
असम चुनाव में ‘बाहरी’ लोगों की एंट्री पर बवाल: विपक्ष ने दी ‘बिहार जैसे वोट चोरी’ की चेतावनी
दिसपुर से कांग्रेस उम्मीदवार ने दावा किया कि कुछ लोगों ने मतदाताओं की व्यवस्था करने की पेशकश की और एक कैबिनेट मंत्री का नाम भी लिया। भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है।
गुरुवार (9 अप्रैल) को होने वाले हाई-प्रोफाइल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले असम में कथित तौर पर बड़ी संख्या में “बाहरी” लोगों के आने के आरोपों ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। जहां विपक्ष ने “बिहार जैसे हालात” की चेतावनी दी है, वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन दावों को बेबुनियाद बताया है।
क्या गैर-स्थानीय मतदाता वोट डालेंगे?
कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने आरोप लगाया है कि गैर-स्थानीय या “फर्जी” मतदाताओं को हवाई और सड़क मार्ग से राज्य में लाया जा रहा है, ताकि चुनाव परिणामों को प्रभावित किया जा सके।
उनका कहना है कि यह स्थिति पिछले साल बिहार जैसी है, जहां उनके आरोप के अनुसार भाजपा ने “बाहरी” मतदाताओं की मदद से चुनाव जीता और कुल पंजीकृत मतदाताओं से अधिक वोट डाले गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असम में उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंच रहे हैं, जिनमें से कई को अपने निर्वाचन क्षेत्र या मतदान केंद्र तक की जानकारी नहीं है।
‘असम में बिहार और यूपी के वोट नहीं चाहिए’
दिसपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार मीरा बोरठाकुर गोस्वामी ने कहा कि उन्होंने खुद ऐसे लोगों को देखा, जो मतदाताओं की व्यवस्था करने की पेशकश कर रहे थे।
उन्होंने कहा,“जिस बात का हमें डर था, वही सच साबित हो रहा है। एक धीरज सिंह नाम के व्यक्ति, जिसने खुद को आईआईटी गुवाहाटी से बताया, मुझसे पूछा कि क्या मुझे अपने लिए वोटरों की जरूरत है। मैंने कहा कि दिसपुर के लोग ही मुझे वोट देंगे। लेकिन उसने कहा कि अगर मुझे वोट चाहिए तो वह व्यवस्था कर सकता है। यह क्या बकवास है? तीन लोग मेरे पास आए थे, लेकिन मैंने साफ कर दिया कि मेरे पास उनसे बात करने का समय नहीं है। मुझे बिहार और यूपी के वोट नहीं चाहिए। मीडिया में भी खबरें आ रही हैं कि वहां से लोग आ रहे हैं।”
उन्होंने चुनाव आयोग और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए और सतर्कता बरतने की मांग की।
“पुलिस कहां है? लोगों को आने क्यों दिया जा रहा है? चुनाव आयोग कहां है? मैं असम के लोगों से कहना चाहती हूं कि बिहार मॉडल यहां लागू किया जा रहा है। जो हम पहले से कह रहे थे, वह अब सच हो रहा है। जो व्यक्ति किसी भी मतदान केंद्र का मतदाता नहीं है, वह यहां कैसे वोट दे सकता है? मैं लोगों से अपील करती हूं कि कड़ी निगरानी रखें, ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति राज्य के किसी भी हिस्से में वोट न डाल सके,” उन्होंने ‘द फेडरल’ से कहा।
कांग्रेस उम्मीदवार ने यह भी दावा किया कि जिन लोगों ने चुनाव में मदद की पेशकश की, उन्होंने बताया कि उन्हें राज्य के कैबिनेट मंत्री अशोक सिंघल ने भेजा है।
गौरव गोगोई ने भी उठाया मुद्दा
असम कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई, जो इस चुनाव में विपक्ष का नेतृत्व कर रहे हैं, ने भी इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया।
उन्होंने कहा,“विभिन्न रिपोर्ट्स और मीडिया आउटलेट्स में यह सामने आया है कि बिहार से आने वाली बड़ी संख्या में बसें असम के अलग-अलग हिस्सों में देखी गई हैं। इससे असम के लोगों के बीच सवाल खड़े हो गए हैं।”
