x

सोनम वांगचुक को जबरन उठाने पर भड़के कपिल सिब्बल, MP में राम-रहीम के बयान को लेकर बवाल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से पेपर लीक के खिलाफ अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को पुलिस ने सफेद चादर तानकर जबरन हटा दिया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यूसीसी (UCC) लागू करने का दावा करते हुए 'राम और रहीम' पर तीखा बयान देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।


देश की राजनीति इस समय तीन बड़े मुद्दों को लेकर पूरी तरह गरमा गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस की सख्ती हो, मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मुख्यमंत्री का बड़ा बयान हो, या दतिया उपचुनाव से पहले बीजेपी के भीतर मची अंदरूनी कलह—इन सभी घटनाओं ने सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

1. जंतर-मंतर पर आधी रात का ऐक्शन: सोनम वांगचुक को पुलिस ने जबरन उठाया

जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से युवाओं के भविष्य और पेपर लीक के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे 60 साल के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने शनिवार सुबह जबरन हटा दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, पुलिस ने मंच के चारों तरफ सफेद चादर तान दी ताकि कोई मोबाइल या कैमरे से रिकॉर्डिंग न कर सके, और उन्हें एम्बुलेंस में डालकर अस्पताल ले गई।

इस कार्रवाई पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनका पुराना बयान याद दिलाया, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और अन्ना हजारे आंदोलन के समय तत्कालीन केंद्र सरकार से पूछते थे कि "आप आधी रात को लोगों को ऐसे कैसे उठा सकते हैं?" सिब्बल ने सीधा सवाल दागा कि साल 2017 से लगातार हो रहे पेपर लीक और 20 से ज्यादा छात्रों की आत्महत्या पर प्रधानमंत्री मौन क्यों हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि आज की सरकार जनता की बात सुनने के बजाय सिर्फ विपक्ष की सरकारें गिराने और अपनी सत्ता बचाने में जुटी है।

2. मध्य प्रदेश में यूसीसी पर सियासी भूचाल: सीएम मोहन यादव का राम-रहीम बयान

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का बड़ा ऐलान किया है। लेकिन इस ऐलान के दौरान दिए गए उनके एक उदाहरण ने राजनीतिक गलियारों में आग में घी डालने का काम कर दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा, "अगर राम को एक शादी की कानूनी वैधता है, तो रहीम भी अब एक ही शादी कर सकेगा!"

इस बयान ने विपक्ष को 'सांप-छछूंदर की गति' में ला खड़ा किया है। अगर वे इसका विरोध करते हैं तो बहुसंख्यक वोटर नाराज होंगे, और चुप रहते हैं तो अल्पसंख्यक वोट बैंक हाथ से निकल जाएगा। हालांकि, राज्य की जनता अब सवाल उठा रही है कि दतिया उपचुनाव से ठीक पहले आया यह बयान कहीं बेरोजगारी और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने का सियासी फॉर्मूला तो नहीं है?

3. दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा, मंच पर छलके आंसू

मध्य प्रदेश के दतिया में बीजेपी के अंदरूनी डैमेज कंट्रोल की धज्जियां उड़ गई हैं। 15 साल तक दतिया के बेताज बादशाह रहे पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर जब आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया गया, तो नरोत्तम मिश्रा मंच पर ही सरेआम रो पड़े। उन्होंने रोते हुए बयान दिया, "लोग कह रहे हैं आशुतोष ने टिकट काट दिया, अरे उसकी इतनी औकात कहां? टिकट काटने वाले तो कोई और ही हैं!"

इस बयान के बाद नरोत्तम समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने 8 किलोमीटर लंबा हाईवे जाम कर दिया। दतिया में बीजेपी कैडर के दम पर नहीं, बल्कि नरोत्तम के निजी नेटवर्क पर चलती थी, ऐसे में कार्यकर्ताओं का यह गुस्सा नए उम्मीदवार की लुटिया डुबो सकता है। दूसरी तरफ, साफ-सुथरी छवि वाले कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह के लिए राह आसान होती दिख रही है। अब देखना यह है कि क्या नरोत्तम के वफादार 'रिवेंज वोटिंग' करके बीजेपी को दतिया में करारी शिकस्त देंगे?

Read More
Next Story