एक पेड़ की जगह कम पौधे? दिल्ली सरकार के पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव पर उठे सवाल

Delhi Tree Cutting: दिल्ली सरकार का वृक्ष संरक्षण कानून में बदलाव का प्रस्ताव कई पर्यावरणविदों को चिंतित कर रहा है. उनका मानना है कि इससे पेड़ों की संख्या घटेगी, हरियाली कम होगी और दिल्ली की जलवायु और पर्यावरण को बड़ा नुकसान हो सकता है.;

Update: 2025-08-29 10:11 GMT

Delhi Green Cover: दिल्ली सरकार ने वृक्ष संरक्षण अधिनियम (1994) में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. लेकिन इस पर पर्यावरण प्रेमियों और ग्रीन एक्टिविस्ट्स ने नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि यह प्रस्ताव दिल्ली की हरियाली को नुकसान पहुंचा सकता है. पर्यावरण कार्यकर्ताओं का मानना है कि विकास जरूरी है. लेकिन उसकी आड़ में पेड़ों की बलि नहीं चढ़नी चाहिए. सरकार अगर एक पेड़ की कटाई के बदले कम पौधे लगाने की योजना बना रही है तो यह बिल्कुल गलत है.

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है. उन्होंने सुझाव दिया कि पेड़ काटने से पहले उनकी स्थिति का मूल्यांकन किया जाए. जहां संभव हो, पेड़ों को काटने के बजाय स्थानांतरित किया जाए. विदेशी पेड़ों जैसे विलायती कीकर को धीरे-धीरे हटाया जाए और उसकी जगह देशी पौधे लगाए जाएं.

पेड़ काटना आसान, लगाना मुश्किल

Social Action for Forest and Environment संस्था से जुड़े विक्रांत तोंगड ने बताया कि अगर बिना रोकटोक के पेड़ काटे गए तो जल्द ही दिल्ली का हरित क्षेत्र बहुत घट जाएगा. उनका कहना है कि आर्किटेक्ट्स, बिल्डर और टाउन प्लानर को भी अपनी योजनाओं में बड़े पेड़ों को बचाने की कोशिश करनी चाहिए.

ग्रीन एक्टिविस्ट्स का मानना है कि अक्सर एक पेड़ की कटाई के बदले 10 पौधे लगाने का दावा किया जाता है. लेकिन असल में या तो पौधे नहीं लगाए जाते या उनकी देखभाल नहीं होती. यहां तक कि कई बार पेड़ों की जगह सिर्फ झाड़ियां लगा दी जाती हैं, जो गिनती में तो आती हैं, लेकिन पेड़ों का काम नहीं करतीं. उनका कहना है कि अगर जगह नहीं मिल रही तो जहां पुराने पेड़ सूख गए हों, वहां नए पौधे लगाए जा सकते हैं. पौधों की संख्या कम करना समाधान नहीं है.

दिल्ली का हरित क्षेत्र और रिज ज़ोन की स्थिति

दिल्ली का कुल क्षेत्रफल: 1,483 वर्ग किमी

हरित क्षेत्र (2023 तक): 25.03%

दिल्ली में हरित क्षेत्र में तो कुछ बढ़ोतरी हुई है, लेकिन चिंता का विषय यह है कि अब भी 60% से अधिक हरित क्षेत्र में विलायती कीकर फैला है, जो जैव विविधता के लिए हानिकारक माना जाता है. रिज क्षेत्र चार हिस्सों में बंटा है — नॉर्दर्न रिज, साउदर्न रिज, सेंट्रल रिज और साउदर्न-सेंट्रल रिज. यह अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के अधीन है, जिससे इसका प्रबंधन और संरक्षण कठिन हो जाता है. दिल्ली में तीन साल में हरित क्षेत्र बढ़ा है, लेकिन यह वास्तविक पेड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि आंकड़ों में दिखाया गया विस्तार हो सकता है. नई दिल्ली में सबसे ज्यादा यानी 0.90 वर्ग किमी घना जंगल घटा है. जबकि दक्षिणी दिल्ली में उतना ही बढ़ा भी है.

इन जिलों में घटा घना वन क्षेत्र

1. पूर्वी दिल्ली

2. नई दिल्ली

3. उत्तर-पश्चिम दिल्ली

4. शाहदरा

5. दक्षिण-पूर्व दिल्ली

6. पश्चिमी दिल्ली

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