'PM मोदी को खुश करने के लिए पूरे इलेक्शन सिस्टम से समझौता किया गया', CEC ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस का हमला
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने के कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस पार्टी ने देशभर में जोरदार प्रदर्शन किया है। दिल्ली में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स तोड़कर भाजपा मुख्यालय और निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया।
भारतीय निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत लाखों-करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के आरोपों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
दिल्ली में सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता, पुलिस के साथ धक्का-मुक्की
राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया जब सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय की ओर बढ़े। कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के मुख्य कार्यालय की तरफ भी मार्च करने का प्रयास किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने पुलिस के बैरिकेड्स तोड़ दिए और आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कड़ी मशक्कत की।
उदित राज का बड़ा बयान: "2002 का प्रमाण मांगकर करोड़ों वोट काटे गए"
प्रदर्शन के दौरान 'द फेडरल देश' के रिपोर्टर प्रदीप सहगल ने कांग्रेस नेता उदित राज से बातचीत की। जब उनसे पूछा गया कि क्या विरोध प्रदर्शनों के दबाव में ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देंगे, तो उदित राज ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा:
"आज पूरे देश में आंदोलन हो रहा है। इन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर करना ही पड़ेगा। ये सीधे रास्ते मानने वाले लोग नहीं हैं, इनमें कोई मर्यादा या ईमानदारी नहीं बची है। जब तक बड़े स्तर पर संघर्ष और आंदोलन नहीं होगा, तब तक इन्हें पद से हटाना मुमकिन नहीं है। इनको खदेड़ना ही पड़ेगा।"
इलेक्शन कमीशन की हालिया बैठकों और प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठाते हुए उदित राज ने कहा:
"बात तीनों आयुक्तों के एक साथ बैठने की नहीं है, सवाल यह है कि SIR का कोई कानूनी प्रावधान ही नहीं है। फॉर्म 6 में इन्होंने नई शर्त थोप दी है कि 2002 में आपके पिता या दादा का वोट होना चाहिए, तभी आप वोटर बन सकते हैं। जबकि कानूनन वोटर बनने के लिए सिर्फ तीन शर्तें चाहिए—व्यक्ति की उम्र 18 साल हो, वह भारत का नागरिक हो और भारत में रह रहा हो। इसके अलावा कोई चौथी शर्त नहीं हो सकती। इस गैर-कानूनी नियम से करोड़ों लोगों के वोट काट दिए गए हैं।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि SDM रैंक के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) का अधिकार छीनकर पूरा डिजिटल कंट्रोल DG IT को दे दिया गया है, जो कि पूरी तरह गैर-कानूनी है। उदित राज ने कहा कि इस पूरे मामले को राहुल गांधी और खोजी पत्रकारों ने उजागर किया है, लेकिन चुनाव आयोग के पास इन सवालों का कोई संवैधानिक जवाब नहीं है।
अमृता धवन का तीखा हमला: "इलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह compromised कर दिया"
इसी प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता अमृता धवन ने भी 'द फेडरल देश' के साथ बातचीत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा:
"अगर आप कैमरा घुमाकर देखेंगे तो साफ समझ आ जाएगा कि प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए ज्ञानेश कुमार किस हद तक चले गए हैं। उन्होंने देश के पूरे इलेक्शन सिस्टम को compromised कर दिया है। लोगों के वोट बिना किसी पूर्व सूचना के काटे जा रहे हैं। अपील करने की प्रक्रिया भी पूरी तरह फर्जी और जटिल बना दी गई है ताकि आम नागरिक थक हारकर घर बैठ जाए।"
अमृता धवन ने आगे कहा: "एक दौर था जब SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल नए वोट जोड़ने के लिए होता था, लेकिन आज भाजपा के शासन में इसका इस्तेमाल वोट तोड़ने और काटने के लिए किया जा रहा है। 20-25 सालों से रह रहे नागरिकों से उनके दादा-परदादा के कागजात मांगे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जी खुद अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री देश को नहीं दिखाते, लेकिन देश के हर गरीब-आम नागरिक से कागजों का सबूत मांग रहे हैं। चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं रहे, इसलिए जनता अब सड़कों पर उतरने को मजबूर है।"
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और कूटनीति पर सवाल
चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों के ज्ञानेश कुमार के साथ बैठने और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के सवाल पर अमृता धवन ने इसे महज एक "डिप्लोमैटिक ड्रामा" करार दिया। उन्होंने दावा किया: "यह केवल एक कूटनीति है। जिस तरह प्रधानमंत्री विदेश नीति में दबाव बनाकर रिश्ते ठीक दिखाने की कोशिश करते हैं, ठीक वैसे ही इलेक्शन कमिश्नरों पर भी दबाव बनाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिठाया गया। आयोग के भीतर ही दो कमिश्नर आपत्तियों को नजरअंदाज किए जाने की बात कह चुके हैं। जब तक निष्पक्षता बहाल नहीं होती, ज्ञानेश कुमार को 200% इस्तीफा देना ही पड़ेगा। जनता अब चुप नहीं बैठने वाली।"

