बारिश थमी पर संकट बरकरार: लखनऊ में खतरे के निशान की ओर गोमती, घरों में घुसा पानी
उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून ने पिछले 18 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। जून से सितंबर के बीच राज्य में सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। अब इसका असर लखनऊ समेत कई जिलों में दिख रहा है। लखीमपुर खीरी, सीतापुर, शाहजहांपुर और हरदोई में बाढ़ जैसे हालात हैं।
उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून ने पिछले 18 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। जून से सितंबर के बीच राज्य में सामान्य से 8 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है। इस भारी बारिश का खामियाज़ा अब राजधानी लखनऊ समेत राज्य के कई ज़िले भुगत रहे हैं। लखीमपुर खीरी, सीतापुर, शाहजहांपुर और हरदोई जैसे जिलों में बाढ़ और जलभराव की गंभीर स्थिति बनी हुई है।
'द फ़ेडरल' की इस रिपोर्ट में जानिए कि कैसे बारिश रुकने के बावजूद लखनऊ में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं और आम जनजीवन किस तरह प्रभावित हो रहा है।
1. गोमती का बढ़ा जलस्तर: बारिश रुकी, पर संकट बरकरार
राजधानी लखनऊ में आसमान से राहत मिलने के बाद भी ज़मीन पर संकट मंडरा रहा है। इसकी मुख्य वजह गोमती नदी के जलस्तर में हुई भारी वृद्धि है। अधिकारियों के अनुसार, ऊपरी इलाकों (जहाँ से गोमती बहकर आती है) में हुई भारी बारिश का पानी अब लखनऊ पहुंच रहा है, जिससे नदी उफान पर है।
हनुमान सेतु पर गोमती का जलस्तर 106.99 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान (109.50 मीटर) से भले ही अभी नीचे है, लेकिन नदी का पानी शहर के कई निचले इलाकों में प्रवेश कर चुका है।
2. फैजुल्लागंज से गोमती नगर एक्सटेंशन तक जलभराव, रिवरफ्रंट बंद
नदी का जलस्तर बढ़ने से लखनऊ के कई रिहायशी इलाके, विशेषकर फैजुल्लागंज और गोमती नगर एक्सटेंशन के निचले हिस्से, जलमग्न हो गए हैं। बुनियादी सुविधाओं का संकट: घरों में पानी भरने से स्थानीय निवासी बिजली, पीने के पानी, दवाइयों और रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं।
गोमती रिवरफ्रंट पर ताला: बाढ़ का असर केवल रिहायशी बस्तियों तक सीमित नहीं है। एहतियात के तौर पर ज़िला प्रशासन ने पर्यटकों के बीच मशहूर 'गोमती रिवरफ्रंट' को भी अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया है।
3. प्रशासन का रेस्क्यू ऑपरेशन और राहत कैंप
बाढ़ के हालात को देखते हुए प्रशासन और सरकार अलर्ट मोड पर हैं:
राहत और बचाव कार्य: जलमग्न इलाकों से लोगों को निकालने के लिए 60 नावों को तैनात किया गया है।
मेडिकल और रिलीफ कैंप: प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप स्थापित किए गए हैं। प्रशासन द्वारा फंसे हुए लोगों तक भोजन, पीने का साफ पानी और ज़रूरी दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं।
सीएम योगी के निर्देश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को तुरंत स्कूलों और मैरिज हॉलों जैसे सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। इसके साथ ही, विस्थापित लोगों के लिए भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और उनके पशुओं के लिए चारे की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए गए हैं।
4. कब मिलेगी राहत? क्या हैं आगे के आसार?
लखनऊ वासियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह संकट कब टलेगा। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि यदि गोमती के जलग्रहण क्षेत्रों (ऊपरी इलाकों) में दोबारा भारी बारिश नहीं होती है, तो मंगलवार शाम तक गोमती का जलस्तर स्थिर हो सकता है। इसके बाद बुधवार से पानी उतरना शुरू होने की संभावना है, जिससे निचले इलाकों को राहत मिलेगी।
रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने एक बार फिर शहरी ड्रेनेज सिस्टम और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भले ही मंगलवार-बुधवार तक पानी उतरने की उम्मीद हो, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह समस्या सिर्फ कुछ दिनों की है, या फिर जलवायु परिवर्तन के इस दौर में सरकार और प्रशासन को भारी बारिश और बाढ़ से निपटने के लिए अपनी दीर्घकालिक योजनाओं और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है?
