
असम की चुनावी लड़ाई, हिमंता की पत्नी पर आई : विदेशी संपत्ति और पासपोर्ट को लेकर कांग्रेस के गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया है कि रिनिकी भुइयां शर्मा के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं, जिस पर हिमंत बिस्वा सरमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस के बीच की राजनीतिक टशन तीखी हो गई है। असम विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ चार दिन बाकी हैं। ऐसे में रविवार (5 अप्रैल) को चुनाव प्रचार ने नया मोड़ ले लिया, जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए।
कांग्रेस के आरोप
खेड़ा ने दावा किया कि रिनिकी के पास संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र और एंटीगुआ और बारबुडा जैसे देशों से जुड़े कई विदेशी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज हैं, जिससे भारत के नागरिकता कानूनों के पालन पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि उनके पास विदेशों में बड़े निवेश हैं, जिनमें अमेरिका में हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी और दुबई में रिहायशी संपत्तियां शामिल हैं।
खेड़ा का कहना है कि इन संपत्तियों का खुलासा 9 अप्रैल के चुनाव से पहले चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे में नहीं किया गया।
चुनाव आयोग जाने की तैयारी
खेड़ा ने इस मुद्दे को पारदर्शिता और चुनावी नियमों के पालन से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी चुनाव आयोग के पास जाएगी और हिमंत बिस्वा सरमा की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग करेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी इन दस्तावेजों की सच्चाई पर सार्वजनिक रूप से सफाई देने की मांग की।
साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी चुनाव प्रचार के बाकी दिनों में भी इस मुद्दे को मतदाताओं के बीच उठाती रहेगी।
हिमंता का जवाब—मानहानि का केस करेंगे
इन आरोपों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने इन्हें “दुर्भावनापूर्ण, झूठा और राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया।
उन्होंने कांग्रेस पर चुनाव से ठीक पहले हताशा में ऐसे आरोप लगाने का आरोप लगाया।
सरमा ने कहा कि वे और उनकी पत्नी 48 घंटे के भीतर पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और दीवानी मानहानि का मुकदमा दर्ज करेंगे।
उन्होंने न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि बीजेपी असम में स्पष्ट बहुमत के साथ फिर से सत्ता में लौटेगी।
असम में 9 अप्रैल को मतदान से पहले जैसे-जैसे चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है, यह विवाद पहले से ही कड़े मुकाबले वाले चुनाव को और ज्यादा तीखा बना रहा है।

