क्या सच में साफ हुई यमुना? दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
छठ पूजा से ठीक पहले दिल्ली में यमुना नदी की सफाई को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी के यमुना में डुबकी लगाने के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है।
Zamini Hakikat: छठ पर्व के नजदीक आते ही दिल्ली में यमुना नदी की सफाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और सियासत एक बार फिर से तेज हो गई है। हाल ही में, उत्तर पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने सोनिया विहार घाट पर यमुना नदी में डुबकी लगाते हुए एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो में उन्होंने दावा किया कि जब से दिल्ली में भाजपा की सरकार आई है, यमुना के पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। उन्होंने लोगों से यमुना तट पर छठ मनाने की अपील भी की।
मनोज तिवारी का दावा और राजनीतिक विवाद
मनोज तिवारी के इस दावे के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला है। AAP नेताओं का कहना है कि तिवारी का यह दावा पूरी तरह से झूठा है और वह केवल राजनीतिक फायदे के लिए जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने 2021 के एक पुराने वीडियो का हवाला दिया, जहां तिवारी ने वजीराबाद के पास यमुना के गंदे पानी को लेकर तत्कालीन सरकार की आलोचना की थी।
ग्राउंड रिपोर्ट: वजीराबाद और सोनिया विहार की हकीकत
ज़मीनी हकीकत जानने के लिए जब रिपोर्टर ने वजीराबाद और सोनिया विहार का दौरा किया, तो स्थिति मनोज तिवारी के दावों से अलग नजर आई। सोनिया विहार में पानी का स्तर अधिक होने के कारण वह थोड़ा साफ जरूर दिखता है, लेकिन सिग्नेचर ब्रिज के बाद नजफगढ़ ड्रेन के यमुना में मिलने से पानी काला और मटमैला होने लगता है। आगे कालिंदी कुंज तक आते-आते 22 से ज्यादा नाले यमुना में मिलते हैं, जिससे पानी पूरी तरह दूषित हो जाता है।
कालिंदी कुंज में जहरीले झाग और केमिकल का छिड़काव
कालिंदी कुंज में यमुना के पानी में अभी भी जहरीले सफेद झाग तैरते हुए देखे जा सकते हैं। छठ पूजा को देखते हुए इन झागों को छिपाने या खत्म करने के लिए सरकार द्वारा मोटर बोट के जरिए केमिकल (डिफोमर) का छिड़काव किया जा रहा है। यह वही केमिकल है जिसका भाजपा पहले विपक्ष में रहते हुए कड़ा विरोध करती थी और इसके सुरक्षित होने पर सवाल उठाती थी।
छठ पूजा और वोट बैंक की राजनीति
छठ पूजा दिल्ली में रहने वाले लाखों पूर्वांचलियों के लिए आस्था का बहुत बड़ा पर्व है। राजनीतिक दल इसे अपने वोट बैंक को साधने के एक अवसर के रूप में भी देखते हैं। यमुना की सफाई का मुद्दा हर साल इस समय उठता है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद फिर से ठंडे बस्ते में चला जाता है।
यमुना की सफाई: वादे और वास्तविकता
2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यमुना की सफाई को अपनी प्राथमिकता बताया था। हालांकि, जमीनी हकीकत यही है कि अभी भी सीवर और औद्योगिक अपशिष्ट (इंडस्ट्रियल वेस्ट) बिना ट्रीट किए सीधे यमुना में बहाए जा रहे हैं। ऐसे में यमुना को पूरी तरह से स्वच्छ करने का वादा फिलहाल जमीन पर हकीकत बनता नजर नहीं आ रहा है।
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