
कमिश्नर गोलछा की अचानक विदाई से हड़कंप, इन 2 वजहों पर चर्चा तेज
गृह मंत्रालय के बड़े एक्शन के बाद दिल्ली पुलिस महकमे में अटकलों का बाजार गर्म; जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन और थानों में मनमानी पोस्टिंग के कारण कटे कई दिग्गजों के टिकट।
Delhi Police Commissioner Replacement: देश की राजधानी दिल्ली की कानून व्यवस्था के शीर्ष स्तर पर हुए एक अचानक और बेहद अप्रत्याशित बदलाव ने प्रशासनिक गलियारों से लेकर सियासी हलकों तक हड़कंप मचा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा को अचानक पद से हटाकर 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार को नया पुलिस कप्तान नियुक्त किए जाने के बाद से ही अटकलों का बाजार बेहद तेज है। हालांकि इस अचानक हुई विदाई को लेकर महकमे में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन अंदरखाने दो सबसे बड़े कारणों पर बेहद जोर-शोर से चर्चा जारी है, जिसने गोलचा की कुर्सी छीनने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
पहला कारण: जंतर-मंतर पर सीजेपी का धरना संभालने में नाकामी
अटकलों और चर्चाओं के केंद्र में सबसे पहला और बड़ा कारण कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर जारी हाई-प्रोफाइल धरना है। विख्यात शिक्षाविद सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं, जिसे सीजेपी का पूरा समर्थन हासिल है। इस आंदोलन के चलते जंतर-मंतर पर लगातार सियासी और सामाजिक जमावड़ा बढ़ रहा था। केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस इस संवेदनशील और राष्ट्रीय सुर्खियों में छाए आंदोलन को सही तरीके से हैंडल करने में पूरी तरह नाकाम रही। इस प्रदर्शन को जिस कूटनीतिक और पेशेवर अंदाज में संभाला जाना चाहिए था, उसमें लापरवाही बरती गई, जिससे केंद्र सरकार की काफी किरकिरी हुई।
दूसरा कारण: थानों में SHO की पोस्टिंग में मनमानी और भ्रष्टाचार के संगीन आरोप
वहीं, महकमे के भीतर जिस दूसरी वजह की सबसे ज्यादा गूंज है, वह है दिल्ली के थानों में स्टेशन हाउस ऑफिसर्स (SHOs) की पोस्टिंग में बड़े पैमाने पर चल रही मनमानी और भ्रष्टाचार के आरोप। पूर्व कमिश्नर संजय अरोड़ा ने थानों में कप्तानी बांटने के लिए बकायदा एक पारदर्शी इंटरव्यू बोर्ड और कूलिंग-ऑफ पीरियड की सख्त व्यवस्था बनाई थी ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जा सके। लेकिन सतीश गोलचा ने कार्यभार संभालते ही इस पारदर्शी सिस्टम को ठंडे बस्ते में डाल दिया और बिना किसी इंटरव्यू के मनमाने तरीके से एक के बाद एक कई थानों में एसएचओ की ट्रांसफर सूचियां जारी कर दीं। चर्चा है कि गृह मंत्रालय द्वारा बार-बार पारदर्शिता बरतने की हिदायत और रिमाइंडर्स दिए जाने के बावजूद इस प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया, जिससे नाराज होकर आखिरकार केंद्र को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा।
1993 बैच के प्रवीर रंजन और रोबिन हिबू का रास्ता साफ कटा
गृह मंत्रालय के इस चौंकाने वाले कदम से प्रभावित होने वाले अफसरों में सिर्फ सतीश गोलछा ही शामिल नहीं हैं, बल्कि महकमे के भीतर कई वरिष्ठ अफसरों के समीकरण भी पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। इस एक फैसले के बाद एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर के 1993 बैच के दो सबसे सीनियर आईपीएस अधिकारियों का दिल्ली पुलिस का मुखिया बनने का रास्ता हमेशा के लिए कट गया है। इनमें पहला नाम सीनियर आईपीएस अधिकारी प्रवीर रंजन का है, जो वर्तमान में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के महानिदेशक (DG) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
वहीं, दूसरा बड़ा नाम रोबिन हिबू का है, जो इस समय दिल्ली पुलिस में ही विशेष पुलिस आयुक्त के बेहद महत्वपूर्ण पद पर तैनात हैं। मूल रूप से अरुणाचल प्रदेश के निवासी रोबिन हिबू पूर्वोत्तर भारत से आने वाले एजीएमयूटी कैडर के बेहद लोकप्रिय और सम्मानित अधिकारी हैं। उन्होंने दिल्ली में पूर्वोत्तर के नागरिकों की सुरक्षा के लिए 'नार्थ ईस्ट सेल' (North East Cell) को स्थापित करने में ऐतिहासिक और बेहद अहम भूमिका निभाई थी। चूंकि ये दोनों ही अधिकारी नव-नियुक्त कमिश्नर अनुराग कुमार (1994 बैच) से एक बैच सीनियर हैं, इसलिए अब जूनियर अधिकारी के बॉस बनने के बाद इन दोनों दिग्गजों की दिल्ली पुलिस के शीर्ष पद पर ताजपोशी की सभी संभावनाएं और कयास पूरी तरह खत्म हो गए हैं।
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