असम चुनाव 2026: बीपीएफ-बीजेपी की बढ़त, बोडोलैंड में यूपीपीएल अकेली पड़ी
x
बीपीएफ, जिसका नेतृत्व हाग्रामा मोहिलारी (बाएं) कर रहे हैं, 2025 के बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) चुनावों में शानदार वापसी के बाद मजबूत स्थिति में है; वहीं अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद प्रमोद बोरो के नेतृत्व वाली यूपीपीएल के लिए हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। (फोटो: X|@PramodBoroBTR|@bpfront)

असम चुनाव 2026: बीपीएफ-बीजेपी की बढ़त, बोडोलैंड में यूपीपीएल अकेली पड़ी

2025 BTC चुनावों में वापसी के बाद हाग्रामा मोहिलारी की बीपीएफ बीटीआर में एनडीए की अगुवाई कर रही है, जबकि यूपीपीएल को एंटी-इंकम्बेंसी और कमजोर आधार से जूझना पड़ रहा है।


Click the Play button to hear this message in audio format

9 अप्रैल को होने वाले असम विधानसभा चुनाव से पहले बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (BTR) में मुकाबला एकतरफा होता नजर आ रहा है। जहां बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) और बीजेपी गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है, वहीं यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।

कोकराझार, उदालगुड़ी, बक्सा और चिरांग जैसे जिलों में इस चुनाव को पिछले पांच साल के कामकाज पर जनमत के रूप में देखा जा रहा है। बोडो जनजाति सुरक्षा मंच (BJSM) के कार्यकारी अध्यक्ष दाओराव देखरेब नरजरी ने दावा किया कि बीपीएफ निर्णायक जीत की ओर बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीपीएल “झूठे वादों और गलत कामों” के कारण जनता का भरोसा खो चुकी है, जिससे बीपीएफ को फिर से मजबूत होने का मौका मिला है।

बीपीएफ का पलड़ा भारी

हाग्रामा मोहिलारी के नेतृत्व में बीपीएफ 2025 BTC चुनावों में 40 में से 28 सीटें जीतकर मजबूत वापसी कर चुकी है। अब पार्टी बीटीआर की 15 विधानसभा सीटों में से 11 पर एनडीए के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ रही है, जबकि बीजेपी बाकी चार सीटों पर मैदान में है।

कई सीटों पर बीपीएफ ने मजबूत स्थानीय नेताओं को उतारा है। कोकराझार (ST) से सेवली मोहिलारी मैदान में हैं, जबकि सभाराम बसुमातरी, रबीराम नरजरी और रिहोन दैमरी जैसे नेता अपने स्थानीय प्रभाव के दम पर चुनाव लड़ रहे हैं।

पार्टी नेताओं का कहना है कि जमीन पर उन्हें अच्छा समर्थन मिल रहा है। बीपीएफ के उपाध्यक्ष प्रबीन बोरो ने कहा कि पिछले पांच साल में यूपीपीएल के कामकाज से लोग असंतुष्ट हैं, खासकर अधूरे विकास कार्यों और अधूरी उम्मीदों को लेकर।

यूपीपीएल के सामने चुनौतियां

यूपीपीएल के लिए हालात कठिन नजर आ रहे हैं। पार्टी, जो एनडीए सरकार का हिस्सा थी और पिछली विधानसभा में उसके सात विधायक थे, अब सीट बंटवारे को लेकर मार्च में गठबंधन से अलग होने के बाद अकेले चुनाव लड़ रही है।

यूपीपीएल अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद प्रमोद बोरो तामुलपुर (ST) सीट से बीजेपी के वरिष्ठ नेता बिस्वजीत दैमरी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा लॉरेंस इस्लारी (कोकराझार) और दिपेन बोरो (उदालगुड़ी) भी मैदान में हैं।

हालांकि, कई इलाकों से मिली प्रतिक्रिया बताती है कि 2020 से 2025 के बीच BTC में अपने कार्यकाल को लेकर पार्टी को जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। 2025 BTC चुनावों में खराब प्रदर्शन ने भी उसकी स्थिति कमजोर कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपीपीएल के लिए क्षेत्र में एक-दो सीटों से ज्यादा जीत पाना मुश्किल हो सकता है।

बीजेपी और कांग्रेस की स्थिति

बीजेपी फिलहाल अपनी गठबंधन रणनीति पर ध्यान दे रही है। बीटीआर में केवल चार सीटों पर चुनाव लड़ते हुए वह बोडो वोटरों के बीच बीपीएफ के मजबूत आधार पर निर्भर है। यूपीपीएल के अलग चुनाव लड़ने से वोटों का बंटवारा होने की संभावना है, जिसका फायदा एनडीए को मिल सकता है।

कांग्रेस इस क्षेत्र में कमजोर स्थिति में है। हालांकि उसने अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन उसके पास मजबूत संगठन या कोई प्रमुख बोडो चेहरा नहीं है। कुछ मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में ही उसके लिए सीमित संभावनाएं नजर आती हैं।

कुल मिलाकर, बीटीआर में मुकाबला मुख्य रूप से बीपीएफ-एनडीए गठबंधन और यूपीपीएल के बीच है, जिसमें फिलहाल बीपीएफ-बीजेपी गठबंधन को स्पष्ट बढ़त दिखाई दे रही है।

एनडीए को यूबीपीओ का समर्थन

यूनाइटेड बोडो पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (UBPO) के सहायक महासचिव सोनी बोरो ने कहा कि संगठन ने जनवरी 2020 में हुए तीसरे बोडो शांति समझौते को लागू करने के हित में एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गठबंधन क्षेत्र में बहुमत हासिल करेगा।

बीपीएफ-बीजेपी गठबंधन के पक्ष में माहौल बनता दिख रहा है, लेकिन अंतिम नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि मतदान के दिन बीटीआर के मतदाता किस तरह फैसला करते हैं।

Read More
Next Story