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जंतर-मंतर Ground Report: नेहा बोरा के आह्वान पर उमड़े छात्र, CEC के इस्तीफे पर बढ़ा बवाल!

जैसे ही नेहा बोरा, कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज का काफिला जंतर-मंतर के करीब पहुंचा, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स के पास ही बैठकर चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।


मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देश की राजनीति का केंद्र बन गया है। शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी यहां छात्रों, नागरिक संगठनों और प्रमुख राजनीतिक व कानूनी हस्तियों का भारी जमावड़ा देखने को मिला। जंतर-मंतर पर क्या कुछ हुआ देखिए ग्राउंड से हमारे संवाददाता मनीष कुमार की रिपोर्ट।

नेहा बोरा की अपील पर जंतर-मंतर पहुंचे छात्र

शुक्रवार को पुलिस कार्रवाई और बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों के बावजूद शनिवार को आंदोलन की आंच और ज्यादा तेज हो गई। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने शुक्रवार को हिरासत से छूटने के बाद शनिवार दोपहर 1 बजे जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की थी। नेहा बोरा के इस आह्वान का असर शनिवार को साफ देखने को मिला, जब दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, जामिया और अन्य संस्थानों से सैकड़ों छात्र जंतर-मंतर की ओर कूच करने लगे।

छात्रों का मुख्य आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के नाम पर देश भर में लाखों वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब कर दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की नींव पर सीधा हमला है और जब तक इस प्रक्रिया की जवाबदेही तय नहीं होती और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण और दिग्गजों की एंट्री से बदला माहौल

शनिवार के प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि छात्रों के इस आंदोलन को देश के शीर्ष वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी खुला समर्थन मिला। निर्दलीय राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, स्वराज इंडिया के संस्थापक योगेंद्र यादव और सूचना के अधिकार (RTI) कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज खुद सड़कों पर उतरे।

कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण के नेतृत्व में युवाओं और वकीलों का एक बड़ा जत्था जंतर-मंतर की ओर बढ़ा। इन दिग्गजों की मौजूदगी ने आंदोलन को न केवल कानूनी और नैतिक मजबूती दी, बल्कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव भी कई गुना बढ़ा दिया।

पुलिस ने रास्ते में ही सबको हिरासत में लिया

हालांकि, प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने पहले से ही व्यापक इंतजाम कर रखे थे। पूरे लुटियंस दिल्ली और नई दिल्ली इलाके में धारा 163 लागू कर दी गई थी। जंतर-मंतर जाने वाली सभी सड़कों पर 3 से 4 स्तर के मजबूत बैरिकेड्स लगाए गए थे और भारी संख्या में पुलिस बल तथा अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई थी।

जैसे ही नेहा बोरा, कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज का काफिला जंतर-मंतर के करीब पहुंचा, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स के पास ही बैठकर चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई की और जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही नेहा बोरा, कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज समेत दर्जनों छात्रों को हिरासत में ले लिया और बस में बैठाकर अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में ले गई।

'इस्तीफे तक जारी रहेगा संग्राम': योगेंद्र यादव

पुलिस की बस में बैठाए जाने के दौरान स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने मीडिया से बात करते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन पर करारा हमला बोला। योगेंद्र यादव ने कहा, "लोकतंत्र में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराना नागरिकों का संवैधानिक और मौलिक अधिकार है। पुलिस की लाठियों, बैरिकेड्स और जबरन हिरासत के दम पर हमसे हमारा यह अधिकार छीना नहीं जा सकता।"

योगेंद्र यादव ने आगे कहा कि यह लड़ाई सिर्फ किसी एक पद की नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के वोट देने के अधिकार की सुरक्षा की लड़ाई है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि पुलिस चाहे जितनी भी बसें भर ले और जितने भी लोगों को डिटेन कर ले, लेकिन जब तक CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हो जाता और वोटर लिस्ट में हुई गड़बड़ियों का हिसाब नहीं दिया जाता, तब तक यह प्रदर्शन थमने वाला नहीं है।

कानूनी मोड़ पर पहुंचा मामला

जंतर-मंतर पर पुलिस द्वारा लगातार दी जा रही रुकावटों और प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के खिलाफ अब मामला अदालत तक भी पहुंच गया है। इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति खारिज किए जाने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकीलों के सीधे मैदान में उतरने से अब चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया का मामला अदालती गलियारों में भी तेजी से गूंजेगा। दिल्ली पुलिस के इस कड़े पहरे और लगातार हो रही धरपकड़ के बावजूद छात्रों और विपक्षी नेताओं के तेवर ढीले पड़ते नजर नहीं आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और ज्यादा उग्र रूप धारण कर सकता है।

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