सिद्धारमैया स्टिंग विवाद: जांच की आंच पहुंची कुमारस्वामी के घर
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सिद्धारमैया 'स्टिंग' विवाद: जांच की आंच पहुंची कुमारस्वामी के घर

बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर के बयान ने सिद्धारमैया 'स्टिंग' मामले की जांच को नया मोड़ दे दिया है। जांच की आंच अब केंद्रीय मंत्री HD कुमारस्वामी के दिल्ली आवास तक पहुंच गई है।


Siddaramaiah Sting Row: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निशाना बनाने वाले कथित स्टिंग ऑपरेशन ने अब एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। रविवार (2 अक्टूबर) को बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर के एक बयान ने केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के दिल्ली आवास को इस जांच के दायरे में ला खड़ा किया है।


कुमारस्वामी पर टिका जांच का फोकस

बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर सीमंत कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी रितेश पांडे ने पूछताछ में एक बड़ा खुलासा किया है। पांडे ने बताया कि इस ऑपरेशन में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन दिल्ली से खरीदा गया था। यह फोन कुमारस्वामी के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर एक अन्य आरोपी को सौंपा गया था। पांडे ने कबूल किया कि उसने और विनोद शर्मा ने करोल बाग से यह फोन खरीदा था और इसे कुमारस्वामी के दिल्ली आवास के सोशल मीडिया मैनेजर प्रज्वल प्रसाद को दिया था।

पुलिस यह पता लगाने के लिए आरोपियों के बीच हुए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है कि क्या इस ऑपरेशन के पीछे प्रभावशाली लोगों का हाथ था।

'स्टिंग' वीडियो और राजनीतिक आरोप

कथित स्टिंग ऑपरेशन का यह वीडियो (जिसे 2023 में रिकॉर्ड किया गया बताया जा रहा है) इस साल 27 सितंबर को एक यूट्यूब चैनल पर सामने आया था। इस वीडियो में एक महिला 2011 की एक घटना का हवाला देते हुए सिद्धारमैया पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाती नजर आ रही है। सिद्धारमैया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे उन्हें बदनाम करने और ब्लैकमेल करने की एक दुर्भावनापूर्ण कोशिश बताते हुए कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग की है।

इससे पहले कुमारस्वामी ने आरोप लगाया था कि डीके शिवकुमार ने पत्रकार राकेश शेट्टी की मदद से यह स्टिंग ऑपरेशन करवाया था। उनका मकसद सिद्धारमैया को निशाना बनाकर उनसे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिलवाना था। हालांकि, अब जांच का रुख कुमारस्वामी की तरफ मुड़ गया है, जिससे यह मामला कांग्रेस बनाम जेडी(एस) से हटकर वीडियो बनाने और वायरल करने वालों की तलाश तक पहुंच गया है।

CCB की जांच और नया मोड़

सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) इस वायरल वीडियो के पीछे के लोगों की जांच कर रही है। जांच में कांग्रेस नेता कृपा अल्वा और पत्रकार राकेश शेट्टी का नाम भी सामने आया था। शेट्टी को अग्रिम जमानत मिल गई है और अल्वा ने भी अपना बयान दर्ज करा दिया है।

कुमारस्वामी कांग्रेस सरकार और पुलिस जांच पर लगातार हमलावर रहे हैं और उन्होंने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। हालांकि, 24 अक्टूबर को रितेश पांडे की गिरफ्तारी के बाद डिजिटल ट्रेल ने जांच को कर्नाटक से बाहर पहुंचा दिया। पांडे के कबूलनामे ने इस विवाद को सीधे तौर पर कुमारस्वामी के दिल्ली आवास से जोड़ दिया है।

कुमारस्वामी के लिए इसके क्या मायने हैं?

इस खुलासे ने कुमारस्वामी को राजनीतिक रूप से असहज स्थिति में डाल दिया है, खासकर शिवकुमार पर उनके आरोपों के बाद। वहीं, शिवकुमार के लिए यह अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देने का एक मौका है। जांच अब इस ऑपरेशन और जेडी(एस) के सोशल मीडिया नेटवर्क के बीच संबंधों पर सवाल उठा रही है।

क्या यह मामला कुमारस्वामी पर ही भारी पड़ेगा, यह आगे की जांच और फोरेंसिक सबूतों पर निर्भर करेगा। पुलिस कमिश्नर ने जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह दी है। हालांकि राजनीतिक रूप से यह स्थिति कुमारस्वामी के लिए मुश्किल जरूर है, लेकिन कानूनी तौर पर अभी उन पर पूरी तरह से जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती है।

कड़ियों को जोड़ने में जुटी पुलिस

बेंगलुरु पुलिस का कहना है कि वीडियो में लगाए गए आरोप झूठे और मनगढ़ंत प्रतीत होते हैं। वे राजनीतिक या दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए वीडियो बनाने और उसे वायरल करने की एक सोची-समझी साजिश की भी जांच कर रहे हैं। CCB अभी प्रज्वल प्रसाद और विनोद शर्मा से पूछताछ करने की कोशिश कर रही है ताकि घटनाओं के क्रम, वित्तीय लेन-देन और निर्देशों को स्पष्ट किया जा सके। इस ऑपरेशन के पीछे किसका हाथ था और किसने इसकी फंडिंग की, इन सवालों के जवाब अभी भी तलाशे जा रहे हैं।


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