सीटों पर समझौता मंजूर, पर सिंबल नहीं छोड़ेंगे कमल हासन; जानें बड़ी वजह
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सीटों पर समझौता मंजूर, पर सिंबल नहीं छोड़ेंगे कमल हासन; जानें बड़ी वजह

तमिलनाडु चुनाव 2026: MNM प्रमुख कमल हासन ने DMK गठबंधन में सीटों और सिंबल पर छिड़ी जंग के बीच लिया बड़ा फैसला। अपनी पार्टी की अलग पहचान बचाने के लिए अड़े अभिनेता।


Tamil Nadu Assembly Election : अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि मय्यम (MNM) ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक अत्यंत साहसी और रणनीतिक निर्णय लिया है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल अपने आधिकारिक 'टॉर्च लाइट' चुनाव चिह्न पर ही चुनावी मैदान में उतरेगी। भले ही इस फैसले की कीमत उन्हें DMK गठबंधन में अपनी शुरुआती मांग से बहुत कम सीटों के रूप में चुकानी पड़े। यह ऐतिहासिक निर्णय गुरुवार, 19 मार्च को चेन्नई में आयोजित एक आपातकालीन बैठक में लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता खुद कमल हासन ने की थी। बैठक में मौजूद जिला सचिवों, क्षेत्रीय आयोजकों और कार्यकारी समिति के सदस्यों ने एक सुर में अपनी पार्टी के सिंबल पर टिके रहने का आग्रह किया। कार्यकर्ताओं का मानना है कि पार्टी का वजूद उसकी स्वतंत्र पहचान में ही निहित है। कमल हासन ने सभी की भावनाओं को सुनने के बाद इस पर अपनी मुहर लगा दी है।


DMK के साथ सीट-बंटवारे पर क्यों फंसा है पेंच?
वर्तमान में DMK और MNM के बीच गठबंधन की बातचीत एक नाजुक मोड़ पर है। सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में कमल हासन ने गठबंधन में कम से कम 10 सीटों की मांग रखी थी। हालांकि, राजनीतिक समीकरणों और अन्य सहयोगियों के दबाव के चलते DMK केवल दो सीटें देने पर अड़ी है। सबसे बड़ा विवाद तब शुरू हुआ जब DMK नेतृत्व ने शर्त रखी कि MNM के उम्मीदवारों को उनके 'उगते सूरज' (Rising Sun) सिंबल पर चुनाव लड़ना होगा। इस शर्त ने कमल हासन को गहरे संकट में डाल दिया था। वह सीटों की संख्या में कटौती के लिए तो तैयार हो गए, लेकिन अपनी पार्टी की पहचान खत्म करने वाली शर्त उन्हें मंजूर नहीं थी।

'टॉर्च लाइट' सिंबल: क्यों है यह MNM की लाइफलाइन?
पार्टी के भीतर इस सिंबल को लेकर इतनी जिद क्यों है, इसके पीछे ठोस आंकड़े हैं। MNM के महासचिव ए. अरुणाचलम ने 'द फेडरल' को बताया कि पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी ने इसी सिंबल पर औसतन 4 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं। यह 4 प्रतिशत वोट बैंक सीधे तौर पर कमल हासन के चेहरे और उनकी 'टॉर्च लाइट' की पहचान से जुड़ा है। यदि पार्टी DMK के सिंबल पर लड़ती है, तो मतदाता उन्हें DMK की एक शाखा मात्र समझने लगेंगे। MNM का गठन एक 'वैकल्पिक राजनीति' के तौर पर हुआ था, और दूसरे का सिंबल अपनाना इस मूल विचार के खिलाफ होगा।

गठबंधन धर्म और स्टालिन को दिया गया 'वचन'
सीटों और सिंबल के विवाद के बीच कमल हासन ने एक बड़े राजनेता की परिपक्वता भी दिखाई है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वह आगामी चुनावों में DMK गठबंधन के पक्ष में ही प्रचार करेंगे। हासन ने स्पष्ट किया कि वह इस गठबंधन में केवल सीटों के लिए नहीं, बल्कि 'देश की जरूरत' और लोकतंत्र को बचाने के लिए शामिल हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को व्यक्तिगत रूप से आश्वासन दिया है कि उनकी पार्टी को चाहे कितनी भी कम सीटें मिलें, वे पूरे तमिलनाडु में गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने के लिए अपना पूरा जोर लगा देंगे।

क्या होगा MNM का अगला कदम?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कमल हासन ने 'ब्रांड वैल्यू' को 'सीटों की संख्या' से ऊपर रखा है। दो सीटों पर अपने सिंबल के साथ चुनाव लड़ना भविष्य में पार्टी के विस्तार के लिए बेहतर रणनीति साबित हो सकती है। फिलहाल, पूरी तमिलनाडु की जनता और राजनीतिक गलियारों की नजरें DMK के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या DMK अपने छोटे सहयोगी को अपनी पहचान के साथ लड़ने की अनुमति देगी? कमल हासन आने वाले एक-दो दिनों में अपनी अंतिम आधिकारिक घोषणा करेंगे। यह फैसला तय करेगा कि 2026 की चुनावी जंग में 'टॉर्च लाइट' की चमक कितनी बुलंद रहने वाली है।


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