भारत अब सार्क से अधिक तरजीह बिम्सटेक को क्यों दे रहा है? जानें- वजह

क्या भारत अब सार्क से अधिक तरजीह बिम्सटेक को दे रहा है। ऐसा है तो उसके पीछे वजह क्या है। बता दें कि बैंकॉक में चार अप्रैल को बिम्सटेक सम्मेलन होने जा रहा है।;

By :  Lalit Rai
Update: 2025-04-03 11:33 GMT
चार अप्रैल को बिम्सटेक सम्मेलन में शामिल होंगे पीएम नरेंद्र मोदी- फाइल फोटो

BIMSTEC News: भारत ने सार्क को पीछे छोड़ते हुए अब अपना फोकस बिम्सटेक पर केंद्रित कर लिया है। सार्क की निष्क्रियता का प्रमुख कारण पाकिस्तान की मौजूदगी रही है, जिसके चलते कई बाधाएं उत्पन्न होती रही हैं। विशेष रूप से, 2016 के उरी हमले के बाद से कोई सार्क सम्मेलन आयोजित नहीं हुआ है। इस पृष्ठभूमि में, भारत बिम्सटेक को अधिक सक्रिय मंच के रूप में देख रहा है, जो क्षेत्रीय सहयोग और विकास को गति दे सकता है।

बिम्सटेक शिखर सम्मेलन 2024

बंगाल इनिशिएटिव फॉर सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकॉनोमिक कोऑपरेशन (BIMSTEC) का छठा शिखर सम्मेलन 4 अप्रैल को बैंकॉक में आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन से पहले 2 अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और 3 अप्रैल को विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए गुरुवार को बैंकॉक के लिए रवाना होंगे।

इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय 'समृद्ध, लचीला और खुला बिम्सटेक' रखा गया है, जो क्षेत्रीय एकीकरण और आर्थिक सहयोग के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सम्मेलन का उद्देश्य सात सदस्य देशों—बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड—के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

मुख्य एजेंडा और पहल

शिखर सम्मेलन के दौरान, 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन घोषणापत्र को अपनाया जाएगा, जिसमें नेताओं के दृष्टिकोण और निर्देशों को हाइलाइट किया जाएगा। साथ ही बैंकॉक विजन 2030 के तहत पहला रणनीतिक रोडमैप तैयार किया जाएगा, जो भविष्य में सहयोग को मजबूती प्रदान करेगा। इसके अलावा, सभी सदस्य देश समुद्री परिवहन सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसका उद्देश्य बंगाल की खाड़ी में व्यापार और यात्रा को बढ़ावा देना है।

बिम्सटेक का महत्व और उद्देश्य

वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में, बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी में सहयोग के लिए एक प्रमुख क्षेत्रीय मंच के रूप में उभर रहा है। यह संगठन पांच दक्षिण एशियाई और दो दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ मिलकर अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर है।

बिम्सटेक, जिसकी स्थापना 1997 में हुई थी, अब तक पांच शिखर सम्मेलन आयोजित कर चुका है—बैंकॉक (2004), नई दिल्ली (2008), नेपीडॉ (2014), काठमांडू (2018), और कोलंबो (2022)। संगठन सात प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है:

कृषि और खाद्य सुरक्षा

कनेक्टिविटी

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन

लोगों से लोगों का संपर्क

विज्ञान और प्रौद्योगिकी

सुरक्षा

व्यापार और निवेश

इसके अलावा, आठ उप-क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें ब्लू इकोनॉमी, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य शामिल हैं।

भारत की भूमिका और नेतृत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का बिम्सटेक शिखर सम्मेलन संगठन की रणनीतिक दिशा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत, जो बिम्सटेक के चार संस्थापक सदस्यों में से एक है, क्षेत्रीय सहयोग में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।भारत बिम्सटेक सचिवालय के बजट में सबसे बड़ा योगदानकर्ता (32%) है और दो महत्वपूर्ण बिम्सटेक केंद्रों की मेजबानी करता है—बिम्सटेक मौसम और जलवायु केंद्र (नोएडा, उत्तर प्रदेश) और बिम्सटेक ऊर्जा केंद्र (बेंगलुरु)। इसके अलावा, भारत कृषि, आपदा प्रबंधन और समुद्री परिवहन में उत्कृष्टता के तीन नए केंद्र स्थापित करने की भी योजना बना रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिम्सटेक को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने 2016 में गोवा में बिम्सटेक नेताओं की रिट्रीट की मेजबानी की और 2022 के 5वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में एक मिलियन डॉलर के वित्तीय अनुदान की घोषणा की थी। जुलाई 2024 में भारत ने बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की रिट्रीट का आयोजन किया, जिसमें अंतरिक्ष सहयोग और आपसी आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

बिम्सटेक बनाम चीन का प्रभाव

भारत ने बिम्सटेक को प्राथमिकता देने का निर्णय केवल सार्क की निष्क्रियता के कारण नहीं लिया है, बल्कि यह चीन के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने की रणनीति का भी हिस्सा है। बंगाल की खाड़ी के आसपास चीन के बढ़ते प्रभुत्व को संतुलित करने के लिए भारत इस मंच का उपयोग कर रहा है। यदि भारत बिम्सटेक का नेतृत्व प्रभावी ढंग से करता है, तो सदस्य देशों के लिए चीन के प्रभाव में आना कठिन होगा। इससे भारत को न केवल बिम्सटेक बल्कि व्यापक एशिया क्षेत्र में भी नेतृत्व करने का अवसर मिलेगा।

भारत और बिम्सटेक सदस्य देशों के संबंध

भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और बिम्सटेक में सबसे प्रभावशाली आर्थिक शक्ति है। इस मंच का उपयोग करके भारत अपनी पूर्वी सीमा से सटे देशों के साथ मजबूत संबंध स्थापित कर सकता है, जिससे चीन को चुनौती दी जा सकेगी। यदि इन देशों के साथ भारत के संबंध मजबूत होते हैं, तो वे चीन की तुलना में भारत को प्राथमिकता देंगे और वहां चीनी परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले अपने हितों पर विचार करेंगे।

भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी, एक्ट ईस्ट पॉलिसी और सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) विजन बिम्सटेक देशों के साथ उसके मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाते हैं। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, और भारत की प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करेगी कि बिम्सटेक एक सक्रिय मंच के रूप में विकसित हो, जो साझा-समृद्ध भविष्य के लिए संस्कृतियों और अर्थव्यवस्थाओं के बीच सामंजस्य स्थापित कर सके।

Tags:    

Similar News