गोरखपुर में दारोगा की 'ठंडा कर दूंगा' धमकी, तो फिरोजाबाद में नीम करौली बाबा के घर पर मचा घमासान!
उत्तर प्रदेश में इस वक्त दो अलग-अलग मामलों ने हलचल मचा रखी है। गोरखपुर की दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी का है, जहाँ मूलभूत सुविधाओं और छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रहे छात्रों को दारोगा अविरल मिश्रा ने "ठंडा कर दूंगा" की सरेआम धमकी दे डाली। वहीं दूसरा मामला फिरोजाबाद के अकबरपुर गांव का है, जहाँ संत नीम करौली बाबा के 450 स्क्वायर फीट के पुश्तैनी मकान के मालिकाना हक को लेकर उनकी 6 पोतियों और ट्रस्ट के बीच रार छिड़ गई है।
उत्तर प्रदेश में इस वक्त दो अलग-अलग घटनाओं ने प्रशासनिक रवैये और सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ गोरखपुर की दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी में अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए आवाज उठा रहे छात्रों को पुलिस दारोगा सरेआम 'ठंडा कर देने' की धमकी दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ फिरोजाबाद में विश्व प्रसिद्ध संत नीम करौली बाबा के पुश्तैनी घर को लेकर परिवार और ट्रस्ट के बीच खींचतान तेज हो गई है।
गोरखपुर: 'ठंडा कर दूंगा'... जब हक मांगने वाले छात्रों पर गर्जे दारोगा जी
सीना चौड़ा, उंगली तानी हुई और जुबान पर सीधे धमकी... "इतनी फोर्स मंगाऊंगा कि ठंडा कर दूंगा, बता दे रहा हूं! यह गोरखपुर पुलिस है!"
ये तेवर हैं गोरखपुर यूनिवर्सिटी चौकी के इंचार्ज दारोगा अविरल मिश्रा के। 2023 बैच के नए-नवेले दारोगा जी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर पुलिस किसे शांत करने की बात कर रही है? उन नौजवानों को जो देश का भविष्य हैं और अपनी पढ़ाई तथा हॉस्टल के खराब खाने के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं?
गोरखपुर की दीनदयाल उपाध्याय (DDU) यूनिवर्सिटी में छात्र 25 अगस्त से धरने पर बैठे हैं और 5 सितंबर से भूख हड़ताल कर रहे हैं।
छात्रों की मांगें बेहद सामान्य और जायज हैं:
2 साल पहले सस्पेंड किए गए 3 छात्रों का निलंबन वापस लिया जाए।
हर साल फीस काटने के बावजूद बंद पड़े छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं।
हॉस्टल मेस में इंसानों के खाने लायक गुणवत्ता वाला भोजन और सुविधाएं मिलें।
पीएम-उषा योजना के तहत हो रहे कामों के आवंटन की निष्पक्ष जांच हो।
परीक्षा एजेंसी द्वारा डिग्री और मार्कशीट के नाम पर जारी अवैध वसूली बंद हो।
वन विभाग से 1,200 पेड़ काटने की परमिशन लेकर 3,000 से ज्यादा पेड़ काटने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
जब यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रॉक्टर वेद प्रकाश राय अपनी टीम के साथ धरना खत्म कराने पहुंचे, तो छात्रों ने स्पष्ट कहा कि खोखले दिलासों की जगह लिखित आश्वासन चाहिए। इसी बात पर कहासुनी और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस और गार्ड्स ने प्रॉक्टर को बाहर निकाला, लेकिन इसके तुरंत बाद दारोगा अविरल मिश्रा छात्रों पर भड़क उठे और खुलेआम धमकियां देने लगे।
मामला बढ़ा तो गोरखपुर पुलिस ने पारंपरिक सफाई देते हुए कहा कि "छात्र उग्र थे और प्रॉक्टर की जान बचाने के लिए स्थिति पर काबू पाया गया।" लेकिन सवाल वही है कि क्या खाकी वर्दी पहनकर छात्रों को धमकाना सही ठहराया जा सकता है?
फिरोजाबाद: बाबा नीम करौली के पुश्तैनी घर पर 'हक' की जंग और 9 करोड़ का कॉरिडोर
गोरखपुर की इस खाकी की अकड़ के बीच, फिरोजाबाद के अकबरपुर गांव से एक और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। जिस नीम करौली बाबा के दर पर दुनिया भर के दिग्गज माथा टेकते हैं, आज उन्हीं के 450 स्क्वायर फीट के पुश्तैनी मकान (मकान नंबर 154-व) के मालिकाना हक को लेकर विवाद चौराहे पर आ गया है।
इस विवाद को समझने के लिए बाबा के पारिवारिक ढांचे को समझना जरूरी है:
अनेक शर्मा (बड़े बेटे): इनके बेटे हैं धनंजय शर्मा।
धर्म नारायण शर्मा (छोटे बेटे): इनकी 6 बेटियां हैं—सुनीता, अर्चना, वंदना, भावना, ऋतु और ऋचा।
गिरिजा भटेले (बेटी): इनके बेटे हैं संदीप भटेले।
विवाद तब भड़का जब बाबा की 6 पोतियां सीधे जिलाधिकारी (DM) दफ्तर पहुंच गईं। उनका आरोप है कि 'श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट' के सचिव और कुछ लोग मिलकर बाबा के पुश्तैनी मकान पर कब्जा जमाए बैठे हैं और परिजनों को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा। उनका कहना है कि कानूनन महाराज जी के बाद परिवार के सदस्यों का नाम ही दस्तावेजों में दर्ज होना चाहिए।
वहीं दूसरी तरफ, बाबा के बड़े बेटे के बेटे धनंजय शर्मा का दावा एकदम अलग है। उनका कहना है कि जब मंदिर बना था, तभी पिता और चाचा ने मकान की देखरेख ट्रस्ट को सौंप दी थी। धनंजय अपनी बहनों के पतियों पर उंगली उठाते हुए कहते हैं कि 450 स्क्वायर फीट के छोटे से मकान के पीछे बेवजह विवाद खड़ा करके केवल बाबा का नाम खराब किया जा रहा है।
9 करोड़ के कॉरिडोर ने बढ़ाई रार
दशकों से शांत पड़े इस पारिवारिक मामले में चिंगारी तब लगी जब यूपी सरकार के पर्यटन विभाग ने अकबरपुर में उत्तराखंड के कैंची धाम की तर्ज पर 'नीम करौली कॉरिडोर' बनाने की घोषणा की। 9 करोड़ रुपये की लागत से 5 हेक्टेयर में बनने वाले इस प्रोजेक्ट में कन्वेंशन सेंटर और कल्चरल ब्लॉक बनने हैं। जैसे ही सरकारी बजट और जमीन के कागजात टटोले जाने लगे, वैसे ही पुश्तैनी जायदाद पर हक की जंग दोबारा छिड़ गई।
एक तरफ गोरखपुर में अधिकारों के लिए लड़ रहे छात्रों की आवाज को पुलिसिया धमकियों से दबाने की कोशिश की जा रही है, तो दूसरी तरफ एक संत की विरासत पर अपनों और ट्रस्ट के बीच मालिकाना हक का घमासान मचा हुआ है। ये दोनों घटनाएं बताती हैं कि चाहे प्रशासनिक जवाबदेही हो या आस्था के केंद्र, जब नीयत पर सवाल उठते हैं तो विवाद का भड़कना तय हो जाता है।

