GST में बड़ा बदलाव: अब गिरफ्तारी के अधिकार खत्म, पेनल्टी घटी और रिफंड हुआ ऑटोमैटिक!
x

GST में बड़ा बदलाव: अब गिरफ्तारी के अधिकार खत्म, पेनल्टी घटी और रिफंड हुआ ऑटोमैटिक!

इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य देश में टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (कर प्रशासन) को व्यापारियों और टैक्सपेयर्स के अनुकूल बनाना, कानूनी विवादों (Litigation) को कम करना और कारोबारियों पर कंप्लायंस के बोझ को हल्का करना है।


8 अक्टूबर को हुई 57वीं जीएसटी (GST) काउंसिल की बैठक में केंद्र सरकार और राज्यों ने मिलकर कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य देश में टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (कर प्रशासन) को व्यापारियों और टैक्सपेयर्स के अनुकूल बनाना, कानूनी विवादों (Litigation) को कम करना और कारोबारियों पर कंप्लायंस के बोझ को हल्का करना है। इन नए सुधारों से संकेत मिलता है कि सरकार अब टैक्स व्यवस्था को 'ट्रस्ट-बेस्ड' (भरोसे पर आधारित) बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

आइए जानते हैं कि जीएसटी काउंसिल की इस अहम बैठक में कौन-से बड़े फैसले लिए गए हैं और इनका व्यापार जगत पर क्या असर पड़ेगा।

गिरफ्तारी के अधिकार खत्म, अभियोजन की सीमा बढ़ी

व्यापारियों और कंपनियों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि काउंसिल ने जीएसटी अधिकारियों के 'गिरफ्तारी के अधिकार' (Power of Arrest) को खत्म करने की सिफारिश की है। इसके अलावा, क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन (आपराधिक अभियोजन) की मॉनेटरी लिमिट यानी सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

इसका सीधा मतलब यह है कि अब अपेक्षाकृत छोटे टैक्स विवादों में कारोबारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई या गिरफ्तारी का जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा। बड़ी और भारी रकम वाले मामलों में ही इस तरह के कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही, जीएसटी कानून के तहत तय न्यूनतम सजा को भी हटाने की सिफारिश की गई है। अब जुर्माने, सजा या दोनों का फैसला न्यायिक विवेक (Judicial Discretion) पर छोड़ा जाएगा। आर्थिक अपराधों को डीक्रिमिनलाइज करने की दिशा में इसे एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।

सामान्य पेनल्टी घटकर हुई ₹10,000

जीएसटी काउंसिल ने सामान्य पेनल्टी (General Penalty) को भी कम करने का प्रस्ताव दिया है। जिन मामलों में कोई खास पेनल्टी तय नहीं होती, वहां लगने वाले जुर्माने को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है।

सरकार का यह भी कहना है कि जो टैक्सपेयर्स देर से रिटर्न भरते हैं या फॉर्म भरने में छोटी-मोटी गलतियां करते हैं, उन्हें अब कई तरह के अलग-अलग दंड या जटिल समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके बजाय केवल रिकवरी, ब्याज और एक आनुपातिक पेनल्टी का ही प्रावधान होगा। इतना ही नहीं, काउंसिल ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि 10,000 रुपये से कम राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं किए जाएंगे। इन सभी उपायों का मकसद प्रक्रियागत छोटी-सी गलतियों के कारण होने वाले भारी-भरकम मुकदमों और परेशानियों से कारोबारियों को बचाना है।

फंसा हुआ इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) होगा अनलॉक

उद्योग जगत के लिए एक और बड़ी राहत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी है। काउंसिल ने 'इनवर्ड ड्यूटी स्ट्रक्चर' (Inverted Duty Structure) के तहत रिफंड के दायरे को बढ़ाने की सिफारिश की है। इसके तहत इनपुट सर्विसेज से जमा होने वाले आईटीसी के रिफंड की अनुमति दी जाएगी, जो 1 नवंबर 2026 से लागू होने वाले योग्य क्रेडिट पर लागू होगा।

यह सुधार उन सेक्टरों के लिए बहुत फायदेमंद है जहाँ कच्चे माल या सेवाओं पर जीएसटी दर, अंतिम उत्पाद पर लगने वाली दर से अधिक होती है। ऐसे में कंपनियों का वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) टैक्स क्रेडिट के रूप में फंस जाता है। इस बदलाव से कंपनियों की नकदी (Liquidity) में सुधार होगा और वे इस पूंजी का इस्तेमाल अपने बिजनेस के विस्तार और रोजगार सृजन में कर सकेंगी।

अब और तेज और ऑटोमैटिक होगा रिफंड

जीएसटी काउंसिल ने रिफंड की पूरी प्रक्रिया को ओवरहॉल (बदलाव) करने का प्रस्ताव रखा है। नई व्यवस्था के तहत, जोखिम-आधारित ऑटोमैटिक मेकैनिज्म के जरिए पात्र रिफंड दावों का 90% हिस्सा तुरंत मंजूर किया जा सकेगा। इसके लिए अनंतिम (Provisional) रिफंड की समयसीमा को 7 दिन से घटाकर सिर्फ 3 कार्य दिवस कर दिया गया है।

इसके अलावा, अतिरिक्त नकदी शेष (Excess Cash Balances) के रिफंड को भी ऑटोमैटिक किया जाएगा और रिफंड आवेदनों की पावती (Acknowledgement) मिलने की प्रक्रिया तेज होगी। जानकारों का मानना है कि यदि यह रिस्क-असेसमेंट सिस्टम सही तरीके से काम करता है, तो इससे कंपनियों का कैश फ्लो और बेहतर होगा।

सप्लायर की गलती पर खरीदारों को सुरक्षा

जीएसटी लिटिगेशन का एक बहुत बड़ा कारण यह होता था कि यदि कोई सप्लायर अपना टैक्स जमा नहीं करता था, तो उसका खामियाजा सामान खरीदने वाले (Bona fide buyer) को भुगतना पड़ता था और उसका आईटीसी अटक जाता था। इस समस्या के समाधान के लिए काउंसिल ने एक कमेटी का गठन किया है, जो खरीदारों को बचाने के लिए संरचनात्मक सुधारों की जांच करेगी। यह कमेटी तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। टैक्स एक्सपर्ट्स इसे एक स्वागत योग्य कदम मान रहे हैं।

फेसलेस असेसमेंट और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

सरकार आने वाले समय में एक से अधिक राज्यों में रजिस्टर्ड सीजीएसटी टैक्सपेयर्स के लिए 'फेसलेस टैक्स असेसमेंट' (Faceless Tax Assessment) शुरू करने की योजना बना रही है। इसका मकसद मानवीय दखल को कम करना और पूरी तरह से टेक्नोलॉजी तथा रिस्क-असेसमेंट पर निर्भर रहना है।

कुल मिलाकर, 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले ये अधिकांश नए सुधार भारतीय कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और भरोसेमंद बनाएंगे, जिससे देश में व्यापार करना और आसान हो जाएगा।

Read More
Next Story