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वांगचुक अनशन, आजम की यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर का साया और अखिलेश का रथ

दिल्ली हाई कोर्ट की फटकार के बाद वांगचुक के लिए मेडिकल टीम; जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतें अवैध, बुलडोजर का 15 दिन का नोटिस।


Rajpath: देश की राजनीति में इस वक्त तीन बड़े घटनाक्रमों ने भारी हलचल मचा रखी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा सोनम वांगचुक का ऐतिहासिक अनशन, रामपुर में आजम खान के अवैध साम्राज्य पर प्रशासन का बड़ा चाबुक और उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 को लेकर अखिलेश यादव की आगामी रथ यात्रा। डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फेडरल देश' के चर्चित शो 'सियासत' में एंकर प्रदीप सहगल ने इन तीनों बड़े मुद्दों का एक मुकम्मल और खोजी विश्लेषण पेश किया है।

1. अदालत की फटकार के बाद जागी सरकार, सोनम वांगचुक की सेहत पर तैनात हुई मेडिकल टीम

एंकर प्रदीप सहगल ने रिपोर्ट में बताया कि दिल्ली की तपती धूप में पिछले 19 दिनों से अन्न का एक दाना खाए बिना, देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और नीट (NEET) पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर बैठे हैं। 19 दिनों तक केंद्र सरकार ने इस पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी, लेकिन जब पानी सिर से ऊपर गुजर गया और मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, तब जाकर हुकूमत हरकत में आई।

हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि 'हर नागरिक की जान कीमती है'। कोर्ट की इस डांट और सख्ती के बाद केंद्र सरकार ने अदालत में घुटने टेक दिए। पहले जहां सरकार दलीलें दे रही थी, वहीं अब कोर्ट के आदेश के बाद हर दिन सरकारी डॉक्टरों और विशेषज्ञों की एक विशेष टीम सोनम वांगचुक की सेहत पर चौबीसों घंटे नजर रखेगी और उन्हें सभी जरूरी मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। हालांकि, प्रदीप सहगल ने तीखा सवाल उठाया कि मेडिकल टीम भेजने मात्र से क्या नीट का भ्रष्ट सिस्टम सुधर जाएगा या शिक्षा मंत्री इस्तीफा दे देंगे?

2. आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर का साया: 15 दिन का अल्टीमेटम

उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के लिए एक और बेहद बुरी खबर आ रही है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट को 15 दिनों का सख्त अल्टीमेटम जारी किया है। जांच में सामने आया है कि यूनिवर्सिटी की कुल 40 इमारतों में से 38 इमारतें पूरी तरह से बिना स्वीकृत नक्शे के यानी अवैध रूप से बनाई गई हैं।

प्रशासन ने साफ कह दिया है कि या तो 15 दिन के भीतर मैनेजमेंट खुद इन अवैध निर्माणों को गिरा दे, वरना सरकारी बुलडोजर अपना काम करेगा। शो में बताया गया कि साल 2005 में मुलायम सिंह यादव की पूरी कैबिनेट ने जिस यूनिवर्सिटी की नींव रखी थी, उसकी हकीकत यह है कि आलियागंज गांव के 26 गरीब किसानों की 35 बीघा जमीन बिना उनकी मर्जी के कौड़ियों के भाव हड़प ली गई थी। आज वही आजम खान दोहरे पैन कार्ड मामले में बेटे के साथ जेल में हैं और उनका खड़ा किया साम्राज्य ढहने की कगार पर है।

3. यूपी 2027: क्या अखिलेश यादव की रथ यात्रा दोहराएगी 2012 का इतिहास?

शो के आखिरी हिस्से में एंकर प्रदीप सहगल ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के आगामी मास्टरस्ट्रोक का विश्लेषण किया। अखिलेश यादव अगस्त-सितंबर में पूरे उत्तर प्रदेश में एक बड़ी रथ यात्रा निकालने जा रहे हैं।

अखिलेश यादव खुद 2012 में 'क्रांति रथ' लेकर निकले थे और पूर्ण बहुमत (224 सीटें) के साथ यूपी के सबसे युवा सीएम बने थे। हालांकि, 2022 की रथ यात्रा में वे 111 सीटों पर ही सिमट कर रह गए थे।

अखिलेश की इस रथ यात्रा के 3 मुख्य मकसद:

पूरे सपा संगठन और कार्यकर्ताओं को समय से पहले चुनावी मोड में लाना।

अखिलेश यादव को सूबे में सीएम पद के सबसे मजबूत और इकलौते चेहरे के रूप में स्थापित करना।

2024 के लोकसभा चुनाव में मिली भारी सफलता (बीजेपी को कड़ी शिकस्त) की लय को 2027 के विधानसभा चुनाव तक बरकरार रखना।

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