उन्होंने आगे कहा,“इस समय जन जागरूकता बेहद जरूरी है। खासकर मतदान केंद्रों के आसपास क्या हो रहा है, इस पर कड़ी नजर रखना जरूरी है। क्योंकि जब नागरिक सतर्क और जागरूक रहेंगे, तभी हमारा लोकतंत्र मजबूत रहेगा।”
कई जिलों में दिखी ऐसी गतिविधियां
असम कांग्रेस के मीडिया सचिव गोपाल चंद्र शर्मा ने कहा कि ऐसी गतिविधियां कई जिलों में देखी गईं, खासकर लोअर असम में।
उन्होंने कहा,“हां, ऐसे वाहन पूरे असम में देखे गए, खासकर लोअर असम के जिलों में। ‘वोट चोरी’ को लेकर जो हम पहले आरोप लगा रहे थे, वह अब सच साबित हो रहा है। लोगों ने खुद यह देखा है।”
उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी के ‘स्थानीय पहचान की रक्षा’ के दावे पर भी सवाल उठाए।
“जो पार्टी ‘जाति, माटी और भेती’ (समुदाय, भूमि और आधार) की बात करती थी, वही अब बाहरी लोगों के वोट से चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम समझौते के क्लॉज 6 को लागू कर स्थानीय लोगों को संवैधानिक सुरक्षा देने की बात कही थी, लेकिन इस बार उनकी मंशा की सच्चाई सामने आ गई है,” गोपाल ने कहा।
पिछले साल महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा जैसे राज्यों में कथित वोट चोरी को लेकर भारी विवाद हुआ था, जिसके चलते कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का चुनाव आयोग और केंद्र की भाजपा सरकार के साथ टकराव हो गया था, खासकर बिहार चुनाव से पहले।
चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने भी चिंता जताई है।
‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं’
एक वरिष्ठ पत्रकार ने, नाम न बताने की शर्त पर कहा,“यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं है। चुनाव आयोग सत्तारूढ़ पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है।”
उन्होंने आगे कहा,“इस समय राज्य में विपक्ष मजबूत है। एकजुट विपक्ष के कारण वोट बंटेंगे नहीं। ऐसी स्थिति में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) को केवल 50-55 सीटें मिलेंगी। इसलिए वे अनुचित तरीकों का सहारा ले रहे हैं। इससे एनडीए अपनी सीटें बढ़ाकर लगभग 60 तक पहुंचा सकता है।”
विश्लेषकों ने उठाए सवाल
उत्तर-पूर्व के राजनीतिक विश्लेषक प्रसेनजीत बिस्वास ने सवाल उठाया कि बिना मतदाता सूची में नाम शामिल हुए ऐसे लोग वोट कैसे डाल सकते हैं।
उन्होंने कहा,“वे असम में वोट कैसे दे सकते हैं? उनके नाम मतदाता सूची में होने चाहिए।”
चुनाव वाले राज्य में मतदाताओं की संख्या 2021 के मुकाबले 15.21 लाख बढ़ी है। 2026 में कुल मतदाता 2,49,58,139 हैं, जो पांच साल पहले 2,34,36,864 थे।
बिस्वास ने आरोपों पर विस्तार से कहा,“बिहार और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में मतदाताओं को असम चुनाव में वोट डालने के लिए लाने का आरोप ‘वोट चोरी’ का हिस्सा है। कुछ चालाक तरीकों से ऐसे मतदाताओं को असम के अलग-अलग हिस्सों में लाया जाता है, जिसके पीछे संदिग्ध मंशा नजर आती है।”
उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों की उचित जांच से इस हेरफेर के तरीके और उद्देश्य का पता चल सकता है।
भाजपा ने आरोपों को नकारा
हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जो लोग आ रहे हैं, वे असली मतदाता हैं।
असम भाजपा के प्रवक्ता अमल नारायण पटोवारी ने कहा,“वे असम के ही निवासी हैं, लेकिन बिहार और यूपी में काम करते हैं। वे यहां वोट डालने आते हैं और फिर वापस चले जाते हैं। यहां ‘वोट चोरी’ का कोई सवाल ही नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा,“मीडिया से बातचीत के दौरान वे असमिया भाषा में बात कर रहे थे। फिर उन्हें बाहरी कैसे कहा जा सकता है?”

