SIR पर दिल्ली में बवाल: नेहा बोरा समेत 700 से ज्यादा हिरासत में,  ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन
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SIR पर दिल्ली में बवाल: नेहा बोरा समेत 700 से ज्यादा हिरासत में, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर विरोध जताया।


मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहा विवाद अब सड़कों पर पहुंच गया है। गांधी जयंती के दिन 2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं ने प्रदर्शन किया, जबकि मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शिवाजी पार्क से अपना आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया।

दिल्ली में पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में पहुंचे। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 500 से 700 से अधिक बताई गई है। हिरासत में लिए गए प्रमुख लोगों में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और AAP नेता आतिशी, दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा शामिल हैं।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की है। उनका आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूचियों में हुए बदलावों से बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के बाहर होने का खतरा पैदा हुआ है। चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का उद्देश्य डुप्लीकेट, मृत, स्थानांतरित और अन्य अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना तथा योग्य मतदाताओं की सही सूची तैयार करना है।

पुलिस की रोक बेअसर
दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान छात्र और सामाजिक संगठनों की ओर से किया गया था। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण और RJD सांसद मनोज झा ने इससे पहले लोगों से 2 अक्टूबर को सुबह 11 बजे जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की थी। AAP के नेताओं ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया।

हालांकि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। पूरे नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने की जानकारी दी गई और जंतर-मंतर की तरफ जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग तथा अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई।

प्रदर्शन शुरू होने के बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर अलग-अलग थानों में पहुंचाया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोपहर तक 500 के आसपास लोगों को हिरासत में लिया गया था, जबकि बाद में यह संख्या 700 से अधिक हो गई।

इंटरनेट बंद, मेट्रो स्टेशनों पर भी असर
जंतर-मंतर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था का असर सामान्य आवाजाही पर भी पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक इलाके में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, करीब 1.5 किलोमीटर के दायरे में निलंबित करने का आदेश जारी किया गया।

इसके अलावा जंतर-मंतर और नई दिल्ली इलाके से जुड़े कई मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश-निकास प्रभावित हुआ। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी जंतर-मंतर रोड, संसद मार्ग, अशोक रोड और आसपास के रास्तों से बचने की सलाह दी।

मुंबई में CJP का अलग आंदोलन
दिल्ली के प्रदर्शन से अलग मुंबई में अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने शिवाजी पार्क में शाम 4 बजे ‘जेल भरो आंदोलन’ का आह्वान किया। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही की मांग कर रही है। संगठन ने कहा है कि उसका अभियान मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा और इसे अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा।

मुंबई में भी शिवाजी पार्क पर प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं मिली। मुंबई पुलिस ने कहा कि 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के कारण शिवाजी पार्क ‘साइलेंस जोन’ है और पुलिस वहां इस तरह के आयोजन की अनुमति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है। आयोजकों को वैकल्पिक स्थान तलाशने की सलाह दी गई थी।

CJP ने इसके बाद कार्यक्रम को ‘जेल भरो आंदोलन’ के रूप में आगे बढ़ाने की घोषणा की।

विवाद की जड़ में SIR और 13 करोड़ से ज्यादा नाम
मौजूदा विरोध की पृष्ठभूमि में सबसे बड़ा मुद्दा देशभर में चल रही मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया है।

बिहार से जून 2025 में शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से कुल मिलाकर 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर हुए। यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि ये आंकड़े ड्राफ्ट रोल से बाहर हुए नामों के हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि हर नाम को अंतिम रूप से या अवैध तरीके से मताधिकार से वंचित कर दिया गया। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद योग्य मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल किए जा सकते हैं।

SIR विवाद ने तब नया मोड़ लिया जब Indian Express की जांच में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर लिखित रूप से सवाल या आपत्तियां दर्ज की थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक ये आपत्तियां केवल SIR शुरू करने तक सीमित नहीं थीं। इनमें मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया, Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण, पश्चिम बंगाल में अपील से जुड़े मामलों और गोवा में योग्य मतदाताओं को शामिल करने जैसे विषय भी थे।

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