंभीर आरोप पत्र': योगेंद्र यादव
सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने चुनाव आयोग मुख्यालय के चारों ओर दिल्ली पुलिस द्वारा की गई अभूतपूर्व बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल की तैनाती का मज़ाक उड़ाया। योगेंद्र यादव ने कहा कि पूर्व अधिकारियों का यह प्रतिनिधिमंडल कोई उपद्रव करने नहीं, बल्कि चुनाव आयोग को उसकी नाकामियों और अनियमितताओं का 6-सूत्रीय आरोप-पत्र (Charge Sheet) सौंपने आया था।
योगेंद्र यादव ने आगे कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में यह पहला मौका है जब देश के आम नागरिक, पूर्व सिविल सेवक, छात्र और सामाजिक संगठन एक सुर में सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के पद की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। यह स्थिति बताती है कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का संकट अब अपने चरम पर पहुंच चुका है।
CEC की चयन प्रक्रिया बदलने और इस्तीफे की मांग तेज
ग्राउंड Zero पर मौजूद संवाददाता अभिषेक रावत के अनुसार, प्रदर्शनकारी पूर्व नौकरशाहों ने एक स्वर में मांग की है कि चुनाव आयोग को फिर से स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने के लिए चुनाव आयुक्तों (Selection of CEC & ECs) की चयन प्रक्रिया में तुरंत और पारदर्शी बदलाव किए जाएं। उन्होंने कहा कि जब तक चयन प्रक्रिया में न्यायपालिका और विपक्ष की बराबर की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं। इसके साथ ही, प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग दोहराई है।
