पाकिस्तान गैंगरेप केस: इशाक डार का पोता गिरफ्तार, क्रिप्टो विवाद आया सामने
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पाकिस्तान गैंगरेप केस: इशाक डार का पोता गिरफ्तार, क्रिप्टो विवाद आया सामने

पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार के पोते रज़ा डार पर दो विदेशी महिलाओं के अपहरण, $100k क्रिप्टो जबरन वसूली और गैंगरेप का गंभीर आरोप।


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Pakistan Foreign nationals Gang Rape: पाकिस्तान में दो विदेशी महिलाओं के कथित अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। जांचकर्ताओं ने अब इस बात की तफ्तीश शुरू कर दी है कि क्या इस पूरे मामले के पीछे करोड़ों डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी का कोई बड़ा विवाद था। ये मामला इसलिए भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि इस घटना का आरोपी कोई और नहीं बल्कि उप-प्रधानमंत्री इशाक डार का पोता है।


इस मामले में मुख्य आरोपियों में रज़ा डार का नाम शामिल है। न्यूज़ एजेंसी पीटीआई (PTI) ने पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि आरोपी रज़ा डार, पाकिस्तान के मौजूदा उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार का पोता है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने पाकिस्तान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रैंसम नहीं, क्रिप्टोकरेंसी और पासवर्ड चाहिए था' – पीड़िता का बयान
यह नया खुलासा तब हुआ जब कथित पीड़ितों में से एक, वेनेजुएला की नागरिक एस्ट्रिड गैब्रिएला रॉबिन्सन ब्राचो ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 164 के तहत एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया।

पाकिस्तानी मीडिया नेटवर्क 'एआरवाई न्यूज' (ARY News) के मुताबिक, एस्ट्रिड ने मजिस्ट्रेट को दिए अपने बयान में कई खौफनाक आरोप लगाए हैं:

लाहौर पहुंचते ही अपहरण: एस्ट्रिड और उसकी सहेली स्टेफनी एड्रियाना (नीदरलैंड्स की नागरिक) जैसे ही पाकिस्तान पहुंचीं, लाहौर के एक घर में हथियारबंद लोग जबरन घुस आए और दोनों को बंधक बना लिया।

क्रिप्टो एसेट्स पर थी नजर: हमलावरों ने पैसों के बजाय सीधे उस कंप्यूटर की मांग की जिसमें क्रिप्टोकरेंसी के एसेट्स थे। एस्ट्रिड ने बताया, "उन्होंने मुझसे पूछा कि पैसों वाला कंप्यूटर कहां है, तो मैंने उन्हें बताया कि वह हरे रंग के बैग में है।"

जान से मारने की धमकी: आरोपी रज़ा डार लगातार पैसों और क्रिप्टो के पासवर्ड की मांग कर रहा था। एक हमलावर ने एस्ट्रिड के सिर पर वार किया और धमकी दी, "अगर पैसे दे दिए तो जिंदा बचोगे, नहीं तो दोनों को जान से मार देंगे।"

बंधक बनाकर यौन उत्पीड़न और 1 लाख डॉलर की वसूली
पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उसने आरोप लगाया कि उसे जबरन ऊपर के एक बेडरूम में ले जाया गया, जहाँ दो पुरुषों ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया, जबकि एक आरोपी बाहर राइफल लेकर पहरा दे रहा था। पीड़िता ने कहा, "जब मैं रोने लगी तो वे हंस रहे थे, उन्होंने मुझे थप्पड़ मारे और चुप रहने को कहा।"

इसके बाद, रज़ा डार ने पीड़िता के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर उसके करीबियों से पैसे वसूलने की कोशिश की। शुरुआत में कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन बाद में दूसरी पीड़िता स्टेफनी की मां ने किसी तरह 1 लाख डॉलर ($100,000) का इंतजाम किया। रकम मिलते ही डार ने दोनों महिलाओं को उनके पासपोर्ट लौटाए और उन्हें कार में बैठाकर एयरपोर्ट की तरफ रवाना कर दिया।

कार क्रैश और पीड़ितों का रेस्क्यू
एस्ट्रिड के मुताबिक, एयरपोर्ट जाते समय उसने कार में रज़ा डार को फोन पर किसी से बात करते सुना, जिसमें सामने वाला कह रहा था कि "बॉस के निर्देश कुछ अलग हैं।" इसी बीच कार का एक्सीडेंट (क्रैश) हो गया, जिसका फायदा उठाकर दोनों विदेशी महिलाएं गाड़ी से कूदकर भागीं और सड़क पर शोर मचाया। वहां से गुजर रहे लोगों ने ट्रैफिक पुलिस को अलर्ट किया, जिसके बाद दोनों को रेस्क्यू किया गया।

सिंगापुर से शुरू हुई थी कहानी, 4 आरोपी पुलिस कस्टडी में
लाहौर की एक अदालत ने इस मामले के चार मुख्य आरोपियों रज़ा डार, हसन रज़ा, सिकंदर खान और साजिद अली को पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार और जबरन वसूली की गई रकम की बरामदगी अभी बाकी है। कोर्ट ने जांच जल्द पूरी करने का आदेश देते हुए अगली सुनवाई 8 जुलाई 2026 तय की है।

क्या है मामला:
जांचकर्ताओं के मुताबिक, इन दोनों विदेशी महिलाओं की मुलाकात रज़ा डार से अक्टूबर 2025 में सिंगापुर में एक क्रिप्टोकरेंसी प्रोजेक्ट पर काम करने के दौरान हुई थी। पुलिस का आरोप है कि डार ने ही उन्हें बिजनेस वीजा पर पाकिस्तान आने का न्योता दिया था। महिलाएं 29 जून 2026 को लाहौर पहुंची थीं, जिसके तुरंत बाद उनका अपहरण कर लिया गया।

पाकिस्तान छोड़ चुकी हैं पीड़ित महिलाएं?
न्यायिक सूत्रों और पत्रकार आबिद खान के हवाले से रिपोर्ट है कि मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराने के तुरंत बाद दोनों विदेशी महिलाएं सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान छोड़ चुकी हैं। अधिकारियों ने उनके वर्तमान ठिकाने को पूरी तरह गुप्त रखा है। जानकारों का कहना है कि यदि मुख्य पीड़ित देश से बाहर चली गई हैं, तो आने वाले समय में अभियोजन पक्ष (Prosecution) के लिए कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ मामला साबित करना काफी पेचीदा हो सकता है। फिलहाल दोनों के बयानों को सील कर मजिस्ट्रेट की कस्टडी में रखा गया है।


(एजेंसी इनपुट के साथ )

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