
विविधता में एकता भारत का डीएनए, धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक : न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का संदेश
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6,000 से ज़्यादा सदस्यों और अलग-अलग धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि अमेरिका के संदर्भ में अक्सर ‘प्लूरैलिटी’ यानी बहुलता की बात की जाती है, जबकि भारत के संदर्भ में ‘विविधता में एकता’ की अवधारणा सामने आती है। उनके मुताबिक ये दोनों ही बातें भारत और अमेरिका की मूल प्रकृति का हिस्सा हैं।
Mohan Bhagwat in New York: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (29 अगस्त) को न्यूयॉर्क में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करते हुए भारत की सांस्कृतिक विविधता और वैश्विक भूमिका पर जोर दिया। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन कार्यक्रम में भागवत ने जोर देकर कहा विविधता में एकता भारत के DNA में है और इस बात पर ज़ोर दिया कि इसे "सेलिब्रेट किया जाना चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।"
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6,000 से ज़्यादा सदस्यों और अलग-अलग धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि अमेरिका के संदर्भ में अक्सर ‘प्लूरैलिटी’ यानी बहुलता की बात की जाती है, जबकि भारत के संदर्भ में ‘विविधता में एकता’ की अवधारणा सामने आती है। उनके मुताबिक ये दोनों ही बातें भारत और अमेरिका की मूल प्रकृति का हिस्सा हैं।
‘मानवता एक है’
आरएसएस चीफ ने कहा कि 'अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। हिंदू होने का मतलब यह मानना है कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं और हर इंसान की गरिमा एक समान है।'
भागवत ने कहा कि वे खुद कोई धार्मिक विद्वान नहीं हैं। जिस समाज में वे काम करते हैं, उसकी परंपरा मानती है कि धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है। सभी रास्ते ईश्वर तक जाते हैं।
‘हर राष्ट्र की एक जिम्मेदारी होती है’
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि राष्ट्र केवल भौगोलिक इकाइयां नहीं होते, बल्कि दुनिया के सामने उनकी एक जिम्मेदारी भी होती है। उन्होंने कहा, "स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि हर राष्ट्र को एक नियति पूरी करनी होती है। भारत को क्या नियति मिली है? भारत का काम है विविधता में एकता को महसूस करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना कि हम एक हैं। विविधता के कारण ही वह एकता और भी निखरती है।
'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में 39 राज्यों और 853 शहरों के लोग एक साथ आए; इसमें अलग-अलग यूनिवर्सिटीज़ के 250 से ज़्यादा छात्र और अमेरिका के 250 संगठन शामिल हुए।
भागवत के मुख्य भाषण से पहले, अलग-अलग धर्मों के नेताओं ने एकता, विविधता, दया, करुणा और एक-दूसरे की मदद करने की ज़रूरत के संदेश पर ज़ोर दिया।

