
कोयंबटूर में मोदी यात्रा से दूर रहे अन्नामलाई, सीट बंटवारे में असंतोष
AIADMK द्वारा भाजपा को केवल 27 सीटें दिए जाने के बीच, स्पष्ट रूप से असंतुष्ट के अन्नामलाई ने एक सशक्त संदेश दिया, जो एक तरह से असंतोष का संकेत माना जा रहा है...
AIADMK द्वारा भाजपा को केवल 27 सीटें दिए जाने के बीच, स्पष्ट रूप से असंतुष्ट के अन्नामलाई ने एक सशक्त संदेश दिया, जो एक तरह से असंतोष का संकेत माना जा रहा है, उसमें के. अन्नामलई ने रविवार (29 मार्च) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए आयोजित हाई-प्रोफाइल एयरपोर्ट कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। जबकि आधिकारिक स्वागत सूची में उनका नाम प्रमुख रूप से शामिल था।
इस स्पष्ट उपेक्षा ने भाजपा-एआईएडीएमके गठबंधन के भीतर चर्चाओं को तेज कर दिया है, खासकर तब जब तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने हैं। अन्नामलाई के करीबी सूत्रों ने पुष्टि की कि वे सीट बंटवारे को लेकर “बेहद नाराज” हैं। उनका मानना है कि भाजपा को 234 में से केवल 27 सीटें मिलना एक कमजोर सौदा है।
प्रधानमंत्री मोदी दोपहर के आसपास कोयंबटूर पहुंचे, जहां से वे पलक्कड़ में भाजपा रैली के लिए रवाना हुए। उनका स्वागत कई वरिष्ठ नेताओं ने किया, जिनमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेन्द्रन (Nainar Nagendran), केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन, पूर्व एआईएडीएमके मंत्री SP वेलुमनी और भाजपा की राष्ट्रीय महिला मोर्चा नेता व विधायक वानाथी श्रीनिवासन शामिल थे।
हालांकि, अन्नामलाई उसी दिन कोयंबटूर में मौजूद होने के बावजूद एयरपोर्ट पर नजर नहीं आए, जो उनकी नाराजगी को और स्पष्ट करता है।
अंदरूनी असंतोष गहराया
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बहिष्कार सीधे तौर पर भाजपा-एआईएडीएमके गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर बढ़ते असंतोष से जुड़ा है। पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई को उम्मीद थी कि उन्हें कोयंबटूर के सिंगानल्लूर जैसे मजबूत क्षेत्रों से चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। लेकिन एआईएडीएमके ने भाजपा को केवल कोयंबटूर नॉर्थ सीट दी, जो अंततः वानाथी श्रीनिवासन को मिली।
सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई ने पार्टी नेतृत्व से कम से कम दो जीतने योग्य सीटों की मांग की थी। जब अंतिम आवंटन उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हुआ तो उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया और सक्रिय प्रचार गतिविधियों से भी दूरी बना ली।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे एआईएडीएमके नेतृत्व के फैसले से “गहराई से असंतुष्ट” हैं और इसे गठबंधन में उनकी भूमिका को कमतर करने के रूप में देख रहे हैं। उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन भी किए, जिनमें पलानी में एल. मुरुगन का घेराव शामिल है, जो पश्चिमी तमिलनाडु में भाजपा कार्यकर्ताओं के भीतर उभरते असंतोष को दर्शाता है।
‘प्रिय भाई’ बताते हुए प्रतिक्रिया
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब कुछ सप्ताह पहले ही अन्नामलाई ने राज्य अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद चुनाव प्रबंधन की भूमिका भी छोड़ दी थी, जिससे उनके हाशिए पर जाने की अटकलें और तेज हो गईं।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए वानाथी श्रीनिवासन ने कहा, “अन्नामलाई का नाम स्वागत सूची में था। लेकिन वे नहीं आए। मैं अपने थंबी (छोटे भाई) अन्नामलाई से पूछ रही हूं कि क्या हुआ।”
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी है और वरिष्ठ नेता पीयूष गोयल के तमिलनाडु दौरे के बाद विचार-विमर्श किया जाएगा। जबकि उम्मीदवारों की घोषणा दिल्ली से ही होगी।
“अन्नामलाई हमारे प्रिय भाई हैं,” उन्होंने कहा, उनकी अनुपस्थिति को कम महत्व देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है।
अन्नामलाई बनाम सेंथिल बालाजी
के. अन्नामलाई के करीबी सूत्रों के अनुसार, कोयंबटूर साउथ सीट से उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी डीएमके टिकट पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं। पहले इस बात पर चर्चा थी कि अन्नामलाई को सीधे उनके खिलाफ उतारकर एक हाई-प्रोफाइल मुकाबला कराया जाए।
हालांकि, हालिया घटनाक्रम और प्रधानमंत्री के स्वागत कार्यक्रम के बहिष्कार के बाद, ऐसे मुकाबले की संभावना मजबूत नहीं दिख रही है। अन्नामलाई ने अपने समर्थकों के लिए कम से कम एक-दो सीटों की मांग की थी। लेकिन यह मांग भी पूरी नहीं होती दिख रही।
सूत्रों का दावा है कि गठबंधन के भीतर कई वरिष्ठ नेता उनके खिलाफ एकजुट हो गए हैं। इसके बावजूद, अन्नामलाई ने सार्वजनिक रूप से संतुलित रुख बनाए रखा है और खुलकर कोई नाराजगी जाहिर नहीं की है। चेन्नई में हाल ही में पीयूष गोयल के साथ बैठक में उन्होंने कथित तौर पर पार्टी नेतृत्व को भरोसा दिलाया कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, वे उसे स्वीकार करेंगे और एक समर्पित कार्यकर्ता की तरह काम करेंगे।
युवाओं में पकड़
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अन्नामलाई की तमिलनाडु में युवाओं के बीच मजबूत पकड़ है और वे पार्टी सीमाओं से परे जाकर भी युवा मतदाताओं को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। यह खास तौर पर तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब अभिनेता से नेता बने विजय एक बड़े युवा चेहरे के रूप में उभर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा को चुनाव प्रचार में अन्नामलाई की लोकप्रियता का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहिए।
सीट बंटवारे की दिलचस्प तस्वीर
इस सीट बंटवारे की एक खास बात यह है कि एआईएडीएमके नेतृत्व ने तमिलनाडु भाजपा के अधिकांश वरिष्ठ नेताओं के लिए प्रमुख सीटों का अस्थायी आवंटन पहले ही कर दिया है (हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी भाजपा हाईकमान की ओर से होनी बाकी है)।
चेन्नई की मायलापुर सीट तमिलिसै सौंदरराजन (Tamilisai Soundararajan) को, कोयंबटूर साउथ वानाथी श्रीनिवासन को, अविनाशी एल मुरुगन को, सथुर नैनार नागेन्द्रन को और नागरकोइल पॉन राधाकृष्णन को दी गई है।
इस परिदृश्य में अन्नामलाई की असंतोष की आवाज केंद्रीय नेतृत्व तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पाई है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि उनकी आलोचना एआईएडीएमके के साथ पहले से चले आ रहे मतभेदों और असंतोष का परिणाम है। हालांकि, यह स्पष्ट केवल चुनाव परिणाम आने के बाद ही होगा कि अन्नामलाई की नाराजगी कितनी वास्तविक है।
एआईएडीएमके द्वारा भाजपा को केवल 27 सीटें दिए जाने के बीच, अन्नामलाई का सार्वजनिक रूप से अलग रहना जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के मनोबल और संगठनात्मक एकजुटता पर भी सवाल खड़े करता है।

