लाभ का सौदा है रक्तदान, ये बातें जान लें तो मंगल ही मंगल
रक्तदान से जुड़े शोध बताते हैं कि ब्लड डोनेशन इतना सुरक्षित है कि जो लोग रक्तदान के समय स्वस्थ होते हैं, वे लंबे समय तक किसी गंभीर बीमारी से अस्वस्थ नहीं होते..
छोटी-सी निडिल और 450 मिलीलीटर रक्त, किसी अजनबी का जीवन बना लेते हैं...जो रक्तदान जैसा महादान करते हैं, वे जानते भी नहीं कि उनका ब्लड किस व्यक्ति की जान बचाने के काम आएगा। लेकिन रक्तदान के बाद एक अपार खुशी मिलती है। वहीं दूसरी ओर समाज में फैले संदेह और पुरानी भ्रांतियां अक्सर हमें रक्तदान जैसा कदम उठाने से रोकती हैं। आज के समय में जब अस्पतालों को नियमित नए यूनिट्स की आवश्यकता पड़ती है और रक्त की शेल्फ-लाइफ सीमित है तो ऐसे में रक्तदान केवल नैतिकता की बात नहीं रही, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा बन चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन( WHO) बताती है कि सुरक्षित, पर्याप्त खून के लिए नियमित और स्वैच्छिक दानदाता आधार आवश्यकता है।
रक्तदान से जुड़ी सबसे बड़ी खुशी
रक्तदान से जुड़े शोध बताते हैं कि ब्लड डोनेशन इतना सुरक्षित है कि जो लोग रक्तदान के समय स्वस्थ होते हैं, वे दान के बाद लंबे समय तक अस्वस्थ नहीं होते। शरीर 48 घंटे के अंदर तरल पदार्थ के जरिए रक्त की कांट-छांट पूरा कर लेता है और 4–8 हफ्तों में लाल रक्त कोशिकाएं वापस बन जाती हैं। इस सुरक्षा प्रोफाइल की कई ब्लड बैंक डाइरेक्टर और पैथोलॉजिस्ट पुष्टि कर रहे हैं। PMC+1
कुछ समस्याएं भी आम हैं
रक्तदान से होने वाले लाभ बहुत बड़े हैं। लेकिन यह भी सच है कि कुछ लोगों को सामान्य दिक्कतें हो सकती हैं, जैसे- वासोवैगल रिएक्शन्स (चक्कर आना, बेहोशी तक), स्थानीय चोट या हल्का ब्लीडिंग और कभी-कभी एलर्ज़िक लक्षण। साल 2025 की स्टडीज़ ने इन प्रतिक्रियाओं का पैटर्न बताया है कि अधिकांश मामलों में यह हल्का और अस्थायी होता है। लेकिन कुछ रिस्क फैक्टर्स (पहली बार रक्तदान, कम वजन, भय या निर्जलीकरण) इन्हें बढ़ा देते हैं। इसलिए कई केंद्र अब रक्तदान से पहले हाइड्रेशन और छोटे-मिनी स्क्रीनिंग को अनिवार्य कर रहे हैं, जिससे VVR की घटनाएं कम हुई हैं। Frontiers+1
प्लेटलेट्स और ब्लड स्टोरेज
पारंपरिक तौर पर प्लेटलेट्स की शेल्फ-लाइफ केवल 5 दिन थी। लेकिन नए शोध और तकनीकों जैसे, पैथोजन रिडक्शन सिस्टम और बेहतर कल्चर निगरानी, प्लेटलेट स्टोरेज बढ़ाने और स्टॉक-आउट घटाने में मदद कर रही हैं। अगर इन तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाया गया तो अस्पतालों में आपातकालीन किल्लत काफी कम हो सकती है। (संदर्भ: platelet storage और pathogen reduction रिसर्च)। PMC+1
रक्त की सुरक्षा का स्तम्भ
