दिल्ली में प्रदर्शन पर घमासान: नेहा बोरा का नया दांव, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
दिल्ली में नेहा बोरा ने एक बार फिर पुलिस को चकमा देकर कनॉट प्लेस में प्रदर्शन किया, जबकि CJP के तीन नेताओं को शर्तों के साथ रिहाई मिली। शांतिपूर्ण प्रदर्शन, हिरासत और आवाजाही के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बीच आंदोलन को लेकर सियासी हलचल तेज है।
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर रविवार को भी सियासी हलचल जारी रही। एक ओर AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पुलिस को चकमा देकर कनॉट प्लेस तक पहुंच गईं, तो दूसरी ओर CJP के नेताओं को अदालत से शर्तों के साथ रिहाई मिल गई। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी लोगों की आवाजाही, शांतिपूर्ण एकत्र होने के अधिकार और हिरासत को लेकर अहम टिप्पणियां की हैं।
पुलिस को चकमा देकर कनॉट प्लेस पहुंचीं नेहा बोरा
दिल्ली में रविवार को प्रदर्शन के बीच एक बार फिर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच आंख-मिचौली देखने को मिली। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा अपने समर्थकों के साथ आरके आश्रम मार्ग से पंचकुईयां रोड होते हुए अचानक कनॉट प्लेस पहुंच गईं। बताया जा रहा है कि उन्होंने पुलिस की निगरानी से बचते हुए यह रास्ता चुना। हालांकि कुछ देर बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
यह लगातार दूसरा दिन है जब नेहा बोरा ने अपने प्रदर्शन का स्थान आखिरी समय में बदला। शनिवार को भी वह जंतर-मंतर के बजाय अचानक दिल्ली हाट पहुंच गई थीं, जहां प्रदर्शन के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था।
दादी के निधन के बाद गांव लौटे अभिजीत दीपके
उधर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि अपनी दादी के निधन के बाद वह अपने गांव लौट रहे हैं। उन्होंने लिखा कि इस दुख की घड़ी में वह परिवार के साथ रहेंगे, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका दिल्ली में आगे की रणनीति पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। दीपके ने दावा किया कि उनकी पार्टी न पीछे हटेगी और न डरेगी। उन्होंने 10 अक्टूबर को आंदोलन का अहम दिन बताया।
CJP के तीन नेताओं को शर्तों के साथ रिहाई
इससे पहले दिल्ली कैंट स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत से अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक तीनों को 10 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था। अदालत ने एक वर्ष तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50 हजार रुपये के जमानती मुचलके के बाद तीनों को रिहा किया।
CJP नेताओं का सरकार और पुलिस पर हमला
रिहाई के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP नेताओं ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। सौरव दास ने देश में आपातकाल जैसे हालात होने का दावा किया और कहा कि सरकार जनता की आवाज सुनने के बजाय विरोध को दबा रही है।
वहीं आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना मिलने के दौरान भी पुलिस का रवैया संवेदनशील नहीं था।
सौरव दास ने यह दावा भी किया कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि RSS के भीतर भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग का समर्थन है। इन दावों पर संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। CJP ने कहा कि उसका आंदोलन जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार
इन घटनाक्रमों के बीच रविवार को सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां भी सामने आईं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि कानून के मुताबिक लोगों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अलावा किसी को हिरासत में नहीं लिया जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि जहां BNSS की धारा 163 लागू नहीं है, वहां लोगों को शांतिपूर्वक एकत्र होने का अधिकार है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आसपास धारा 163 संबंधी चेतावनी बोर्ड हटाने, मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने तथा बैरिकेडिंग की समीक्षा करने के निर्देश दिए। अदालत ने बिना कानूनी आधार इंटरनेट सेवाएं बाधित न करने की बात भी कही।
दिल्ली में आगे क्या होगी आंदोलन की रणनीति?
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और अदालत की टिप्पणियों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में प्रदर्शन किस दिशा में बढ़ता है। CJP आंदोलन जारी रखने की बात कह रही है, जबकि पुलिस और प्रशासन के अगले कदम पर भी नजर बनी हुई है।
