
तमिलनाडु में नकदी पर सख्ती का असर : व्यापारी, किसान और आम लोग सबसे ज्यादा प्रभावित
₹50,000 की नकद सीमा तय रहने के कारण छोटे व्यवसाय, पशु बाजार और अस्पताल जाने वाले मरीज राज्य की ‘कैश के बदले वोट’ वाली संस्कृति की कीमत चुका रहे हैं।
नंदिनी पहले से ही चिंतित थीं जब उनका परिवार तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले के सिट्टाम्बलम में पल्लदम-उडुमलाई रोड पर निकला। उनकी बुजुर्ग मां को कोयंबटूर के अस्पताल में तुरंत इलाज की जरूरत थी और परिवार ने इलाज के लिए ₹2 लाख नकद की व्यवस्था की थी।
लेकिन वे फ्लाइंग स्क्वॉड की जांच चौकी पार नहीं कर पाए। अधिकारियों ने पैसों के स्रोत की जांच के लिए पूरी रकम जब्त कर ली।
नंदिनी चेकपोस्ट पर रो पड़ीं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। पैसे जब्त कर लिए गए—और इसके साथ ही परिवार का समय पर इलाज कराने का मौका भी छिन गया।
यह अकेली घटना नहीं है
15 मार्च से आचार संहिता लागू होने के बाद, पूरे तमिलनाडु में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात कर दिए गए हैं। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों, किसानों और आम लोगों पर पड़ रहा है।
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार बिना दस्तावेज के ₹50,000 तक नकद ले जाया जा सकता है। इससे ज्यादा रकम के लिए स्रोत और उद्देश्य का प्रमाण जरूरी है। जैसे: बैंक निकासी रसीद, बिल/इनवॉइस, व्यापार रिकॉर्ड, मेडिकल बिल और शादी का निमंत्रण।
यदि मौके पर दस्तावेज नहीं दिखाए गए, तो अतिरिक्त नकदी जब्त कर सरकारी खजाने में जमा कर दी जाती है।
₹10,000 से ज्यादा मूल्य के सामान की भी जांच होती है, और ₹10 लाख से अधिक की जब्ती आयकर विभाग को भेजी जाती है।
3 दिन में ₹23.28 करोड़ जब्त
आचार संहिता लागू होने के 3 दिनों के भीतर ही नकद, शराब, ड्रग्स, कीमती धातु, फ्रीबीज़ के रूप में कुल ₹23.28 करोड़ की जब्ती हुई है।
मुख्य चुनाव अधिकारी अर्चना पटनायक ने साफ कहा कि नकदी सीमा में कोई बदलाव नहीं होगा।
उन्होंने कहा, “अगर लोगों के पास दस्तावेज हैं, तो वे कितनी भी रकम ले जा सकते हैं, लेकिन सही कागजात दिखाने होंगे।”
कड़ी निगरानी
निगरानी का आलम ये है कि 4,200 से ज्यादा टीमें तैनात की गई हैं। जिसमें 2,106 फ्लाइंग स्क्वॉड और 2,106 सर्विलांस यूनिट शामिल हैं। यही नहीं, डिजिटल ट्रांजैक्शन पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि वोट खरीदने जैसी गतिविधियों को रोका जा सके।
व्यापारियों और किसानों की परेशानी
सिट्टाम्बलम जैसी घटनाओं ने लोगों में नाराजगी पैदा की है। छोटे व्यापारी कहते हैं कि रोज का लेन-देन ₹50,000 से ज्यादा होता है। सब्जी विक्रेता नकदी और सामान ले जाने से डर रहे हैं।
पोलाची जैसे पशु बाजार खाली पड़े हैं। किसान खाद खरीदने और बुवाई टाल रहे हैं। शादी वाले परिवार सोना नहीं खरीद पा रहे
चुनाव आयोग से अपील
व्यापार संगठनों ने चुनाव आयोग से नियमों में राहत देने की मांग की है। तमिलनाडु व्यापारी संघ के ए.एम विक्रमराजा ने मांग की कि ₹5 लाख तक नकद/सामान ले जाने की अनुमति दी जाए। खाने और व्यापारिक वस्तुओं को छूट मिले।
अन्य संगठनों ने सीमा ₹2 लाख करने की मांग की है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालास्वामी ने सख्ती का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में चुनाव के दौरान नकद, सोना, घरेलू सामान वोटरों को लुभाने के लिए बड़े पैमाने पर बांटा जाता है। उन्होंने कहा, “ऐसी खराब प्रथाएं किसी और राज्य में इतनी बड़ी मात्रा में नहीं देखी जातीं।”
कड़ी कार्रवाई की जरूरत
उन्होंने सवाल उठाया, “अगर इन गलत प्रथाओं को रोकने के लिए कार्रवाई होती है, तो लोग इसे उत्पीड़न क्यों कहते हैं?”
उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए सख्ती जरूरी है।
तमिलनाडु में चुनाव के दौरान जब्ती के आंकड़े हमेशा ज्यादा रहे हैं। 2024 में कुल ₹460.85 करोड़ की जब्ती हुई। राजस्थान और गुजरात के बाद तमिलनाडु इस मामले में तीसरे स्थान पर रहा।
जब्त सामान वापस कैसे मिलेगा?
लोग जिला शिकायत समिति में अपील कर सकते हैं जिसमें शामिल हैं प्रोजेक्ट डायरेक्टर और ट्रेजरी अधिकारी। दस्तावेज दिखाने के बाद पैसा या सामान वापस मिल सकता है।

