'दागी जज' के खिलाफ कोलकाता हाईकोर्ट के वकील भी हुए एकजुट
जैसे दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर किए जाने का वकीलों ने विरोध किया था, वैसा ही कोलकाता हाईकोर्ट में भी देखा गया।;
कोलकाता हाईकोर्ट के वकीलों के तीन संगठनों ने प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया, जो उस पत्र के बाद आया जिसमें उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना से दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा को कलकत्ता हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की कोलेजियम की सिफारिश को वापस लेने का अनुरोध किया था।
जस्टिस के ट्रांसफर का विरोध क्यों?
कलकत्ता हाईकोर्ट के बार लाइब्रेरी क्लब, बार एसोसिएशन और इनकॉर्पोरेटेड लॉ सोसाइटी ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट से कलकत्ता हाईकोर्ट में जजों के स्थानांतरण को लेकर अदालत में प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया।
हाल ही में, इन तीनों संगठनों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि वह दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा के कलकत्ता हाईकोर्ट में स्थानांतरण की कोलेजियम की सिफारिश पर पुनर्विचार करें और इसे वापस लें।
calcutta-high-court-tainted-judge-hc-lawyersबार संगठनों की दलील
उनका कहना है कि कलकत्ता हाईकोर्ट को एक ऐसे न्यायाधीश को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिन पर गंभीर अनियमितता के आरोप हैं। बार संगठनों का आरोप है कि बार-बार कलकत्ता हाईकोर्ट को "दागी जजों का डंपिंग ग्राउंड" बनाया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कलकत्ता हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव शंकर प्रसाद दलपति ने कहा, "हमने देखा है कि समय-समय पर अन्य अदालतों के दागी जजों को कलकत्ता हाईकोर्ट भेजा गया है, जैसे कि जस्टिस सी.एस. कन्नन। ये दागी जज कचरे की तरह कलकत्ता हाईकोर्ट में डाले जा रहे हैं, इसलिए हम इसका विरोध कर रहे हैं। यह सामान्य स्थानांतरण नहीं है, बल्कि उन पर लगे आरोपों के कारण किया जा रहा है।"
जस्टिस शर्मा का तबादला और विवाद
जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा 1992 में दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे और 2003 में दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नत हुए थे। उन्होंने फरवरी 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।
उनका तबादला उस सिफारिश के बाद किया गया, जब 14 मार्च को जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की खबर आई थी। बताया गया कि एक मामूली आग लगने की घटना के दौरान दमकल कर्मियों ने एक स्टोररूम में नोटों के बंडल पाए, जिनमें से कुछ जले हुए थे। घटना के समय जस्टिस वर्मा और उनकी पत्नी भोपाल में थे।