
नामांकन के बाद विजय का बड़ा आरोप: 'जन नायकन' को रोकने की 'संयुक्त साजिश'
तिरुचि ईस्ट से नामांकन भरने के बाद थलपति विजय ने कहा- 'जन नायकन' को चुनाव में हथियार बनने से रोकने के लिए विरोधियों ने रची है साजिश, जनता से मांगा न्याय।
तीन महीने की लंबी खामोशी के बाद, तमिल सुपरस्टार और 'तमिझगा वेत्री कज़गम' (TVK) के प्रमुख विजय ने आखिरकार अपनी आखिरी फिल्म 'जन नायकन' (Jana Nayagan) को लेकर चल रहे विवाद पर चुप्पी तोड़ी है। गुरुवार (2 अप्रैल) को तिरुचि ईस्ट (Tiruchi East) निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के तुरंत बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए, विजय ने आरोप लगाया कि शक्तिशाली ताकतों ने फिल्म की रिलीज को रोकने के लिए एक "संयुक्त साजिश" रची है। उन्हें डर था कि 23 अप्रैल को होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले यह फिल्म एक "शक्तिशाली हथियार" बनकर उभर सकती है।
'जन नायकन' का अनिश्चित भविष्य और सेंसर बोर्ड का पेच
निर्देशक एच. विनोद द्वारा निर्देशित 'जन नायकन' को राजनीति में पूर्णकालिक प्रवेश से पहले विजय की अंतिम फिल्म के रूप में पेश किया गया था। मूल रूप से इसे 9 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होना था, लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने अब तक इसे हरी झंडी नहीं दी है। बोर्ड ने फिल्म की दोबारा जांच की मांग की थी, जिसके बाद फिल्म की टीम ने तत्काल मंजूरी के लिए चेन्नई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
हालांकि, कानूनी लड़ाई तब और जटिल हो गई जब सीबीएफसी (CBFC) ने मामले में अपील कर दी, जिससे प्रक्रिया और लंबी खिंच गई। सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बोर्ड ने कथित तौर पर फिल्म के राजनीतिक संवादों को लेकर चुनाव आयोग से परामर्श किया। आशंका जताई गई कि फिल्म के संवाद मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे इसकी रिलीज अधर में लटक गई।
विजय का सीधा हमला: "यह एक राजनीतिक साजिश है"
तिरुचि ईस्ट में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए विजय ने इस देरी को केवल एक प्रमाणन प्रक्रिया की बाधा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक चाल करार दिया। उन्होंने कहा, "वे इस डर से एकजुट होकर साजिश रच रहे हैं कि फिल्म 'जन नायकन' इस चुनाव में सबसे बड़ा हथियार बन सकती है। मेरे साथ हुए अन्याय के लिए, मैं आपके पास न्याय और निष्पक्षता की उम्मीद लेकर आया हूँ।"
विजय ने भावुक अंदाज में आगे कहा, "अगर मैं आपसे मौका नहीं मांगूंगा, तो किससे मांगूंगा? मेरे पास वह अधिकार है। वे सोचते हैं कि हमारी आखिरी फिल्म चुनाव में एक बड़ा हथियार बन जाएगी, इसलिए यह संयुक्त साजिश रची जा रही है। मैं, जो आपके लिए न्याय मांगने आया हूँ, आज खुद न्याय की गुहार लगा रहा हूँ।" विजय ने सीधे तौर पर सीबीएफसी या केंद्र सरकार का नाम नहीं लिया, लेकिन "दलों" पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सभी आपके विजय का विरोध करने के लिए एक हो गए हैं।
"न DMK पर भरोसा करें, न BJP पर"
नामांकन दाखिल करने के बाद विजय ने अपने अभियान की धार तेज कर दी है। चुनाव अधिकारी मुथु मुरुगेसन पांडियन के सामने नामांकन पत्र भरने के बाद, उन्होंने तिरुचि मरक्कडई में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और फिर एक भव्य रोड शो किया। अपने भाषण में उन्होंने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पर तीखा हमला बोला और द्रमुक (DMK) को "आधा खादी गठबंधन, आधा भगवा गठबंधन" बताया। यह द्रमुक और भाजपा के बीच कथित गुप्त संबंधों पर उनका कटाक्ष था।
विजय ने मतदाताओं से कहा, "न द्रमुक पर भरोसा करें, न भाजपा पर। लेकिन आप मुझ पर 100 फीसदी भरोसा कर सकते हैं।" उन्होंने गैस योजनाओं, पेट्रोल की कीमतों, नीट (NEET) उन्मूलन और रोजगार सृजन पर द्रमुक के अधूरे वादों की सूची गिनाई। उन्होंने छोटे व्यवसायों को प्रभावित करने वाली गैस सिलेंडर की कमी और शहरी विकास में व्यापक भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया।
नौकरशाही की सावधानी या राजनीतिक तोड़फोड़?
'जन नायकन' विवाद जनवरी की शुरुआत से ही सुलग रहा है। प्रशंसक और आलोचक सवाल उठा रहे थे कि विजय ने अब तक इस पर चुप्पी क्यों साधे रखी। कई लोगों का मानना था कि उन्हें फिल्म के प्रमोशन के दौरान ही बोलना चाहिए था। टीवीके (TVK) के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि चुनाव का शोर थमने के बाद अप्रैल के अंत तक फिल्म पर्दे पर आ सकती है।
राजनीतिक विश्लेषक कनियप्पन एलंगोवन ने 'द फेडरल' को बताया, "लाखों लोगों को आकर्षित करने वाले अभिनेता विजय ने अब धीरे-धीरे अपना राजनेता वाला चेहरा दिखाना शुरू कर दिया है। भाजपा और द्रमुक के बीच अप्रत्यक्ष गठबंधन का उनका आरोप जनता के बीच पकड़ बना सकता है। फिल्मी अंदाज में विजय खुद को मासूम के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि सत्ताधारी और पूर्व सत्ताधारी दलों को 'विलेन' के रूप में चित्रित कर रहे हैं। उनके प्रशंसक इस अंदाज को काफी पसंद करेंगे।"
तमिलनाडु चुनाव 2026: एक नया मोड़
विजय के इस आक्रामक रुख ने तमिलनाडु चुनाव 2026 के समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है। 'जन नायकन' की रिलीज रुकना अब केवल एक सिनेमाई मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य का एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन चुका है। थलपति के समर्थक अब इस फिल्म की रिलीज को अपनी 'जीत' के रूप में देख रहे हैं, जबकि विरोधी खेमा इसे विजय की राजनीतिक नौटंकी करार दे रहा है। तिरुचि की सड़कों पर लगा 'न्याय' का नारा अब पूरे तमिलनाडु में गूँजने लगा है।
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