Delhi SIR में बड़े-बड़े नाम! आडवाणी-जयशंकर से चुनाव आयुक्त तक को नोटिस, आखिर क्यों?
x

Delhi SIR में बड़े-बड़े नाम! आडवाणी-जयशंकर से चुनाव आयुक्त तक को नोटिस, आखिर क्यों?

दिल्ली CEO कार्यालय के मुताबिक, 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस के लिए चिह्नित किया गया, जिनमें से 19 सितंबर तक 31.63 लाख को नोटिस दिए जा चुके थे।


दिल्ली में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) में बड़े-बड़े नाम भी मतदाता सूची के सत्यापन के दायरे में आ गए हैं। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू समेत कई प्रमुख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। मामला सामने आने के बाद दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने साफ किया कि नोटिस मिलने का मतलब वोटर लिस्ट से नाम कटना नहीं है।

31 लाख से ज्यादा नोटिस जारी
दिल्ली CEO कार्यालय के मुताबिक, 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस के लिए चिह्नित किया गया, जिनमें से 19 सितंबर तक 31.63 लाख को नोटिस दिए जा चुके थे। इनमें ऐसे मतदाता हैं जिनका मौजूदा रिकॉर्ड 2002 में हुए पिछले SIR की सूची से मैप नहीं हो पाया या जिनके विवरण में विसंगतियां मिली हैं।

आडवाणी और जयशंकर को क्यों मिला नोटिस?
आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका का रिकॉर्ड 2002 की मतदाता सूची से मैप नहीं हो पाया। हालांकि, उनके बेटे जयंत का रिकॉर्ड मैप हो गया है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको जयशंकर को भी 'Unmapped with Last SIR' श्रेणी में नोटिस मिला है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू के रिकॉर्ड में नाम से जुड़ा मिसमैच मिला था। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनकी एंट्री वैलिडेट कर दी गई है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, विदेश सचिव विक्रम मिसरी समेत कई मौजूदा और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी नोटिस पाने वालों में शामिल हैं।

चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा?
दिल्ली CEO कार्यालय के मुताबिक, ये सिस्टम-जनरेटेड नोटिस हैं। जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड पिछले SIR से लिंक नहीं हुआ या जिनके विवरण में 'logical discrepancies' मिली हैं, उनसे दस्तावेज के जरिए रिकॉर्ड सत्यापित करने को कहा जा रहा है।

मतदाता संबंधित Electoral Registration Officer (ERO) के सामने जवाब और जरूरी दस्तावेज जमा कर सकते हैं। CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता को सुनवाई का मौका दिए और उचित आदेश पारित किए बिना उसका नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
दिल्ली SIR का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। याचिकाकर्ताओं ने 'No Mapping' और 'Logical Discrepancies' के आधार पर नोटिस जारी करने के मानदंडों पर सवाल उठाए हैं।

Read More
Next Story