'सियासत': चिराग पासवान का अपनी ही सरकार को आईना, छात्रों के समर्थन में उतरे
'सियासत' में मनीष कुमार का विश्लेषण: पटना में छात्र आंदोलन के बीच पहुंचे चिराग पासवान। सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात और NDA सरकार को दी नसीहत।
Siyasat: बिहार की राजधानी पटना में पिछले दो हफ्तों से अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे छात्रों (Gen-Z) के उग्र प्रदर्शन ने एनडीए गठबंधन और केंद्र सरकार के भीतर खलबली मचा दी है। खुद को 'मोदी का हनुमान' बताने वाले केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान दिल्ली में अपने मंत्रालय के दो दिवसीय बड़े कार्यक्रम को बीच में ही छोड़कर अचानक पटना पहुंच गए।
डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म द फेडरल देश के विश्लेषण कार्यक्रम सियासत में वरिष्ठ पत्रकार मनीष कुमार ने पटना के गर्दनी बाग में आंदोलित छात्रों के बीच चिराग पासवान की मौजूदगी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनकी मुलाकात और इसके पीछे छिपे गहरे राजनीतिक निहितार्थों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की।
मंत्रालय का कार्यक्रम छोड़ अचानक पटना क्यों पहुंचे चिराग?
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने स्वीकार किया कि पटना में पिछले दो हफ्तों (18 अगस्त से) से चल रहे छात्र आंदोलनों और पुलिसिया बर्बरता के विजुअल्स देखने के बाद वे दिल्ली में अपने मंत्रालय के पीएम-एफएमई (PMFME) योजना संबंधी कार्यक्रम को बीच में छोड़कर सीधे पटना आ गए।
पटना एयरपोर्ट पर उतरते ही वे किसी राजनीतिक कार्यक्रम में जाने के बजाय सीधे गर्दनी बाग पहुंचे, जहां छात्र 15 सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। चिराग ने रोते-बिलखते छात्रों की समस्याएं सुनीं और उनसे उनका ज्ञापन (Memorandum) लिया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात और सरकार को नसीहत
गर्दनी बाग से निकलकर चिराग पासवान अपने सांसदों और पार्टी नेताओं के साथ बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने पहुंचे। करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में चिराग ने छात्रों की मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपा।
मीडिया से बात करते हुए चिराग पासवान ने बड़े ही सधे अंदाज में अपनी ही गठबंधन सरकार (NDA) पर सवाल उठाए और कहा:
"जब मैं विपक्ष में था, तब भी इनकी आवाज उठाता था। आज यदि मैं सत्ता पक्ष में आ गया हूं, तो कानों में रुई डालकर चुप बैठ जाऊं, यह मेरी सोच नहीं है। यह कोई विपक्ष की भूमिका निभाना नहीं, बल्कि एक जायज स्टैंड लेना है।"
चिराग पासवान की 'बेचैनी' के 4 मुख्य राजनीतिक कारण
वरिष्ठ पत्रकार मनीष कुमार के विश्लेषण के अनुसार, बिहार की राजनीति में अपनी जमीन खिसकने के डर से चिराग पासवान बेहद सतर्क कदम उठा रहे हैं:
प्रशांत किशोर और जन सुराज का उभार: बांकेपुर (जिसे बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता था) में हुए हालिया उपचुनाव में प्रशांत किशोर के उम्मीदवार की जीत ने एनडीए के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा दी है।
तेजस्वी यादव का सड़कों पर एग्रेशन: राजद नेता तेजस्वी यादव का अचानक वाटर कैनन के सामने आकर गिरफ्तारी देना, घायल छात्रों से अस्पताल में मिलना और युवाओं से जुड़ना चिराग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
देशभर में Gen-Z और Gen-Alpha का आक्रोश: जंतर-मंतर से लेकर बिहार और यूपी तक डबल इंजन सरकारों के खिलाफ युवाओं और स्कूली बच्चों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
बिहार में कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल: बिहार में एनडीए सरकार के तहत प्रशासनिक ढिलाई और कानून व्यवस्था को लेकर युवाओं का रोष चरम पर है।
हनुमान की भूमिका और राजनीतिक भविष्य
बिहार विधानसभा में लोजपा (रामविलास) के 19 विधायक हैं और केंद्र में 5 लोकसभा सांसद हैं। उनकी मुख्य राजनीतिक ताकत बिहार का युवा और उनका पारंपरिक वोट बैंक है। चिराग पासवान भली-भांति समझते हैं कि इस नाजुक मोड़ पर युवाओं के खिलाफ खड़े होने या चुप रहने की उन्हें भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। यही वजह है कि वे एनडीए में रहते हुए भी छात्रों के हिमायती और सरकार के सलाहकार की दोहरी भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं।
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