
केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने बताई CPI(M) और भाजपा गठजोड़ की सच्चाई
विजयन ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी कई बार भाजपा के साथ “सुविधा आधारित गठबंधन” करती रही है और इसी तरह का पैटर्न त्रिशूर लोकसभा चुनाव में भी दिखा...
केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने मंगलवार (24 मार्च) को विपक्षी कांग्रेस पार्टी द्वारा लगाए गए उस आरोप पर तीखा हमला बोला, जिसमें कहा गया था कि चुनावी राज्य में सीपीआई(एम) और भारतीय जनता पार्टी के बीच समझौता है।
विजयन ने कांग्रेस के आरोप खारिज किए
कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल के दावे को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे “निराधार और हास्यास्पद” बताया।
पत्रकारों से बात करते हुए सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता ने यह भी कहा कि जब ए. के. गोपालन ने 1971 में पालक्काड से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, तब उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का समर्थन प्राप्त था।
विजयन ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी कई बार भाजपा के साथ “सुविधा आधारित गठबंधन” करती रही है और इसी तरह का पैटर्न त्रिशूर लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिला।
पुराने उदाहरण और ‘सुविधा गठबंधन’ का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा, “ये आरोप पूरी तरह निराधार और हास्यास्पद हैं। 1971 में जब ए. के. गोपालन पालक्काड से चुनाव लड़ रहे थे, तब कांग्रेस उम्मीदवार को आरएसएस का समर्थन प्राप्त था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का आरएसएस के साथ बिना झिझक गठबंधन करने का लंबा इतिहास रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “ऐसे गठबंधन कई बार दोहराए गए हैं, जो अंततः ‘सुविधा गठबंधन’ के रूप में सामने आते हैं। क्या नेमम में भाजपा का खाता खोलने में कांग्रेस ने मदद नहीं की? कांग्रेस के वोटों का रिसाव साफ दिख रहा था। यही पैटर्न त्रिशूर संसदीय चुनाव में भी नजर आया।”
कांग्रेस का ‘गुप्त गठजोड़’ का आरोप
यह बयान वेणुगोपाल द्वारा केरल में सीपीआई(एम) और भाजपा के बीच “अनैतिक गठजोड़” के आरोपों के बाद आया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि दोनों दलों की उम्मीदवार सूची को ध्यान से देखने पर उनके दावे की पुष्टि होती है।
उन्होंने कहा, “केरल में भाजपा और सीपीआई(एम) के बीच एक गुप्त गठजोड़ के स्पष्ट आरोप हैं। यह कोई निराधार दावा नहीं है। यदि दोनों दलों की उम्मीदवार सूची का गहराई से विश्लेषण किया जाए, तो कई निर्वाचन क्षेत्रों में आपसी समझ और समर्थन साफ दिखाई देता है। मुख्यमंत्री लंबे समय से समझौता कर चुके नेता प्रतीत होते हैं। वे नरेंद्र मोदी के खिलाफ खुलकर नहीं बोलते और ऐसा लगता है कि वे केंद्रीय एजेंसियों जैसे प्रवर्तन निदेशालय के दबाव में काम कर रहे हैं।”
‘अनैतिक राजनीतिक व्यवस्था’ का आरोप
वेणुगोपाल ने आगे कहा, “इसी कारण वे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र के खिलाफ ठोस रुख नहीं अपना रहे हैं। अब जब उन्हें लग रहा है कि केरल उनके हाथ से निकल सकता है, तो सीपीआई(एम) नेतृत्व ने एक अनैतिक राजनीतिक व्यवस्था अपना ली है। कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां सीपीआई(एम) की गतिविधियां भाजपा को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रतीत होती हैं, यहां तक कि उन क्षेत्रों में भी जहां भाजपा पहले से मजबूत है। यह स्पष्ट है कि सीपीआई(एम) और भाजपा दोनों ने अपने ही कार्यकर्ताओं को गुमराह और धोखा दिया है।”

