ओलंपिक से राजनीति तक: पूर्व हॉकी कप्तान परगट सिंह को मिली पंजाब कांग्रेस की कमान
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ओलंपिक से राजनीति तक: पूर्व हॉकी कप्तान परगट सिंह को मिली पंजाब कांग्रेस की कमान

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने अपनी प्रदेश इकाई में एक बड़ा बदलाव किया है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद, पार्टी ने पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और तीन बार के विधायक परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है


क्या खेल के मैदान की तरह राजनीति की पिच पर भी कोई खिलाड़ी अपनी शानदार रणनीति से पार्टी को जीत दिला सकता है? पंजाब की सियासत में इन दिनों कुछ ऐसा ही सवाल चर्चा में है। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने पंजाब इकाई में एक बड़ा फेरबदल करते हुए पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है।

अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पार्टी हाईकमान ने यह बड़ा कदम उठाया है। आइए जानते हैं कि इस बदलाव के क्या मायने हैं और परगट सिंह के सामने कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियां हैं।

शीर्ष नेतृत्व का आभार और नई जिम्मेदारी

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद परगट सिंह ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का दिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, के.सी. वेणुगोपाल, पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट और सभी वरिष्ठ नेताओं का आभार जताया।

परगट सिंह ने अपने संदेश में लिखा, "मैं पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने के लिए कांग्रेस नेतृत्व का तहेदिल से धन्यवाद करता हूं। मैं पंजाब में कांग्रेस को मजबूत करने और अपने राज्य के लोगों की सेवा करने के लिए पूरी लगन और प्रतिबद्धता के साथ काम करूंगा।"

खेल के मैदान से राजनीति की पिच तक का सफर

61 वर्षीय परगट सिंह का राजनीतिक और खेल का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। राजनीति में आने से पहले वे देश के जाने-माने हॉकी खिलाड़ी रह चुके हैं। उन्होंने 1992 और 1996 के ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी भी की है। खेल की दुनिया में अपनी धाक जमाने के बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया। शुरुआत में वे शिरोमणि अकाली दल (SAD) में थे, लेकिन बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया।

वर्तमान में परगट सिंह जालंधर कैंट से तीन बार के विधायक हैं और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। उनकी पत्नी वरिंदर प्रीत कौर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि परगट खेल की पृष्ठभूमि से आते हैं और उन्होंने जीवन में जो भी किया है, पूरी दृढ़ता से किया है। उनका हमेशा से प्रयास सबको साथ लेकर चलने का रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि पंजाब की जनता बदलाव चाहती है और आगामी चुनावों में कांग्रेस को सत्ता में लेकर आएगी।

आंतरिक कलह को थामने की कोशिश

पार्टी हाईकमान द्वारा राजा वड़िंग को हटाए जाने के पीछे की मुख्य वजह पिछले कुछ हफ्तों से चल रही आंतरिक गुटबाजी थी। राज्य इकाई में चल रहे इस अंदरूनी कलह ने आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पार्टी के प्रचार अभियान को कमजोर कर दिया था, जिससे निपटने के लिए बदलाव करना जरूरी हो गया था। चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं, ऐसे में नए अध्यक्ष के सामने सभी नाराज नेताओं को मनाना और पार्टी में एकजुटता कायम करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

राज्य के कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने परगट सिंह को इस नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी है। सभी को उम्मीद है कि एक कद्दावर और बेबाक नेता के रूप में पहचाने जाने वाले परगट सिंह पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में कामयाब होंगे।

पंजाब में 'बदलाव' की उम्मीद और कांग्रेस का भविष्य

पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य की राजनीतिक हवा को भांपते हुए कांग्रेस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पार्टी एकजुट होकर मैदान में उतरे। परगट सिंह की छवि एक जुझारू और अनुशासित नेता की रही है, जो खेल के मैदान से लेकर सियासत तक अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़े हैं।

अब देखना यह होगा कि क्या परगट सिंह पंजाब की इस राजनीतिक उठापटक और गुटबाजी रूपी टर्बुलेंस को पार कर कांग्रेस को जीत की मंजिल तक पहुंचा पाते हैं या नहीं। फिलहाल, कांग्रेस कार्यकर्ताओं में इस नए बदलाव के बाद एक नई ऊर्जा जरूर देखने को मिल रही है।

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