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बांकीपुर में ढही BJP, 18 दिन में धंसा एक्सप्रेस-वे, कांग्रेस में रार

द फ़ेडरल देश के शो 'राजपथ' में प्रदीप सहगल के साथ जानिए कैसे प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में बीजेपी को हराया, क्यों 18 दिन में धंसा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे और पंजाब कांग्रेस में भूपेश बघेल पर क्यों लगे जनरल डायर के नारे।


Rajpath: चुनावी वादों, बड़बोले बयानों और आधे-अधूरे विकास के दावों के बीच देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बिहार के पटना की चर्चित बांकीपुर सीट पर बीजेपी के मजबूत किले का ध्वस्त होना हो, या फिर उत्तर प्रदेश में 4,700 करोड़ रुपये की लागत से बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे का महज 18 दिनों में 84 स्थानों से धंस जाना सत्ता पक्ष के लिए ये बड़े झटके साबित हो रहे हैं। उधर, पंजाब कांग्रेस के भीतर 2027 की मुख्यमंत्री कुर्सी की जंग अब 'जनरल डायर' वाले नारों और चूड़ियां दिखाने के ड्रामे तक पहुँच चुकी है।


डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने इन तीनों राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों का निष्पक्ष और तीखा विश्लेषण किया है।

1. बांकीपुर में 'नैरेटिव' की दवा से बीजेपी ढेर: 422 में से 400 से ज्यादा बूथों पर प्रशांत किशोर की जीत
पटना साहिब लोकसभा के अंतर्गत आने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट को बीजेपी का सबसे अभेद्य किला माना जाता था। लेकिन जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने बीजेपी के ही 'नैरेटिव गेम' के दांव से पार्टी की लुटिया डुबो दी।

एक बयान और ढह गया किला: रविशंकर प्रसाद के एक बयान को प्रशांत किशोर ने बांकीपुर की जनता के सामने बीजेपी का "अहंकार" बनाकर पेश किया—'बीजेपी अगर किसी को भी खड़ा कर दे तो जीत जाएगी'-। पीके ने वोटरों के दिल में यह बात बैठा दी कि सत्ताधारी दल उनके वोट को क्या समझता है।

दिग्गजों के पोलिंग बूथों पर करारी हार: नतीजों में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, डॉ. सी.पी. ठाकुर और रामकृपाल यादव के अपने बूथों पर भी बीजेपी चुनाव हार गई। 422 में से 400 से ज्यादा बूथों पर पीके का जादू चला।

सवर्ण नाराजगी और ज्वलंत मुद्दे: बेरोजगारी, यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस, जहानाबाद NEET छात्रा केस और भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक और युवाओं में सुलग रहे गुस्से ने प्रशांत किशोर के नैरेटिव के साथ मिलकर बीजेपी के गढ़ को ध्वस्त कर दिया।

2. 'अमेरिका जैसी सड़कें' 18 दिन में धंसीं: 4,700 करोड़ का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे बना जानलेवा
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन पर उत्तर प्रदेश की सड़कों को अमेरिका जैसी बनाने का दावा किया था। लेकिन 63 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे उद्घाटन के महज 18 दिनों के भीतर ही अपनी गुणवत्ता की पोल खोल बैठा।

84 जगहों पर दरारें और गड्ढे: 4,700 करोड़ रुपये (लगभग 75 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर) की लागत से बना यह एक्सप्रेस-वे 84 अलग-अलग जगहों पर धंस गया। कानपुर जाने वाली लेन पर 39 और लखनऊ आने वाली लेन पर 45 जगहों पर पैचवर्क करना पड़ा।

12 घंटे में दोबारा उखड़ी सड़क: लखनऊ से 30 किलोमीटर दूर NHAI द्वारा उखाड़कर 2 फीट गहरे गड्ढे को भरकर दोबारा बनाई गई सड़क 12 घंटे के भीतर ही फिर से 2-3 इंच चौड़ी दरारें दिखा गई।

चुनावी जल्दबाजी का शिकार
: यूपी चुनाव से ठीक पहले फीते काटने की होड़ में जनता के गाढ़ी कमाई के अरबों रुपयों को जोखिम में डालकर आधा-अधूरा निर्माण सौंपा जा रहा है, जिससे यात्रियों की जान पर हर पल खतरा बना हुआ है।

3. पंजाब कांग्रेस में सिरफुटौव्वल: भूपेश बघेल की तुलना 'जनरल डायर' से, राजा वड़िंग की धमकी
2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा? इस सवाल ने पंजाब कांग्रेस को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है। लुधियाना के गुरु नानक देव भवन में आयोजित बैठक में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई।

मंच से चूड़ियों का इशारा: पूर्व विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने मंच से पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू के समर्थकों को चूड़ियां पहनने का इशारा कर दिया, जिसके बाद दोनों गुटों में मारपीट की नौबत आ गई।

'बघेल गो बैक' के नारे: प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग द्वारा विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को 'आरएसएस का बंदा' कहे जाने पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा भड़क उठा। बैठक के बाहर कार्यकर्ताओं ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की फोटो वाली टी-शर्ट लहराई, जिसमें उन्हें 'जनरल डायर' बताया गया था।

चन्नी बनाम वड़िंग की जंग: पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी का गुट राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर चन्नी को सीएम चेहरा बनाना चाहता है। हाईकमान के इनकार के बाद यह खींचतान अब आम आदमी पार्टी और बीजेपी को राजनीतिक फायदा पहुंचाने की जमीन तैयार कर रही है।


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