
राम मंदिर ट्रस्ट बैठक: चंपत राय का काम अब कृष्ण मोहन के हाथों में
राम मंदिर चंदा चोरी पर कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का बड़ा बयान। चंपत राय का इस्तीफा मंजूर, कृष्ण मोहन को अंतरिम कमान।
Ayodhya Ram Mandir Row: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी महा-विवाद के बीच 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' की अत्यंत महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक संपन्न हो गई है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने शुरुआत मंत्र पढ़कर की और बेहद भावुक लहजे में कहा कि यह बैठक अत्यंत असाधारण और दुखद परिस्थितियों में हुई है।
गोविंद देव गिरी महाराज ने देश के सामने यह स्वीकार किया कि इस घटना से पूरा ट्रस्ट आहत है। उन्होंने कहा, "राम मंदिर के लिए देश के लोगों ने अपने प्राणों, परिवारों और करियर तक की परवाह नहीं की, लेकिन अब उसी मंदिर में हुई चोरी से हम बेहद लज्जित और दुखी हैं। कितने करोड़ की चोरी हुई है, यह बाद की बात है।"
कृष्ण मोहन संभालेंगे चंपत राय का कामकाज, गोपाल राव ट्रस्ट से बाहर
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोषाध्यक्ष ने ट्रस्ट के भीतर हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल की आधिकारिक जानकारी दी:
इस्तीफे स्वीकार: पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है।
गोपाल राव पर गाज: इसके अलावा, ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को भी तत्काल प्रभाव से ट्रस्ट से पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
कृष्ण मोहन को कमान: चंपत राय के इस्तीफे के बाद अब उनके सारे कामकाज को अंतरिम तौर पर कृष्ण मोहन संभालेंगे। हालांकि, अभी नए स्थायी महासचिव के नाम का एलान नहीं हुआ है, लेकिन अस्थायी तौर पर कमान कृष्ण मोहन को सौंप दी गई है।
99 वर्षीय के. पारासरण ने संविधान पढ़कर दिखाया, कहा- 'कोई ऑप्शन नहीं है'
बैठक के भीतर के घटनाक्रम को साझा करते हुए गोविंद देव गिरी ने बताया कि देश के दिग्गज कानूनविद् और ट्रस्ट के नियमों का निर्माण करने वाले 99 वर्षीय के. पारासरण जी भी पूरे समय ऑनलाइन माध्यम से इस बैठक में उपस्थित थे। यह बैठक पूरे कोरम के साथ पूरी हुई।
बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफों को मान्य करने या न करने पर गहन विचार किया जाना था। लेकिन कानूनी दिग्गज के. पारासरण जी ने ट्रस्ट के संविधान को पढ़कर सुनाया और राह दिखाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार, कोई भी पदाधिकारी जैसे ही अपना त्यागपत्र देता है, वह स्वतः ही स्वीकृत हो जाता है। पारासरण जी ने कहा कि ट्रस्ट के पास इस्तीफे स्वीकार करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प या चारा ही नहीं है। इसके बाद चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया, हालांकि ट्रस्ट ने राम मंदिर निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान की सराहना करते हुए उनकी सेवाओं का अभिनंदन भी किया।
मीडिया के सामने लाया गया 2,800 कीमती वस्तुओं का 'गुप्त रजिस्टर'
समाज और सोशल मीडिया पर फैली उन खबरों पर भी कोषाध्यक्ष ने सफाई दी, जिनमें कहा जा रहा था कि दानपात्रों के कैश के अलावा मंदिर से कई कीमती वस्तुएं और सोने-चांदी के सामान भी चोरी हुए हैं।
इन आरोपों को सिरे से खारिज करने के लिए ट्रस्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सबूत के तौर पर कई महत्वपूर्ण और कीमती वस्तुएं मीडिया के सामने प्रस्तुत कीं। गोविंद देव गिरी ने बताया कि ट्रस्ट के पास 2,800 से अधिक कीमती वस्तुओं का एक विस्तृत और पुख्ता रजिस्टर मौजूद है, जिसमें हर एक सामान का पूरा लेखा-जोखा है। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि भविष्य में ट्रस्ट और अधिक सतर्कता, आधुनिक सुरक्षा तथा पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य करेगा।
'कारसेवकों पर गोली चलाने वाले हमें उपदेश न दें, अपराधियों को मिलेगी सजा'
कोषाध्यक्ष ने साफ किया कि कुछ नए अधिकारियों की नियुक्ति के लिए एक विशेष समिति बना दी गई है। ट्रस्ट की अगली बड़ी बैठक 22 जुलाई को होगी, तब तक विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने की पूरी उम्मीद है। एसआईटी की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद नए न्यासियों (Trustees) की नियुक्ति की घोषणा की जा सकती है। उन्होंने मांग की कि इस महापाप में शामिल हर एक अपराधी के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि, विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, "आज वे लोग हमें नैतिकता का उपदेश दे रहे हैं जिन्होंने कभी रामभक्त कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं। जो कभी राम के अस्तित्व को नहीं मानते थे, वे अचानक रामभक्त बनकर समाज को बांटने के लिए राजनीतिक माहौल बना रहे हैं। ऐसे लोगों के प्रलाप पर विश्वास मत कीजिए। अगर किसी श्रद्धालु को लगता है कि उनका भेजा सामान गायब है, तो वे सीधे ट्रस्ट से समय लेकर आएं और रजिस्टर चेक करें। देश धैर्य रखे, अपराधियों को सजा मिलेगी और रामराज्य आकर रहेगा।"
Next Story

