SIR विरोध पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: राहुल गांधी, चुनाव आयोग, केंद्र और दिल्ली पुलिस पर क्या कहा?
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SIR विरोध पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: राहुल गांधी, चुनाव आयोग, केंद्र और दिल्ली पुलिस पर क्या कहा?

SIR विरोध प्रदर्शनों, जंतर-मंतर पर पाबंदी और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।


चुनाव आयोग के खिलाफ SIR विरोधी प्रदर्शनों और दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च पर नाराजगी जताई, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को अलग-अलग मामलों में नोटिस जारी किए। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले की भी न्यायिक समीक्षा होगी।

राहुल गांधी के मार्च पर कोर्ट नाराज
12 अक्टूबर को राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं ने SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था। इस पर चार वकीलों की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को दबाव में नहीं लाया जा सकता।

अदालत ने राहुल गांधी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी के आचरण पर स्पष्टीकरण जरूरी है और उनकी याचिका पर नोटिस जारी करने का मतलब उनके आचरण को सही ठहराना नहीं है।

SIR पर चुनाव आयोग से जवाब तलब
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किया।

याचिका में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान कथित अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष ने स्वतंत्र ऑडिट, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच और बिना नोटिस मतदाताओं के नाम हटाने पर रोक की मांग की है।

अदालत ने इस याचिका को चुनाव आयोग से संबंधित अन्य लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया। फिलहाल SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने का कोई आदेश नहीं दिया गया है।

जंतर-मंतर पर केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस

सुनवाई का तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाना था। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि विरोध प्रदर्शन की जगह ऐसी होनी चाहिए, जहां सरकार तक प्रदर्शनकारियों की आवाज पहुंच सके। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि फैसला एक समिति की रिपोर्ट और दर्ज कारणों के आधार पर लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस आयुक्त से जवाब मांगा। अदालत यह जांच करेगी कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाते समय संबंधित अधिकारियों ने सभी पहलुओं पर उचित विचार किया था या नहीं।

CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
दिल्ली में हालिया प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई, हिरासत और आवाजाही पर प्रतिबंधों से संबंधित मामलों में भी अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को प्रदर्शनों से जुड़ी CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा। निजी पक्ष भी अपने पास मौजूद संबंधित रिकॉर्ड संरक्षित रख सकते हैं।

यह निर्देश पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के आरोपों की आगे जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के सामने फिलहाल तीन प्रमुख सवाल हैं—SIR प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता, विरोध प्रदर्शन पर प्रशासनिक पाबंदियों की कानूनी सीमा और विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट मार्च का आचरण।

अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगे हैं। इन मुद्दों पर अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।

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