भूकंप म्यांमार में आया तो फिर थाईलैंड क्यों थर्राया?, पूरी वजह जानिए
म्यांमार में भूकंप में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नुकसान का अनुमान भी डराने वाला है। भूकंप का केंद्र म्यांमार में ही था, लेकिन असर थाईलैंड तक हुआ।;
भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में जो भयानक भूकंप आया, उसने थाईलैंड तक तबाही मचा दी। इन दोनों देशों से जो तस्वीरें आ रही हैं, वो बेहद डराने वाली हैं। ऐसे में ये समझना जरूरी है कि आखिर म्यांमार में इतना बड़ा भूकंप कैसे आया? इस जलजले से कितना नुकसान हुआ है? और ये भूकंप कितना अलार्मिंग है।
कितना बड़ा भूकंप?
म्यामांर में शुक्रवार को भूकंप ने इस देश के क्या हाल कर दिए हैं, ये वहां से आ रही तस्वीरों में देखा जा सकता है। शुक्रवार को म्यांमार के मांडले क्षेत्र में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया जोकि बहुत बड़ा भूकंप कहा जा रहा है।
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक़ म्यांमार में भूकंप के पहले झटके के 12 मिनट के बाद ही दूसरा झटका आया। दूसरे भूकंप की तीव्रता 6.4 थी। इस लिहाज से देखें तो दोनों ही बड़े भूकंप थे, जिन्होंने म्यांमार में हर तरफ तबाही मचा दी है।
इसका नतीजा ये हुआ कि इमारतें गिर गईं। सड़कें टूट गईं। पुल टूट गए। इस आपदा में कितने लोग मारे गए, फिलहाल इसका अनुमान लगा पाना मुश्किल है।
म्यांमार को गहरे जख्म
अनुमान लगाना इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि म्यांमार में भूकंप की तीव्रता बहुत ज्यादा थी। इसलिए माना जा रहा है कि उससे हुई तबाही का लेवल भी बहुत व्यापक होगा। लेकिन जो अनुमान लग रहे हैं, उससे इतना तो पता चल रहा है कि म्यांमार को इतना नुकसान हुआ है कि इससे उबरने में उसे लंबा वक्त लग जाएगा।
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने शुक्रवार को एक अनुमान लगाया कि इस आपदा में मरने वालों की संख्या दस हजार से एक लाख के बीच भी हो सकती है। कहा जा रहा है कि इसका आर्थिक प्रभाव म्यांमार पर बहुत ज्यादा पड़ सकता है।
अनुमान है कि इस भूकंप से म्यांमार की कुल जीडीपी का 70% तक नुकसान हो सकता है। इस भूकंप से बाकी आधारभूत ढांचे को कितना नुकसान पहुंचा है, इसका तो फिलहाल कोई हिसाब ही नहीं है।
जमीन के नीचे बड़ी हलचल है
अब ये समझ लेते हैं कि आखिर म्यांमार में इतना बड़ा भूकंप कैसे आया? दरअसल इसकी बड़ी वजह है म्यांमार की लोकेशन। जानकारों का कहना है कि म्यांमार दो टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा पर स्थित है। यही नहीं, म्यांमायर भूकंप के लिहाज से दुनिया के सबसे सक्रिय देशों में से एक है। 7.7 तीव्रता का भूकंप कोई कम नहीं होता।
पहले 7.7 तीव्रता और फिर 6.4 तीव्रता के दो बड़े भूकंपों ने म्यांमार में बेहिसाब तबाही मचा डाली। वहां से आ रही तस्वीरों को देखकर तो ऐसा लग रहा है कि म्यांमार के बहुत से इलाकों में कुछ भी साबुत नहीं बचा है।
क्या म्यांमार तैयार था?
अब सवाल ये है कि ऐसी किसी संभावित आपदा की म्यांमार की कितनी तैयारी थी? दरअसल म्यांमार के इस इलाके में आखिरी बड़ा भूकंप 1956 में आया था। इसीलिए यहां के घरों को ताकतवर भूकंप को झेलने लायक नहीं बनाया गया। इसीलिए म्यांमार में नुकसान अनुमान से कहीं ज्यादा हो सकता है
म्यांमार में इससे पहले जो भूकंप आए, वो ज्यादातर पश्चिमी इलाके में आए। शुक्रवार को जो भूकंप आया वो देश के मध्य भाग में आया
थाईलैंड में इतना नुकसान क्यों?
म्यांमार भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील देश है, इसलिए वहां बड़े भूकंप का आना कोई असामान्य बात नहीं है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि थाईलैंड, जिसे आमतौर पर भूकंप ज़ोन में नहीं माना जाता, वहां इतनी तबाही कैसे हुई?
थाईलैंड में जो हुआ, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। भूकंप के झटकों से पूरा देश हिल गया। राजधानी बैंकॉक में गगनचुंबी इमारतें कांपने लगीं, रूफटॉप स्विमिंग पूल से पानी झरने की तरह गिरने लगा। हर तरफ अफरातफरी और चीख-पुकार मच गई।
सबसे भयावह दृश्य तब देखने को मिला जब एक निर्माणाधीन 30 मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई और मलबे में तब्दील हो गई। दुनिया भर के सैलानियों की पसंदीदा जगह बैंकॉक में शुक्रवार को जो दहशत फैली, वैसी पहले कभी नहीं देखी गई।
थाईलैंड में इतनी तबाही क्यों हुई?
थाईलैंड को भूकंप प्रभावित क्षेत्र नहीं माना जाता, शायद यही कारण है कि वहां की इमारतों के निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक को अधिक महत्व नहीं दिया जाता। जबकि म्यांमार में अपेक्षाकृत अधिक भूकंप आते हैं, इसलिए वहां की संरचनाएं कुछ हद तक ऐसे झटकों के लिए तैयार होती हैं।
शुक्रवार को थाईलैंड में महसूस किए गए भूकंप के झटकों की असली वजह भी म्यांमार था। भूकंप का केंद्र म्यांमार के मांडले शहर के पास था, लेकिन वहां हुई भूगर्भीय हलचल का असर सैकड़ों मील दूर बैंकॉक तक महसूस किया गया।
थाईलैंड में लोग इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं के आदी नहीं हैं, इसलिए जब भूकंप के झटके महसूस हुए, तो वहां अफरा-तफरी मच गई और नुकसान भी ज्यादा हुआ।