रक्त की सुरक्षा का अगला बुनियादी स्तम्भ है, गहन स्क्रीनिंग और परीक्षण। हालिया सर्वे और नेशनल डेटा दर्शाते हैं कि टीटीआई की दरें (HIV, HBV, HCV, सिफलिस) निरंतर मॉनिटर की जा रही हैं और कई जगहों पर घटती भी दिख रही हैं पर यह शून्य नहीं हुई हैं। इसलिए ब्लड बैंक-नीति और नैशनल प्रोटोकॉल को मजबूत रखना अनिवार्य है। मेडिकल-सिस्टम में जो नया काम चल रहा है, उसमें दाता-स्क्रीमिंग, NAT टेस्टिंग और मॉनिटरिंग का बड़ा योगदान माना जा रहा है। PMC +1
अगर आप सोचते हैं कि ऐसे कामों के लिए “मेरे पास समय नहीं” तो याद रखें कि दान की असली प्रक्रिया कम और आवश्यकता अधिक होती है। मात्र 8–10 मिनट में सैंपल से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं। पूरे विज़िट का समय लगभग एक घंटा। और उस एक घंटे से आप एक साथ कई जीवन बचा लेते हैं। कई जीवन इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि रक्त से प्लाज़मा, सीरम और ब्लड सेल्स अलग-अलग कर लिए जाते हैं। अर्थात हम बहुत बड़ी बात ना भी करें तो एक बार ब्लड डोनेट करके आप कम से कम तीन लोगों की जान बचा लेते हैं!
रिसर्च और ब्लड बैंक रिपोर्ट दोनों यही कहती हैं कि दाताओं की कमी ही सबसे बड़ी वजह है कि स्टॉक खाली रहता है और यह समस्या तब और गहरी हो जाती है, जब किसी विशेष ब्लड-ग्रुप की मांग अचानक बढ़ जाए। World Health Organization +1
नई रिसर्च, क्लासिक मिथकों को चुनौती
उम्र सीमा पर लचीलापन: कई देशों में बड़ी आयु वाले लोगों को भी रक्तदान करने की छूट मिली हुई है। इसमें सबसे बड़ी शर्त यही है कि ये लोग पिछले वर्षों में स्वस्थ रहे हों।
दवाइयां और दान: अधिकांश सामान्य दवाइयां रक्तदान कराने में बाधा नहीं हैं बनतीं। केवल कुछ खास दवाइयों के साथ रोक है और यह बात डॉक्टर्स-टेस्ट के माध्यम से पता लगा लेते हैं।
संक्रमण का डर: रक्तदान के समय उपयोग में ली जाने वाली सुईयां नई और स्टरल होती हैं। रक्त परीक्षण बहुत कठोर हैं और ट्रांसफ्यूज़न-सी संबंधित संक्रमण का जोखिम बेहद कम है पर पूरी तरह शून्य नहीं। इसलिए स्क्रीनिंग आवश्यक है। PMC
आसान होगा जीवन बचाना
विश्व स्वास्थ्य संगठन और कई राष्ट्रीय एजेंसियां 100% स्वैच्छिक और अनपेड रक्तदान के लक्ष्य पर जोर दे रही हैं। इसका कारण साफ़ है कि स्वैच्छिक दाता समूह में TTIs की प्रचलन दर सबसे कम पाई गई है और यह ब्लड सप्लाई की सबसे भरोसेमंद नींव है। तुम्हारे शहर की छोटी-सी दान मुहिम अगर नियमित हो जाए तो अस्पतालों की आपूर्ति और रोगियों की जान बचाना दोनों आसान हो सकते हैं।
- इसलिए अगर आप स्वस्थ हैं और रक्तदान के लिए आवश्यक आयु/वज़न पूरा करते हैं तो दान पर विचार करें।
- दान से पहले पानी खूब पिएं और हल्का नाश्ता करें। इससे रक्तदान के बाद चक्कर या बेहोशी की आशंका बहुत कम होती है।
- टीकाकरण, हालिया टैटू या पियर्सिंग, कुछ दवाइयां, इन बातों की जानकारी पहले से दें।
- लोकल ब्लड बैंक की प्लेटलेट टेक्नोलॉजी और शेल्फ-लाइफ के बारे में जिज्ञासु बनें। यह जानने से आपकी दान प्राथमिकता बदल सकती है।
डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।