
UN में शरीफ ने छेड़ा कश्मीर राग, ट्रंप को कहा ‘शुक्रिया’; भारत ने दिया करारा जवाब
शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि पर भारत को चेतावनी देते हुए पानी रोकने या मोड़ने की कोशिश को ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानने की बात कही। भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए आतंकवाद, अल्पसंख्यकों की स्थिति और PoK में अधिकारों का मुद्दा उठाया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर कश्मीर और सिंधु जल समझौते का मुद्दा उठाया। उन्होंने 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का भी जिक्र किया और समय पर हस्तक्षेप करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को श्रेय दिया। भारत ने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के आरोपों का जवाब दिया। भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा बताया और पाकिस्तान पर आतंकवाद, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की स्थिति को लेकर सवाल उठाए।
ट्रंप को कहा शुक्रिया
शरीफ ने कहा कि 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के दौरान दोनों परमाणु हथियार संपन्न देश बड़े युद्ध के करीब पहुंच गए थे। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान ट्रंप ने सही समय पर हस्तक्षेप किया और इससे हालात को और बिगड़ने से रोकने में मदद मिली।
कश्मीर पर क्या बोले शहबाज शरीफ?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के लिए कश्मीर मुद्दे का “न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान” जरूरी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत संग्रह की पाकिस्तान की पुरानी मांग दोहराई।
शरीफ ने कहा कि जब तक कश्मीरियों को खुद फैसला लेने का अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक हम उन्हें कूटनीतिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन देते रहेंगे। उन्होंने कहा, "कश्मीर पाकिस्तान की जुगुलर वेन (गले की नस) है और हमेशा रहेगा।"
सिंधु जल संधि को लेकर दी चेतावनी
शरीफ ने भारत के सिंधु जल समझौते को स्थगित रखने के फैसले पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस फैसले को कानूनी रूप से वैध नहीं मानता। शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान “युद्ध की कार्रवाई” मानेगा।
भारत ने दिया जवाब
भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का “अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा” है और हमेशा रहेगा।
गहलोत ने कहा, "दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी धार्मिक बातें दुनिया को गुमराह नहीं कर सकतीं। जम्मू-कश्मीर का भी ज़िक्र किया गया। यह मेरे देश का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और हमेशा रहेगा। लेकिन अगर हमें कश्मीर की बात करनी ही है, तो हमारा ध्यान पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर की ओर होना चाहिए. वहां लंबे समय से हो रही बेवजह हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछा जाना चाहिए।"
आतंकवाद और पाकिस्तान की व्यवस्था पर भारत का हमला
गहलोत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों और ईशनिंदा कानूनों का भी जिक्र किया। भारत ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में सेना की भूमिका पर सवाल उठाए। गहलोत ने 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में मिलने का जिक्र करते हुए भी इस्लामाबाद के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड पर सवाल उठाया।
गहलोत ने कहा, "पाकिस्तान की ओर से हो रहे आतंकवाद के गंभीर नतीजे होंगे. हमें भरोसा है कि यह सभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उसी रूप में देखेगी, जैसी वे वास्तव में हैं, न कि उस रूप में जैसा पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने झूठ बोलकर दिखाया है।"

