राम मंदिर दान चोरी: एसआईटी रिपोर्ट में 40 दिनों में 70 बार चोरी का दावा
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राम मंदिर दान चोरी: एसआईटी रिपोर्ट में 40 दिनों में 70 बार चोरी का दावा

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में 40 दिनों में 70 बार चोरी के सबूत मिलने का दावा किया गया है। छह लोगों पर एफआईआर की सिफारिश की गई है।


अयोध्या के राम मंदिर में दान की चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में कई अहम खुलासे किए गए हैं। एसआईटी के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में 40 दिनों के भीतर करीब 70 बार चोरी होने के पक्के सबूत मिले हैं। जांच के दौरान गिनती कक्ष के पास बने शौचालय से भी नकदी बरामद हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इससे पहले भी चोरी हुई हो सकती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया था। टीम अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है, जबकि अंतिम रिपोर्ट 15 जुलाई तक दी जाएगी। यह रिपोर्ट ट्रस्ट की बैठक में भी अधिकारियों के सामने रखी गई थी।

40 दिनों में 70 बार चोरी का दावा

एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच गिनती कक्ष में सुनियोजित तरीके से बार-बार चोरी की गई। सीसीटीवी फुटेज में कर्मचारियों को करीब 70 बार नकदी छिपाकर ले जाते हुए देखा गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ कर्मचारी अपनी जेबों और जुराबों में रुपये भरकर बाहर ले जाते थे। जांच टीम ने यह भी आशंका जताई है कि इस अवधि से पहले भी चोरी होती रही हो सकती है।

छह लोगों पर एफआईआर की सिफारिश

एसआईटी ने अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्र के खिलाफ चोरी, गबन और आपराधिक साजिश समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के बाद आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है।इसके अलावा गिनती कक्ष के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और अन्य निगरानी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने की सिफारिश की गई है।

सुरक्षा नियमों में मिली कई बड़ी लापरवाहियां

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रस्ट और स्टेट बैंक की संयुक्त मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। कर्मचारियों की प्रवेश और निकास के समय तलाशी नहीं ली जाती थी। बिना जेब वाली ड्रेस की व्यवस्था भी लागू नहीं की गई। कर्मचारियों को निजी सामान गिनती कक्ष में ले जाने की अनुमति थी और अलग-अलग दानपात्रों की नकदी को एक साथ गिना जाता था। इसके अलावा सीसीटीवी निगरानी भी प्रभावी नहीं थी। एसआईटी का मानना है कि इन लापरवाहियों की वजह से लंबे समय तक चोरी होती रही।

एसआईटी बनने से पहले ही हुई थी बड़ी बरामदगी

रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी के गठन से पहले ही ट्रस्ट ने गिनती प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों के पास से करीब 78.94 लाख रुपये, विदेशी मुद्रा, आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किया था। 4 जून को गिनती कक्ष के पास बने शौचालय से 2.25 लाख रुपये भी मिले थे।जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ आरोपियों के बैंक खातों में उनकी आय की तुलना में कहीं अधिक रकम जमा मिली और कई संदिग्ध लेनदेन भी पाए गए।

चांदी की ईंटों की भी जांच जारी

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सोशल मीडिया पर चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के गायब होने के लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है। टीम का कहना है कि जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट में कई अन्य अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।

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