पुडुचेरी में ‘फ्रेंडली फाइट’ बनी INDIA गठबंधन की कमजोरी
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पुडुचेरी में INDIA गठबंधन के प्रमुख सहयोगी—DMK और कांग्रेस—सत्तारूढ़ NDA के खिलाफ संयुक्त चुनौती पेश करने में विफल रहे हैं

पुडुचेरी में ‘फ्रेंडली फाइट’ बनी INDIA गठबंधन की कमजोरी

गठबंधन में समन्वय की भारी कमी के बीच DMK और कांग्रेस पांच सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस कुछ सीटों पर अपने ही सहयोगी दलों CPIM और VCK के खिलाफ भी मैदान में है।


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चुनावी माहौल वाले पुडुचेरी में जो गठबंधन प्रयोग के रूप में शुरू हुआ था, वह अब राजनीतिक परीक्षा बनता जा रहा है। DMK और कांग्रेस पांच विधानसभा क्षेत्रों में सीधे मुकाबले में हैं, जो INDIA ब्लॉक के भीतर तालमेल की स्पष्ट कमी को दर्शाता है।

स्थिति को और जटिल बनाते हुए, कांग्रेस उन सीटों पर भी चुनाव लड़ रही है जहां उसके सहयोगी CPI(M) और VCK पहले से मैदान में हैं। इससे चुनाव एकजुट गठबंधन की लड़ाई के बजाय बहुकोणीय मुकाबले में बदल गया है।

‘फ्रेंडली फाइट’ मॉडल और उसकी सीमाएं

यह रणनीति उत्तर भारत के राज्यों, खासकर बिहार में देखे जाने वाले “फ्रेंडली फाइट” मॉडल जैसी है, जहां कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा होते हुए भी कुछ सीटों पर अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए चुनाव लड़ती है।

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में काम करने वाला यह मॉडल पुडुचेरी जैसे छोटे निर्वाचन क्षेत्रों में कारगर नहीं हो सकता, जहां कुछ सौ वोट भी नतीजों को बदल सकते हैं।

पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जो असम और केरल के साथ आयोजित होगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी।

तमिलनाडु में अलग तस्वीर

पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में 23 अप्रैल को चुनाव होने हैं। वहां DMK और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नहीं है, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर लंबी बातचीत और विवाद के बाद ही समझौता हो पाया।

विवाद की जड़: सीट बंटवारा और नेतृत्व

पुडुचेरी की मौजूदा स्थिति की जड़ DMK और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर लंबे समय से चल रहे मतभेद हैं।

चुनाव की घोषणा से पहले ही बातचीत को लेकर तनाव शुरू हो गया था। जैसे ही चुनाव कार्यक्रम घोषित हुआ और नामांकन शुरू हुए, दोनों दलों के उम्मीदवार अपनी-अपनी पसंदीदा सीटों से नामांकन दाखिल करने लगे।

कांग्रेस ने 22 सीटों पर नामांकन किया जबकि DMK ने 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। अंतिम समय तक कई सीटों पर दोनों के दावे बने रहे। पुडुचेरी विधानसभा में कुल 30 निर्वाचित सीटें हैं।

सहयोगी बने प्रतिद्वंदी

हालांकि नेल्लिथोप सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार ने गठबंधन अनुशासन का हवाला देते हुए नाम वापस ले लिया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।

आखिरकार पांच सीटों—मंगलम, तिरुबुवनै, राज भवन, कलापेट और कराईकल साउथ—पर DMK और कांग्रेस आमने-सामने हैं।

इस स्थिति ने गठबंधन सहयोगियों को जमीनी स्तर पर प्रतिद्वंदी बना दिया है और INDIA गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उझावरकरई में मुकाबला और भी कड़ा हो गया है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार शिवशंकरन का सामना VCK की पुष्पलता से है। वहीं ऊसुदु और नेत्तापक्कम जैसे क्षेत्रों में भी VCK ने स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरकर मुकाबला बहुकोणीय बना दिया है।

‘INDIA गठबंधन प्रभावी रूप से टूट चुका है’

स्थिति तब और बिगड़ गई जब CPI को सीटें न मिलने पर उसने DMK और कांग्रेस दोनों से दूरी बना ली। वामपंथी दल ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है और गठबंधन की खुलकर आलोचना भी की है।

CPI के राज्य सचिव ए एम सलीम ने कहा: “पुडुचेरी में INDIA गठबंधन प्रभावी रूप से टूट चुका है। हमें उचित स्थान नहीं दिया गया, इसलिए हम इस चुनाव में न DMK और न ही कांग्रेस का समर्थन करेंगे।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी सीमित सीटों पर, खासकर उझावरकरई पर फोकस करते हुए चुनाव लड़ेगी।

पिछली सफलता से बिल्कुल अलग तस्वीर

यह स्थिति पिछले लोकसभा चुनाव से बिल्कुल विपरीत है, जब INDIA गठबंधन ने पुडुचेरी में शानदार एकजुटता दिखाई थी।

कांग्रेस नेता वी वैथिलिंगम ने केंद्र शासित प्रदेश की एकमात्र लोकसभा सीट पर करीब 1.5 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। उस समय गठबंधन ने लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल की थी।

यह जीत संयुक्त प्रचार, वैचारिक तालमेल और वोटों के सहज ट्रांसफर पर आधारित थी।

अब बिखराव, बढ़ता खतरा

अब वही गठबंधन बिखरा हुआ नजर आ रहा है, जहां सहयोगी दल एक-दूसरे के वोट बैंक में सेंध लगा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंतरिक प्रतिस्पर्धा INDIA गठबंधन को कमजोर कर सकती है और सत्तारूढ़ गठबंधन—All India NR Congress और BJP—को फायदा पहुंचा सकती है।

एक विश्लेषक के मुताबिक, “पुडुचेरी जैसे छोटे क्षेत्र में थोड़ी-सी वोटों की टूट भी नतीजों को बदल सकती है। यहां ‘फ्रेंडली फाइट’ वास्तव में फ्रेंडली नहीं, बल्कि निर्णायक साबित हो सकती है।”

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