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सियासत: दिल्ली वोटर लिस्ट से 54% नाम गायब, VVIP को नोटिस महज़ दिखावा?

दिल्ली में 31.64 लाख वोटरों को नोटिस। आडवाणी से केजरीवाल तक को नोटिस देकर क्या आम आदमी के साथ मज़ाक कर रहा है EC?


Siyasat: क्या दिल्ली में चल रहा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग की कोई पारदर्शी प्रक्रिया है, या फिर आम जनता को वोटर लिस्ट से बाहर करने की एक सोची-समझी साजिश? डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के तीखे राजनीतिक शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने दिल्ली की मतदाता सूची में हो रही इस ऐतिहासिक उथल-पुथल की 'ज़मीनी हकीकत' और चुनाव आयोग की मंशा का कड़ा विश्लेषण किया है।


शो में सीधा सवाल उठाया गया कि क्या लालकृष्ण आडवाणी से लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तक, VVIPs को नोटिस थमाना चुनाव आयोग का खुद को 'पाक-साफ' साबित करने का महज एक भद्दा मज़ाक है?

1. VVIP को नोटिस: निष्पक्षता का चोला या भद्दा मज़ाक?
चुनाव आयोग ने 2002 के SIR से नाम की 'मैपिंग' (मिलान) न होने या विसंगति के नाम पर जिन लोगों को नोटिस भेजा है, उनमें देश के सबसे रसूखदार नाम शामिल हैं:

पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका।

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और पूर्व सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी।

वर्तमान चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू।

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल।

एंकर मनीष कुमार का विश्लेषण:
सत्ताधारी इसे चुनाव आयोग की निष्पक्षता बता रहे हैं कि "आयोग आम और खास में फर्क नहीं करता।" लेकिन हकीकत यह है कि इन VVIPs के घर सरकारी मशीनरी और बीएलओ (BLO) खुद जाकर कागजात दुरुस्त कर देंगे। असली सवाल उन लाखों 'आम वोटर्स' का है, जिन्हें बिना किसी ठोस जानकारी के नोटिस थमा दिया गया है। वे सरकारी दफ्तरों के धक्के कैसे खाएंगे? पश्चिम बंगाल और बिहार में चुनाव आयोग की ऐसी ही कार्रवाई देश भूला नहीं है।

2. दिल्ली वोटर लिस्ट के खौफनाक आंकड़े: 54% वोटरों पर गिरी गाज
चुनाव आयोग के दावे (कि कोई पात्र नागरिक नहीं छूटेगा) और ज़मीनी आंकड़ों में ज़मीन-आसमान का अंतर है। 'सियासत' में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़े पूरी प्रक्रिया को कटघरे में खड़े करते हैं:

SIR से पहले कुल वोटर: 1,45,56,722 (लगभग 1.45 करोड़)।

ड्रॉफ्ट रोल से पहले ही काटे गए नाम: 47,56,722 वोटर हटा दिए गए (जिनमें 43.32 लाख शिफ्ट/अनुपस्थित, 2.82 लाख मृत और 1.41 लाख डुप्लीकेट माने गए)।

बचे हुए वोटर (ड्रॉफ्ट रोल): महज़ 97,53,577 (यानी 33% वोटर्स पहले ही कट गए)।

नोटिस की मार: बचे हुए 97.53 लाख वोटरों में से 31,63,930 (31.64 लाख) वोटरों को विसंगति का नोटिस थमा दिया गया है।

निष्कर्ष: 1.45 करोड़ वोटरों में से करीब 79.2 लाख वोटर (लगभग 54%) या तो काट दिए गए हैं या उन्हें नोटिस थमाकर उनकी नागरिकता/पात्रता पर सवाल खड़ा कर दिया गया है।

3. कपिल सिब्बल का डेटा और विपक्ष का हमला
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने साफ कहा कि VVIP को नोटिस थमाना सिर्फ आंखों में धूल झोंकना है; बीएलओ सिर्फ बड़े लोगों के नाम जोड़ेंगे, आम आदमी धक्के खाएगा।

वहीं, सांसद कपिल सिब्बल ने 31.64 लाख नोटिसों का जो ब्रेकअप दिया, वह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की पोल खोलता है:

41% (13.40 लाख): अनमैप्ड (पिछले SIR से लिंक नहीं)।

23.71%: पिता के नाम में स्पेलिंग मिसमैच।

17%: खुद के नाम में स्पेलिंग मिसमैच।

चुनाव आयोग की समयसीमा के अनुसार, 30 सितंबर तक क्लेम/ऑब्जेक्शन फाइल करने हैं और 29 अक्टूबर तक इनका निपटारा होगा। 4 नवंबर 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट बताएगी कि यह प्रक्रिया नाम जोड़ने के लिए थी या वोटरों का नाम काटने के लिए।


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