
UPI पर 15 अक्टूबर से नहीं लगेगा नया चार्ज, सरकार ने क्यों टाला फैसला?
त्योहारी सीजन में कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ की आशंका के बीच NPCI ने MDR लागू करने की समयसीमा बढ़ाई, नई तारीख की घोषणा अभी बाकी।
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। यूपीआई (UPI) से भुगतान करने वाले कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई कारोबारी लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला टाल दिया है। यह शुल्क 15 अक्टूबर से लागू होना था। अब इसे दिवाली के बाद लागू किया जाएगा। हालांकि, नई तारीख की घोषणा नहीं हुई है।
त्योहारों को देखते हुए फैसला
NPCI ने मंगलवार को बताया कि यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारों के दौरान कारोबार पर संभावित असर को देखते हुए शुल्क टालने का निर्णय लिया है। इससे पहले द फेडरल ने 8 अक्टूबर को रिपोर्ट दी थी कि नई व्यवस्था 1 जनवरी 2027 तक टाली जा सकती है। हालांकि, NPCI ने फिलहाल जनवरी की तारीख की पुष्टि नहीं की है।
कितना लगना था चार्ज?
15 सितंबर को जारी नियमों के मुताबिक, दुकानदारों और कारोबारियों को 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR देना था।
75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम शुल्क 300 रुपये निर्धारित था। रेलवे, टेलीकॉम, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का निश्चित शुल्क प्रस्तावित था।
यह शुल्क ग्राहकों के बजाय कारोबारियों को देना था। व्यक्तिगत यूपीआई ट्रांसफर और छोटे व्यापारियों के अधिकांश भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहने थे।
व्यापारियों ने क्यों किया विरोध?
व्यापारी संगठनों ने त्योहारों और शादी के सीजन में अतिरिक्त शुल्क लगाने का विरोध किया था। उनका तर्क था कि इससे कारोबार की लागत बढ़ेगी और कम मुनाफे पर काम करने वाले दुकानदार प्रभावित होंगे।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने फैसले का स्वागत किया है। संगठन के प्रतिनिधियों ने 30 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर शुल्क लागू करने की तारीख पर पुनर्विचार की मांग की थी।
MDR लागू करने का उद्देश्य क्या है?
NPCI के मुताबिक, MDR से मिलने वाली रकम बैंकों, पेमेंट गेटवे और यूपीआई ऐप संचालकों के बीच बांटी जाएगी। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
फिलहाल प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था बरकरार है। सिर्फ इसे लागू करने की तारीख बदली गई है। नई तारीख पर NPCI की अगली घोषणा का इंतजार है।
