
दिल्ली में भीषण जल संकट: बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग
दिल्ली में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग; 'आप' का दावा– भाजपा ला रही टैंकर राज, कांग्रेस ने दोनों को घेरा, आरडब्ल्यूए बेहाल।
Nishpaksh: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस समय भीषण गर्मी के साथ-साथ पानी की किल्लत को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, वहीं इस गंभीर मुद्दे पर सियासत भी चरम पर है। 'द फेडरल देश' के विशेष कार्यक्रम 'निष्पक्ष' में वरिष्ठ पत्रकार नीलू व्यास के साथ आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और स्थानीय निवासियों (आरडब्ल्यूए) के प्रतिनिधियों ने इस समस्या पर खुलकर अपनी बात रखी और एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।
रात-रात भर जागने को मजबूर हैं दिल्लीवासी
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए वरिष्ठ पत्रकार नीलू व्यास ने दिल्ली के मौजूदा हालातों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों से ऐसी शिकायतें आ रही हैं जहां लोग रात भर सो नहीं पा रहे हैं। सुबह 3:00 बजे जब पानी आता है, तो लोगों को लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता है। पानी का प्रेशर इतना कम है कि बाल्टियां भरने में घंटों लग जाते हैं और कई जगहों पर पानी की क्वालिटी बेहद खराब और दूषित है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकारें पानी के लॉन्ग टर्म मैनेजमेंट प्लान को लेकर गंभीर क्यों नहीं हैं?
प्रशासन गायब है, 48 घंटे में मिल रहा है गंदा पानी: आरडब्ल्यूए
सामाजिक कार्यकर्ता और आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधि महेश कुमार ने बेगमपुर (वार्ड नंबर 27) और रोहिणी सेक्टर 22 के जमीनी हालात बयां किए। उन्होंने कहा:
"क्षेत्र में स्थिति बेहद गंभीर है। लोगों को 48 घंटे में एक बार पानी मिल रहा है और वह भी नाले जैसा गंदा और बदबूदार है। जगह-जगह पाइपलाइन लीक हैं। हम साल-भर से लिखित शिकायतें दे रहे हैं, ट्विटर और ईमेल के जरिए मुख्यमंत्री तक को टैग कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन पूरी तरह गायब है। अधिकारी सिर्फ रिसीविंग थमा देते हैं, पर काम कुछ नहीं होता।"
महेश ने यह भी बताया कि गंदे पानी के कारण सुबह स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ गया है और पूरे इलाके में दुर्गंध फैली रहती है।
टैंकर माफिया का राज वापस लाना चाहती है भाजपा: आम आदमी पार्टी
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता गुरदीप दत्ता ने दिल्ली की मौजूदा स्थिति के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो टैंकर माफिया 14 साल पहले सक्रिय था, उसे दोबारा वापस लाया जा रहा है। दत्ता ने कहा:
"भारतीय जनता पार्टी की सरकार जानबूझकर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में कृत्रिम कमी (Artificial Shortage) पैदा कर रही है ताकि टैंकर माफिया का राज वापस आ सके। केजरीवाल सरकार ने 12 साल में जो बुनियादी ढांचा खड़ा किया था और हर घर को 20 हजार लीटर मुफ्त पानी दिया था, आज उसे ध्वस्त किया जा रहा है।"
उन्होंने यह भी दावा किया कि रोहिणी के कई सेक्टरों में मोहल्ला क्लीनिक बंद कर दिए गए हैं और जल बोर्ड में इंजीनियर्स की भारी कमी है, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।
आप और भाजपा दोनों में इच्छाशक्ति की कमी, सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ा: कांग्रेस
कांग्रेस के प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही ने 'आप' और 'भाजपा' दोनों सरकारों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि चाहे मौजूदा सरकार हो या पूर्ववर्ती, दोनों में राजनीतिक इच्छाशक्ति की भारी कमी है। शाही ने आरोप लगाया:
"दावे किए जाते हैं कि पाइपलाइन बिछ गई हैं, लेकिन आज भी अंबेडकर नगर और ओखला जैसे इलाकों में टैंकरों पर लोग निर्भर हैं। दिल्ली जल बोर्ड में हजारों करोड़ का वारा-न्यारा हुआ है। जो लोग पहले इसके कर्ता-धर्ता थे, वे भ्रष्टाचार के आरोपों के डर से आज भाजपा में शामिल हो चुके हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश दोनों जगह भाजपा की सरकारें हैं, फिर भी दिल्ली को पूरा पानी नहीं मिल पा रहा है। सरकार के पास वाटर रिचार्ज सिस्टम और यमुना सफाई को लेकर कोई ठोस विजन नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली में दारू, कोका-कोला और पेप्सी की बॉटलिंग के लिए तो पर्याप्त पानी है, लेकिन जनता के पीने के लिए पानी नहीं है।
'द फेडरल देश' के 'निष्पक्ष' कार्यक्रम में यह बात साफ तौर पर निकलकर सामने आई कि दिल्ली का जल संकट अब महज एक मौसमी समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का नतीजा बन चुका है। जब तक सरकारें राजनीति से ऊपर उठकर वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉन्ग टर्म मैनेजमेंट पर काम नहीं करेंगी, तब तक दिल्ली की जनता इसी तरह बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर रहेगी।
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