बंगाल में बदली भाजपा की चाल, क्या इस बार मिलेगी कामयाबी?
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बंगाल में बदली भाजपा की चाल, क्या इस बार मिलेगी कामयाबी?

2021 की हार के बाद भाजपा ने बंगाल में रणनीति बदली है। अब कल्याण योजनाओं, स्थानीय संस्कृति और सॉफ्ट प्रचार के जरिए चुनावी समीकरण साधने की कोशिश है।


पश्चिम बंगाल में आक्रामक लेकिन अंततः असफल चुनावी अभियान के पांच साल बाद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। यह बदलाव विचारधारा में नहीं, बल्कि तरीके में है। पार्टी ने अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की कल्याणकारी योजनाओं की आलोचना करने के बजाय उसी आधार पर प्रतिस्पर्धा करने का रास्ता चुना है और बेहतर लाभ देने के वादे कर रही है। साथ ही, भाजपा ने अपने हिंदुत्व एजेंडे को भी नया रूप दिया है, जिसमें राम-केंद्रित आक्रामक धार्मिक अपील के बजाय बंगाली हिंदू सांस्कृतिक प्रतीकों को शामिल किया गया है।

एक और बड़ा बदलाव यह है कि इस बार भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत हमले काफी कम कर दिए हैं। 2021 के चुनाव में इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनाम ममता बनर्जी की सीधी टक्कर के रूप में पेश किया गया था, जो रणनीतिक रूप से गलत साबित हुआ था।

2021 की हार से सबक

यह बदलाव 2021 की हार से मिले सबक का नतीजा है। उस समय ध्रुवीकरण, केंद्रीय नेतृत्व के प्रचार और ममता बनर्जी पर सीधे हमलों के बावजूद भाजपा अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी। पार्टी के अंदरूनी सर्वे और जिला इकाइयों से मिले फीडबैक में यह सामने आया कि कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की नाराजगी, स्थानीय जुड़ाव की कमी, ममता के पक्ष में सहानुभूति और उम्मीदवार चयन में खामियां हार के प्रमुख कारण थे।

कल्याणकारी योजनाओं पर यू-टर्न

भाजपा की नई रणनीति का सबसे अहम हिस्सा कल्याणकारी योजनाओं को लेकर बदला रुख है। 2021 में पार्टी ने “लक्ष्मी भंडार” योजना की आलोचना करते हुए इसे मुफ्तखोरी बताया था। लेकिन अब वही भाजपा इन योजनाओं से अधिक लाभ देने का वादा कर रही है।राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि सत्ता में आने पर “अन्नपूर्णा योजना” के तहत महिलाओं को 3,000 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। वहीं, युवाओं के लिए “युवा शक्ति” योजना लाने की भी तैयारी है, जिसमें बेरोजगारों को अधिक आर्थिक सहायता देने की बात कही जा रही है।

ममता पर कम, अभिषेक पर ज्यादा हमला

इस बार भाजपा ने ममता बनर्जी पर सीधे हमले कम करते हुए टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाना शुरू किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि अगर टीएमसी फिर सत्ता में आई तो “भतीजा राज” स्थापित हो जाएगा।

हिंदुत्व का नया स्वरूप

भाजपा ने अपने सांस्कृतिक संदेश में भी बदलाव किया है। “जय श्री राम” जैसे नारों पर जोर देने के बजाय अब काली, दुर्गा और स्थानीय देवी-देवताओं का उल्लेख कर बंगाल की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने की कोशिश की जा रही है। कोलकाता में हाल ही में हुई रैली में मंच को दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तर्ज पर सजाया गया, जो इस रणनीति का संकेत था।

उम्मीदवार चयन में बदलाव

2021 में भाजपा ने टीएमसी से कई नेताओं को शामिल कर चुनाव लड़ाया था, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष पैदा हुआ। इस बार पार्टी ने अधिक सावधानी बरतते हुए टीएमसी से आए नेताओं को टिकट देने से परहेज किया है। साथ ही, भाजपा अपने राज्य और केंद्रीय नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की कोशिश कर रही है, ताकि एकजुट और प्रभावी चुनाव अभियान चलाया जा सके।

कुल मिलाकर, भाजपा इस बार पश्चिम बंगाल में अधिक स्थानीय, संतुलित और रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बदली हुई रणनीति पार्टी को सफलता दिला पाती है या नहीं।

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